Antibiotics are not working in case of sepsis | 8954 नवजात पर रिसर्च: सेप्सिस होने पर एंटीबायोटिक नहीं कर रहे काम; विशेषज्ञों ने 2005 से 2024 के बीच बच्चों पर 37 तरह के अध्ययन किए – Jaipur News

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नवजात शिशुओं में होने वाले गंभीर संक्रमण ‘सेप्सिस’ के इलाज को लेकर नया खुलासा हुआ है। इंटरनेशनल जर्नल ‘यूरोपियन जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक्स‘ में सेप्सिस’ के इलाज में एंटीबायोटिक दवाओं के कम होते प्रभाव को बताया है। भारत के वरिष्ठ जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ.

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15% बच्चों में सेफालोस्पोरिन्स एंटीबायोटिक का कोई असर नहीं

  • यह आया सामने : एमिनोग्लाइकोसाइड्स के प्रति 20% मामलों में प्रतिरोध पाया गया। यानी कि 8954 में से 1791 बच्चों में एमिनोग्लाइकोसाइड्स एंटीबायोटिक ने काम नहीं किया।
  • 15% बच्चों में सेफालोस्पोरिन्स एंटीबायोटिक ने कोई असर नहीं किया। यानी कि 8954 में से 1343 बच्चों पर दवा ने असर नहीं किया। मालूम हो कि सेफालोस्पोरिन गंभीर संक्रमणों जैसे सेप्सिस, निमोनिया, और मूत्र मार्ग संक्रमण के लिए महत्वपूर्ण दवा मानी जाती है। एक्सपर्ट की मानें तो एक-तिहाई मामलों में प्रतिरोध का मतलब यह है कि ये दवाएं अब कम प्रभावी हो रही हैं।
  • डब्ल्यूएचओ के अनुसार प्रतिरोधी संक्रमणों के कारण हर साल लगभग 2 लाख नवजातों की मृत्यु हो जाती है।
  • राजस्थान में ही हर महीने 50 हजार से अधिक मरीजों को ये दवाएं दी जाती हैं।
  • वैश्विक स्तर पर 10% मामलों में कार्बापेनेम प्रतिरोध-जीवाणु पाए जाने की पुष्टि हुई है। कार्बापेनेम अंतिम उपाय की एंटीबायोटिक है, जब अन्य उपचार विफल हो जाते हैं तो इसे दिया जाता है। इसका असर नहीं करना गंभीर इसलिए है।

“नवजातों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक बढ़ता हुआ वैश्विक खतरा है, जो नवजात की जिंदगी खतरे में डाल रहा है। एंटीमाइक्रोबियल प्रबंधन मजबूत करना चाहिए। स्थानीय सूक्ष्मजीव निगरानी में निवेश करना चाहिए।”

-डॉ. राम मटोरिया, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ

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