Fake order in the name of former commissioner in TAD | टीएडी में पूर्व आयुक्त के नाम पर फर्जी आदेश: 4 करोड़ के कामों को दे दी मंजूरी; आईएएस के निर्देश के बावजूद अफसरों ने दर्ज नहीं कराया केस – Udaipur News

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जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग (टीएडी) में गड़बड़ियां रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। अब बात मां-बाड़ी केंद्रों में घटिया राशन सप्लाई, टेंडर घोटालों और बिना टेंडर विकास कार्य कराने जैसे घोटालों से आगे निकल गई है। इस बार टीएडी से 4.41 करोड़ रुपए के विकास कार्

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मामला सामने आते ही शक्ति सिंह राठौड़ ने 18 जून 2025 को अज्ञात अधिकारी/कर्मचारी के खिलाफ हाथीपोल थाने में मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 19 जून को पूर्व अतिरिक्त आयुक्त-प्रथम गीतेशश्री मालवीय ने भी आईटी प्रभारी और यांत्रिकी प्रभारी को एफआईआर के लिए लिखित आदेश दिए। इसके बावजूद न तो मुकदमा दर्ज हुआ और न ही किसी को नामजद किया गया।

अब इंजीनियर मनमोहन सिंह की ओर से हाथीपोल थाने में इस मामले शिकायत दी है। जिस पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह कौन है जिसने करोड़ों रुपए का यह कागजी घोटाला करने की हिमाकत की। आईएएस शक्ति सिंह राठौड़ ने दैनिक भास्कर को बताया कि किसी ने उनके नाम से विकास कार्यों से जुड़ी फर्जी प्रशासनिक स्वीकृति जारी की। इसकी जांच की जा रही है। बता दें कि टीएडी में सामग्री की खरीद, टेंडर सहित अन्य कामों में एक के बाद एक गड़बड़ियां सामने आ रही है। इनकी गूंज विधानसभा से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय और राजभवन तक सुनी जा सकती है। दो से तीन मामलों में अभी जांच भी चल रही है।

मंत्री खराड़ी तक पहुंची फाइल, तब खुला फर्जीवाड़ा

जैसे ही 4.41 करोड़ की स्वीकृति का आदेश टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी के पास पहुंचा, उनके पीए ने तत्कालीन आयुक्त सिंह, अतिरिक्त आयुक्त गीतेशश्री और इंजीनियर मनमोहन सिंह से पूछा कि यह फाइल किसने चलाई। जांच में पता चला कि यह फाइल और आदेश दोनों फर्जी हैं। इसके बाद आयुक्त ने अतिरिक्त आयुक्त-प्रथम को अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए।

सड़क-पुलिया, स्कूल में टीनशेड, एनीकट और स्नानघाट जैसे कामों के नाम पर बजट

  • गलियाकोट के अंबाड़ा में 25 लाख से सड़क-पुलिया, 20 लाख से रिंगवॉल, 22 लाख से पुलिया निर्माण।
  • रातडिया में 25 लाख से श्मशान घाट, 25 लाख से परकोटा-सीसी सड़क।
  • साबला के पाटनपुरा में 14 लाख से राउमावि में टिनशेड।
  • चिखली के सेन्डोला में 28 लाख से सीसी सड़क, अंबाड़ा में 18 लाख से रिंगवॉल।
  • सिसोट में 28 लाख से पुलिया, भचड़िया में 45 और 30 लाख से एनीकट।
  • बोसी में 8 लाख से परकोटा, 9 लाख से शिवजी मंदिर के पास सीसी सड़क
  • वलाई में 15 लाख से सीसी सड़क, दौलपुरा में 14 लाख से सीसी सड़क, 10 लाख से नाली, 12 लाख से रिंगवॉल, 12 लाख से टीनशेड।
  • चिखली के गुंदलारा में 25 लाख से स्नान घाट, अंबाड़ा में 14 लाख से चैकडेम, उदड़िया में 25 लाख से सीसी सड़क।

घटिया राशन- सीएम के आदेश पर जांच उदयपुर, डूंगरपुर और सिरोही के 1215 मां-बाड़ी केंद्रों और डे-केयर केंद्रों में घटिया राशन सामग्री सप्लाई करने का मामला सामने आया था। इसकी सीएम भजनलाल शर्मा के निर्देश पर जांच चल रही है। इस मामले में सामग्री के घटिया होने का खुलासा तब हुआ, जब इन केंद्रों के 37,260 बच्चों को खिलाई जा चुकी थी। उदयपुर में 603 केंद्रों पर तेल-चावल, डूंगरपुर में 536 केंद्रों पर उड़द दाल-मसूर दाल, आटा, धनिया, मिर्च, हल्दी, पोहा और राई व सिरोही में 76 केंद्रों पर दाल घटिया मिली।

फर्नीचर घोटाला – 2 साल से जांच जारी राशन सामग्री से पहले टीएडी में खेल सामग्री-फर्नीचर के घोटाले भी सामने आ चुका हैं। 10 करोड़ के फर्नीचर टेंडर की जांच दो साल से चल रही है। राज्यपाल भी टीएडी को इस मामले में कार्रवाई के लिए लिख चुके हैं। इसी साल खेल सामग्री घोटाला सामने आया। एसीबी दो बार विभाग से जांच की अनुमति मांग चुकी है। अफसर जवाब ही नहीं दे रहे। इसमें एक ही तरह की सामग्री एक जिले में 33 हजार में तो वही सामाग्री दूसरे जिले में 1 लाख रुपए में खरीदी गई।

मंत्री कह चुके-दोषी को जेल भेजेंगे, फिर जांच की मंजूरी क्यों नहीं? एसीबी मुख्यालय की ओर से टीएडी के शासन सचिव को 28 जुलाई 2025 को पत्र भेजकर जांच की अनुमति मांगी थी। इससे 6 महीने पहले भी पत्र भेजा गया था। लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं दिया गया। एसीबी ने जिम सामाग्री खरीद, फर्नीचर टेंडर और प्लेसमेंट घोटाले की जांच के लिए अनुमति मांगी है। टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने हाल ही विधानसभा में कहा था कि मैं सभी घोटालों की जांच कराऊंगा और दोषी अधिकारियों को जेल भेजेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब मंत्री खुद जांच कराने के लिए राजी हैं तो अधिकारी एसीबी को सहयोग क्यों नहीं कर रहे?

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