10 मिनट पहलेलेखक: हिमांशी पाण्डेय
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अरुणा ईरानी अब तक 500 से ज्यादा फिल्मों में नजर आ चुकी हैं।
कभी-कभी लगता था कि मैं लड़की क्यों पैदा हुई। बचपन से ही गरीबी देखी, डॉक्टर बनने का सपना देखा, लेकिन हालात ने साथ नहीं दिया। घर की आर्थिक तंगी के कारण छठी क्लास के बाद ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी, लेकिन जब आज की लड़कियों को अपने हक के लिए आवाज उठाते देखती हूं, तो दिल से एक आवाज निकलती है काश जल्दी इस दुनिया से जाऊं और फिर से लड़की बनकर लौटूं। मुझे आज के दौर को जीना है।

यह बात अरुणा ईरानी ने एक इंटरव्यू के दौरान कही थी। आज भले ही अरुणा ऐशो-आराम की जिंदगी जी रही हों, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनके घर में खाने तक के लाले थे।
परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए महज 9 साल की उम्र में ही उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रख दिया था। धीरे-धीरे सफलता भी मिली, लेकिन फिर महमूद संग प्यार की खबरों ने करियर बर्बाद कर दिया। हालांकि इन सभी मुश्किलों से लड़ते हुए उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
आज अरुणा ईरानी के 79वें बर्थडे पर जानते हैं, उनकी जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से…

बेहद गरीबी में बीता बचपन, खाने में चावल-प्याज खाते थे
अरुणा ईरानी के बचपन के दिन बेहद गरीबी में बीते। उनके पिता ड्रामा कंपनी से कुछ खास कमाई नहीं कर पाते थे और जो भी कमाते थे, वह जुए में उड़ा देते थे। वे अक्सर बीमार रहते थे। ऐसे में उनकी मां फिल्मों में छोटे-मोटे रोल करके घर चलाती थीं। कई बार घर में खाने को कुछ नहीं होता था। कई बार तो वे सिर्फ प्याज और चावल खाकर गुजारा करते थे। इसके बावजूद उन्होंने कभी अपनी गरीबी को कमजोरी नहीं माना।
कुनिका सदानंद के पॉडकास्ट में अरुणा ने कहा- हम भले ही तंगी में जी रहे थे, फिर भी अपनी दुनिया में खुश थे। शायद इसलिए बचपन हमेशा खूबसूरत लगता है, क्योंकि अगर आपके पास बहुत पैसा हो, तो उसकी अहमियत समझ नहीं आती। और अगर कुछ न हो, तो भी कोई कमी महसूस नहीं होती, क्योंकि आदत बन जाती है। इसलिए जो मिलता था वो खाते थे और खुश रहते थे।
स्टॉल पर खाना खा रही थीं, दिलीप कुमार ने पूछा- फिल्मों में काम करोगी?
60 के दशक में फिल्मों के ऑडिशन के लिए एजेंट ही बच्चों को ले जाया करते थे। एक दिन एक एजेंट आया और सभी बच्चों को एक फिल्म के ऑडिशन के लिए ले गया, जिसमें अरुणा भी शामिल थीं। उस वक्त अरुणा को लगा कि उन्हें कौन ही सिलेक्ट करेगा, लेकिन अगर वह जाएंगी तो उन्हें कुछ अच्छा खाने को मिलेगा, इसलिए चली भी गईं। वहां पहुंचकर ऑडिशन देने के बजाय अरुणा खाने-पीने में लग गईं। तभी वहां मौजूद दिलीप कुमार की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने जोर से आवाज लगाई, ऐ लड़की, तुम यहां आओ और पूछा, क्या तुम फिल्मों में काम करोगी?
इसके बाद दिलीप कुमार ने उन्हें अपनी फिल्म गंगा जमुना में एक रोल ऑफर किया। यहीं से अरुणा ईरानी के फिल्मी करियर की शुरुआत हो गई। ये बातें अरुणा ने ANI से बातचीत में बताई थी। इसके बाद वह अनपढ़ (1962), जहांआरा (1964), फर्ज (1967), उपकार (1967) और आया सावन झूम के (1969) जैसी फिल्मों में भी नजर आईं।

अरुणा ईरानी ने 1961 में आई फिल्म गंगा जमुना से चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर शुरुआत की।
बॉम्बे टु गोवा में पहली बार बनीं लीड एक्ट्रेस, अमिताभ बच्चन संग आईं नजर
अरुणा लगातार फिल्मों में काम कर रही थीं और पहचान भी मिल रही थी, लेकिन उन्हें लीड एक्ट्रेस का रोल नहीं मिल रहा था, लिहाजा ज्यादातर साइड रोल करती रहीं। फिर फिल्म बॉम्बे टू गोवा में उन्हें पहली बार बतौर लीड एक्ट्रेस मौका मिला, जिसमें वे अमिताभ बच्चन के साथ नजर आईं। इस फिल्म का निर्देशन महमूद ने किया था।
ANI से बातचीत में अरुणा ईरानी ने बताया कि हर कलाकार का सपना होता है कि वह लीड रोल निभाए, मेरा भी यही ख्वाब था। भले ही यह फिल्म छोटी थी, लेकिन मुझे अच्छी फीस मिल रही थी और एक्ट्रेस का काम भी मेरे लिए ठीक था। इसी फिल्म के साथ मैंने ‘कारवां’ भी की थी।

बॉम्बे टु गोवा के दौरान बिग बी भी फिल्मों में नए थे।
महमूद संग अफेयर की चर्चा, करियर पर असर पड़ा
बॉम्बे टु गोवा और कारवां दोनों ही फिल्में हिट साबित हुईं। आमतौर पर ऐसी सफलता के बाद हर एक्ट्रेस का करियर ऊंचाइयों पर पहुंचता है, लेकिन अरुणा के साथ इसका उल्टा हुआ और उन्हें काम मिलना बंद हो गया। इसकी वजह महमूद के साथ उनके अफेयर की चर्चाएं थीं, जिसने उनके करियर पर बुरा असर डाला। दरअसल, बॉम्बे टू गोवा के दौरान अरुणा और महमूद के अफेयर की खबरें फैलने लगीं। यहां तक कहा गया कि दोनों ने चोरी-छिपे शादी कर ली है, जिसका असर अरुणा के फिल्मी करियर पर पड़ा और कई सालों तक उन्हें कोई काम नहीं मिला।
जूम से बातचीत में अरुणा ने कहा- मैं और महमूद अच्छे दोस्त थे। हमने कई फिल्मों में साथ काम किया। उन्होंने मुझे कॉमेडी करना सिखाया और मैं उन्हें अपना गुरु मानती थी, लेकिन शादी की झूठी खबरों ने मेरा करियर बर्बाद कर दिया। मेरी गलती यह थी कि मैंने उस वक्त सफाई नहीं दी। हमें मीडिया के सामने आकर सच्चाई बतानी चाहिए थी, लेकिन हमने चुप्पी साधे रखी।

अफेयर की खबरों के बाद अरुणा और महमूद ने साथ काम नहीं किया।
ढाई साल तक नहीं मिला कोई काम, फिर राज कपूर ने दिया साथ
अरुणा को करीब ढाई साल तक कोई काम नहीं मिला। उन्होंने अब तक जो भी पैसे कमाए थे, सब खत्म हो चुके थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करें। इसी बीच उन्हें दादा कोंडके की मराठी फिल्म ‘आंधळा मारतो डोळा’ (1973) में लावणी डांस करने का मौका मिला। इस गाने के लिए उन्हें ढाई हजार रुपए मिले। लावणी की शूटिंग आरके स्टूडियो के पास हो रही थी।
संयोग से वहीं पर राज कपूर मौजूद थे। उन्होंने अरुणा ईरानी को अपनी फिल्म ‘बॉबी’ (1973) का ऑफर दिया। राज कपूर ने साफ कहा कि ये रोल सिड्यूस जैसा नहीं है। यह एक ऐसा किरदार है, जिसका नेचर फ्लर्ट करने वाला है, जैसे कुछ लोगों की फितरत होती है। काम की सख्त जरूरत होने के कारण अरुणा ईरानी ने तुरंत हामी भर दी। यही से उनकी हिंदी सिनेमा में दूसरी पारी की शुरुआत हुई।
फिल्म बॉबी में एक सीन था जिसमें ऋषि कपूर बिना कपड़ों के बाहर आते हैं और तौलिए से बाल सुखाते हैं। इस सीन में अरुणा ईरानी भी थीं। जब उन्हें यह सीन करना था तो उन्होंने शुरू में मना कर दिया, क्योंकि उन्हें शर्म महसूस हो रही थी। उन्हें यह सीन करना अजीब लग रहा था। फिर जब राज कपूर ने उन्हें समझाया कि सीन की जरूरत क्या है और इसमें कुछ गलत नहीं है, तब वो मान गईं। बाद में अरुणा ने खुद कहा कि ऋषि कपूर ने सीन अच्छे तरीके से किया था और यह सीन फिल्म के लिए जरूरी था। ये बातें उन्होंने लहरें रेट्रो से बातचीत में बताई थीं।

रेखा ने फिल्म से निकलवाया, कहा था- खुद के करियर के बारे में सोचा
अरुणा ईरानी और रेखा 70 और 80 के दशक की मशहूर अभिनेत्रियों में से थीं, जिन्होंने अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया। दोनों ने औरत, कश्मकश और भगवान दादा जैसी कई फिल्मों में एक साथ काम किया। ऑन-स्क्रीन उनकी केमिस्ट्री शानदार रही और उनकी ऑफ-स्क्रीन दोस्ती भी चर्चाओं में रही, लेकिन उनके रिश्ते हमेशा अच्छे नहीं थे।
जब अरुणा और रेखा फिल्म औरत में साथ काम कर रही थीं, तब अरुणा को एक बेहद दमदार रोल मिला था, जिसका सपना कोई भी एक्टर देख सकता है। अरुणा ने उस रोल को बखूबी निभाया भी, लेकिन बाद में रेखा ने वह सीन फिल्म से हटवा दिया।
एक और फिल्म मंगलसूत्र से भी रेखा ने अरुणा को निकलवा दिया था। लहरें रेट्रो चैनल से बातचीत के दौरान अरुणा ईरानी ने बताया- मैंने प्रोड्यूसर से पूछा कि साइनिंग अमाउंट देने के बाद भी मुझे फिल्म से क्यों हटाया गया? तो उन्होंने कहा कि रेखा जी नहीं चाहती थीं कि आप फिल्म में रहें। जब मैंने रेखा से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा- ‘अरुणा अगर तुम यह रोल इमोशनली अच्छे से कर लोगी तो मैं फिल्म में वैम्प लगने लगूंगी।’ इसलिए उन्होंने मुझे फिल्म से हटवा दिया।

रेखा और अरुणा ने साथ में तीन फिल्मों में काम किया है।
एक समय टाइपकास्ट हो गई थीं
अरुणा ईरानी को शुरू में फिल्मों में ज्यादातर विलेन या मजाकिया किरदार ही मिलते थे। उनके ग्लैमरस रोल देखकर लोग उनकी असली एक्टिंग को पहचान नहीं पाए, लेकिन उन्होंने खुद को एक ही तरह के रोल तक सीमित नहीं रखा। धीरे-धीरे उन्होंने मां और मजबूत किरदार निभाने शुरू किए, खासकर 1980 और 1990 के दशक में।
टीवी पर भी उन्होंने समझदार और असरदार रोल किए, जिससे उनकी एक्टिंग की असली ताकत दिखी। उन्होंने कभी खुद को किसी एक छवि में नहीं बांधा, इसी वजह से वो लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री में सम्मान और पहचान बनाए रख सकीं।

अरुणा अपने डांस के लिए भी पहचानी जाती हैं।
शादीशुदा फिल्ममेकर से की शादी, कहा- किसी का घर नहीं तोड़ना चाहती थी
फिल्म कोहराम (1991) के सेट पर अरुणा ईरानी फिल्ममेकर कुकू कोहली से मिली थीं। उस समय कुकू कोहली फिल्म के निर्देशक थे और अरुणा ईरानी एक्ट्रेस थीं। शुरुआत में, दोनों के बीच अच्छी नहीं बनती थी, क्योंकि कुकू कोहली सभी कलाकारों को धर्मेंद्र के आने तक इंतजार करवाते थे, जिससे अरुणा को गुस्सा आता था, क्योंकि वह कई फिल्मों में एक साथ काम कर रही थीं, लेकिन फिर सेट पर दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई और फिर धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई। इसके बाद 1990 में अरुणा ने चुपचाप कुकू कोहली से शादी कर ली थी। शादी के बाद कुकू की पहली पत्नी का निधन हो गया था।
अरुणा ईरानी ने ‘ANI’ से बातचीत में कहा कि जब कोई शादी टूटती है, तो लोग अक्सर महिला को ही दोष देते हैं, जबकि असली जिम्मेदारी पति की होती है कि वह अपनी पत्नी को खुश रखे। उन्होंने माना कि शादीशुदा आदमी से रिश्ता निभाना आसान नहीं होता।
अपने अफेयर पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका रिश्ता किसी को तकलीफ देने या किसी का घर तोड़ने के लिए नहीं था। जब उस आदमी की पत्नी का निधन हुआ, तब उन्होंने हिम्मत दिखाकर इस बारे में खुलकर बात की। अरुणा ने कहा कि अक्सर पत्नियां दूसरी औरत को दोष देती हैं, लेकिन असल में उन्हें अपने पति से सवाल करना चाहिए कि उसने ऐसा क्यों किया। उन्होंने कहा कि किसी को खुश रखना उनकी जिम्मेदारी नहीं थी, ये काम पति का होता है। आखिर में उन्होंने कहा कि किसी रिश्ते में तीसरा इंसान क्यों आता है, ये बात सिर्फ वही दो लोग समझ सकते हैं जो उस रिश्ते में होते हैं।

पति कुकू कोहली के साथ अरुणा ईरानी।
कभी बच्चे न करने का फैसला किया, बोलीं- घर बैठना पड़ता
अरुणा ईरानी ने शादी के बाद बच्चे न करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि नीना गुप्ता बहुत बहादुर हैं, लेकिन उनमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि बच्चे को बिना ठीक परिवार के माहौल में पालें। उन्होंने बताया कि उनके पापा ने दो शादियां की थीं और वो कभी उन्हें खुलकर पापा नहीं कह पाईं। ऐसा माहौल वो अपने बच्चे को नहीं देना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने मां न बनने का फैसला लिया। अरुणा ईरानी ने ये भी बताया कि अगर उन्होंने बच्चे किए होते तो शायद उन्हें अपना काम छोड़कर घर पर ही रहना पड़ता, क्योंकि बच्चे की देखभाल, उसे संभालना सब खुद ही करना होता है।

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