Supreme Court changed 2 major decisions in one month | सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने में 2 बड़े फैसले बदले: सुनवाई जस्टिस पारदीवाला की बेंच में हुई; आवारा कुत्तों और हाईकोर्ट जज का केस शामिल

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55 मिनट पहले

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जस्टिस जमशेद बुरजोर पारदीवाला 9 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने। - Dainik Bhaskar

जस्टिस जमशेद बुरजोर पारदीवाला 9 मई 2022 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने।

सुप्रीम कोर्ट को पिछले एक महीने में अपने 2 बड़े फैसले बदलने पड़े। खास बात यह है कि इन दोनों केसों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस जमशेद बुरजोर पारदीवाला की बेंच ने की। इसके बाद चीफ जस्टिस बीआर गवई को दखल देना पड़ा। आवारा कुत्तों और इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज को आपराधिक मामलों की सुनवाई से हटाने वाले मामले में तीन जजों की बेंच को सौंपा गया। वहीं हिमाचल प्रदेश से जुड़े एक मामले को पारदीवाला से हटाकर जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली तीन जजों को सौंपा गया है।

पहला मामला

4 अगस्त: जज को आपराधिक मामलों की सुनवाई से हटाने का फैसला

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने 4 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार को आपराधिक मामलों की सुनवाई से हटाने का आदेश जारी किया था। जस्टिस प्रशांत कुमार ने एक सिविल विवाद में क्रिमिनल समन सही ठहराया था।

जस्टिस पारदीवाला ने इसे गलती मानते हुए कहा था- प्रशांत कुमार को रिटायरमेंट तक क्रिमिनल केस की जिम्मेदारी न दी जाए। इस तरह के आदेश न्याय व्यवस्था का मजाक बनाते हैं। हमें समझ नहीं आता कि हाईकोर्ट स्तर पर भारतीय न्यायपालिका में क्या हो रहा है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 जजों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ फुल कोर्ट मीटिंग बुलाने की मांग की थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 जजों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ फुल कोर्ट मीटिंग बुलाने की मांग की थी।

8 अगस्त: पारदीवाला ने टिप्पणी हटाई गई CJI बीआर गवई के हस्तक्षेप के बाद जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने उस टिप्पणी को हटा दिया, जिसमें उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज प्रशांत कुमार की आलोचना की थी। स्पष्ट किया कि उनका इरादा प्रशांत कुमार को शर्मिंदगी या बदनाम करने का नहीं था।

दूसरा मामला

11 अगस्त: आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजें

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली 2 जजों की बेंच ने सभी आवारा कुत्तों को 8 हफ्तों में दिल्ली-NCR के आवासीय क्षेत्रों से हटाकर शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था। डॉग बाइट्स और रेबीज के मामलों को देखते हुए यह फैसला सुनाया गया था।

इस फैसले का देशभर में विरोध हुआ। इसके बाद 13 अगस्त को CJI बीआर गवई ने दिल्ली-NCR की सड़कों से आवारा कुत्तों पर लगे प्रतिबंध पर फिर से विचार करने आश्वासन दिया। मामले को जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच को सौंप दिया।

नई दिल्ली में डॉग लवर्स ने कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का विरोध किया था।

नई दिल्ली में डॉग लवर्स ने कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का विरोध किया था।

22 अगस्त: आवारा कुत्तों की नसबंदी-टीकाकरण कर छोड़ें

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को शेल्टर होम भेजने के फैसले को 11 अगस्त को जस्टिस जेबी पारदीवाला को वापस ले लिया। कहा कि जिन कुत्तों को पकड़ा जाता है, उनकी नसबंदी और टीकाकरण कर जहां से उठाया है, वहीं वापिस छोड़ दिया जाए। हालांकि, रेबीज से संक्रमित और आक्रामक व्यवहार वाले कुत्तों को शेल्टर होम में ही रखा जाए।

तीसरा मामला

28 जुलाई: पर्यावरणीय असंतुलन के चलते हिमाचल नक्शे से गायब हो जाएगा

जस्टिस पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने हिमाचल प्रदेश में पर्यावरणीय असंतुलन पर चिंता जताई। कहा कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो पूरा राज्य हवा में गायब हो सकता है। बेंच ने कहा कि राजस्व कमाना सब कुछ नहीं है। पर्यावरण और पारिस्थितिकी की कीमत पर राजस्व नहीं कमाया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब हिमाचल प्रदेश देश के नक्शे से गायब हो जाए।

फिलहाल इस मामले को जस्टिस पारदीवाला से हटाकर जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच को सौंप दिया गया है।

जानिए कौन हैं जस्टिस पारदीवाला​​

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