Rajasthan Vidhan Sabha; Bhajan Lal Sharma BJP MLA | Baat Khari Hai | मानसून सत्र के पहले दिन ‘चोरी’ और ‘गालीबाज’ की गूंज: कानून-मंत्री पर नेताजी की ‘मारवाड़ी कहावत’; सावधान, प्रशासन सो रहा है! – Rajasthan News

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आज बात खरी है में पढ़िए राजस्थान के मानसून सत्र के आगाज के किस्से। सेशन राजस्थान का था, लेकिन विधानसभा परिसर में जो पोस्टर लहराए गए उनका कनेक्शन बिहार इलेक्शन से ज्यादा दिखा। औपचारिक शुरुआत में ही खूब हो-हल्ला हुआ। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की खरी-खरी सुनिए…

1. सदन में ‘चोर’ और ‘गालीबाज’ की गूंज

जो कहते थे कि नफरत के बाजार में उनकी मोहब्बत की दुकान है। अब ‘चोरी’ का नारा बुलंद किए हुए हैं। इसका असर राजस्थान में मानसून सत्र के पहले दिन दिखा। खूब हंगामा हुआ। दुष्यंत कुमार ने कहा था- सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं। यहां तो यही लगा कि- सिर्फ हंगामा खड़ा करना ही मकसद है। राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र की बोहनी ‘चोर’ और ‘गालीबाज’ जैसे शब्दों से हुई।

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी पार्टी के नेता हाथों में पोस्टर लेकर पहुंचे।

राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्षी पार्टी के नेता हाथों में पोस्टर लेकर पहुंचे।

विरोधी पार्टी मार्च करते हुए सदन की देहरी तक पहुंची। हाथों में तख्तियां। चोर-चोर का शोर। मजमा लगा। आभास तो था ही कि ओपनिंग की रस्म-अदायगी शोरगुल वाली होगी। शोक प्रकट करते वक्त भी माननीय शोर प्रकट करते रहे।

सदन के स्पीकर महोदय की हालत सरकारी स्कूल के मास्टरजी जैसी। जैसे उद्दंड बच्चों को चुपचाप सबक पढ़ने की घुड़की दे रहे हों। उधर से नारे लगते रहे, इधर आसन पैरों पर रहा।

लगातार गले की नस फुलाते रहे- ‘हद हो गई…नहीं, अनुमति नहीं है…तख्ती-पर्चे मत लहराइये…सदन की गरिमा का ध्यान रखिए…बिराजिए।’ इस बीच कुछ विधेयकों के प्रस्ताव आते रहे। ‘हां पक्ष जीता, हां पक्ष जीता’ कहते हुए स्पीकर महोदय ने झिड़की लगाई-‘आज कुछ नहीं सुनूंगा..मेरी अवहेलना की। ये चौराहा या बाजार नहीं…’

…बाजार कैसे नहीं? विपक्ष कह तो रहा है कि नफरत का बाजार है। मोहब्बत की दुकान के मालिक ने वोट चोरी होने का ऐलान किया है। उसी की रट है। सदन बुधवार तक के लिए स्थगित हुआ। सदन के बाहर भी अपनी बात कहने की होड़ मची।

विपक्ष के नेताओं की गड़गड़ाहट हुई- आयोग में इनकी पार्टी के लोग भेष बदलकर घुस गए। राजस्थान में भी वोट चोरी हुई। सत्ता पक्ष भी पीछे नहीं। गालीबाज-गालीबाज के नारे लगाए। कभी-कभी हंगामा किसी मकसद तक नहीं पहुंचता। और कभी कभी मकसद ही सिर्फ हंगामा होता है। खैर, आरंभ है प्रचंड।

2. बोतल निशान वाली पार्टी के नेताजी की ‘मारवाड़ी कहावत’

नागौर वाली नेताजी अपने व्यक्तित्व और कृतित्व के लिए चर्चा में रहते हैं। बड़े निशानची हैं। कोई न कोई उनके निशाने पर रहता ही है। खुद भले बिजली बिल चुकाएं या न चुकाएं। माननीयों को ‘झटके’ जरूर देते रहते हैं।

जयपुर में सब इंस्पेक्टर भर्ती रद्द करवाने के लिए धरने पर बैठे थे। कोर्ट ने भर्ती रद्द का फैसला दे दिया। फिर क्या था, नेताजी की मुराद पूरी हुई। बल्लियों उछलने लगे। खूब नाचे।

राजनीति में क्रेडिट का केक कटता है तो सबमें नहीं बंटता। नेताजी बाबा किरोड़ी से भिड़ गए। क्रेडिट को लेकर उधर से भी दावा आ रहा था। सांसद महोदय ने मंत्रीजी को और मंत्रीजी ने सांसद महोदय को खूब लपेटा।

जी-भर खरी-खोटी सुनाने के बाद हाथ मिलाकर अलग हो गए। सीजफायर के बाद कानून मंत्री जोगारामजी ने गोला दाग दिया। बोले-भर्ती रद्द नहीं हुई है, फैसला सरकार को करना है।

नेताजी को ये बात दूध में नींबू निचोड़ने वाली लगी। पत्रकारों के सामने मारवाड़ी कहावत की आड़ में कानून मंत्रीजी पर भी आड़ी-तिरछी बात कह गए। बोले- मारवाड़ी में एक कहावत है-नाजोगा…जो किसी काम का नहीं। ये जोगारामजी नहीं हैं..नाजोगारामजी हैं। क्या ही कहा जाए।

सांसद हनुमान बेनीवाल ने एसआई भर्ती को लेकर कानून मंत्री जोगाराम पटेल के खिलाफ टिप्पणी की।

सांसद हनुमान बेनीवाल ने एसआई भर्ती को लेकर कानून मंत्री जोगाराम पटेल के खिलाफ टिप्पणी की।

3. पब्लिक की डिमांड है, लेकिन प्रशासन सो रहा है..

अब किस्सा कालूराम जी का। नहीं..नहीं। ये कोई नेता-अफसर नहीं। मंत्री-स्पीकर भी नहीं। नेतागण पब्लिक की डिमांड पर कुछ भी कर गुजरने का नारा लगाते हैं।

कालूरामजी नारा नहीं लगाते, कर गुजरते हैं। बल्कि कर गुजर गए। दरअसल, बूंदी के दई गांव में बारिश ने खूब उथल-पुथल मचाई। कच्ची झोंपड़ी में रहने वाले कालूराम का अनाज भीग गया।

दीवार गिर गई। बिस्तर तर हो गए। जहां पूजा करते थे, वो मंदिर भी धंस गया। कालूराम बूढ़ी माई को कंधे पर बिठाकर पानी में खड़े रहे। बहुत बुरी बीती।

अब नुकसान की भरपाई कैसे हो तो गांव वालों से सलाह ली। राय दी गई-ऐसे तो कोई सुनेगा नहीं। प्रशासन को सुनाना है तो चढ़ जाओ टावर पर। कालूराम को बात जंच गई। पब्लिक की डिमांड थी।

कालूराम टावर पर चढ़ गए। जब पूछताछ हुई तो कालूराम ने आपबीती सुनाने के साथ-साथ ये भी कह दिया कि पब्लिक के कहने पर चढ़ गए थे। महाराज का साध्य तो ठीक ही था, साधन गलत चुन लिया।

बारिश के बाद हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए बूंदी के कालूराम को ये तरीका सूझा। एक्शन हुआ तो कहा-पब्लिक की डिमांड थी।

बारिश के बाद हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए बूंदी के कालूराम को ये तरीका सूझा। एक्शन हुआ तो कहा-पब्लिक की डिमांड थी।

अब पाली की बात करें। बारिश ने यहां भी सड़कों की परीक्षा ली। गड्‌ढे हो गए। जगह-जगह पानी भर गया। शिकायतें की गई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। लोगों ने गड्‌ढे पर ही बोर्ड लगा दिया। लिखा- सावधान, अभी प्रशासन सो रहा है।

पास ही खड़ी मासूम बच्ची लक्षिता ने ताना सा मारा- देखो कितने गड्‌ढे हैं। पानी भरा है। हम स्कूल जाते हैं, फिसल जाएं तो क्या होगा? इसे कोई ठीक तो कराओ।

पाली में टूटी रोड पर लोगों ने यह बोर्ड रख दिया। लिखा था- पाली प्रशासन सो रहा है।

पाली में टूटी रोड पर लोगों ने यह बोर्ड रख दिया। लिखा था- पाली प्रशासन सो रहा है।

4. चलते-चलते…

चलते-चलते संस्कार की बात कर लेते हैं। नहीं-नहीं किसी साधु महाराज के प्रवचन नहीं करेंगे। यह तो डूंगरपुर पुलिस का ‘ऑपरेशन संस्कार’ है।

इसमें बदमाशों को पकड़ कर सुधारा जाता है। फिर हाथ जोड़कर माफी मंगवाई जाती है। इस प्रक्रिया का वीडियो बनाकर शेयर किया जाता है। यह सब आम जन की भलाई के लिए है।

ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकलकर एक कार ड्राइवर जिले के धंबोला थाना इलाके में गुजरात सीमा से सटी मांडली पुलिस चेक पोस्ट पहुंच गया।

यहां सादा वर्दी में एक पुलिसकर्मी ने उसे हड़काया। पुलिस का रौब दिखाया। रौब दिखाने के दौरान शराब की बू ने पूरी कार को महका दिया। धमकी ने जोर मारा- जल्दी रकम निकाल।

पीठ दिखाकर भाग रहे हेड कॉन्स्टेबल ने शराब के नशे में एक ड्राइवर से घूस मांग ली। उसने वीडियो बनाना शुरू किया तो चौकी की तरफ भागे। साथी पुलिसकर्मी ने भी उन्हें रवाना होने का इशारा किया।

पीठ दिखाकर भाग रहे हेड कॉन्स्टेबल ने शराब के नशे में एक ड्राइवर से घूस मांग ली। उसने वीडियो बनाना शुरू किया तो चौकी की तरफ भागे। साथी पुलिसकर्मी ने भी उन्हें रवाना होने का इशारा किया।

कार वाले ने संस्कार को साइड में रखकर मोबाइल का कैमरा चालू कर लिया। गन की तरह कैमरा जब घूसखोर पुलिसकर्मी की तरफ ताना गया तो वह पीठ दिखाकर चौकी की तरफ भागा।

वहां वर्दी में मौजूद पुलिसकर्मी को लगा जैसे कोई मिसाइल उसकी तरफ आ रही है। उसने घूसखोर पुलिसकर्मी को धक्का मारकर वहां से नौ-दो-ग्यारह हो जाने को कहा।

बाद में पता चला कि रिश्वतखोरी इन साहब का इतिहास रहा है। 13 ऑडियो सामने आए थे। फाइल से मुंह छुपाकर भागे थे। अब बताए डूंगरपुर पुलिस, इन जैसों के लिए कोई ऑपरेशन है क्या?

वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। कल फिर मुलाकात होगी…

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