अभिजीत सिंह | गोरखपुर5 मिनट पहले
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गोरखपुर में शिक्षक समाज सुप्रीम कोर्ट के TET आदेश से गहरे संकट में है। आदेश के अनुसार, 2011 से पहले नियुक्त सभी सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को अगले दो वर्षों में TET पास करना अनिवार्य है। पास न होने पर उनकी सेवा समाप्त होगी या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश शिक्षा तंत्र और रोजगार दोनों के लिए सीधे खतरा है। वर्षों से बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षक अचानक परीक्षा की दौड़ में फंस जाएंगे, जिससे बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ेगा।
शिक्षकों में आक्रोश उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ और जिले की कार्यसमिति ने आदेश को सीधे अन्याय करार दिया। उनका कहना है कि यह आदेश लाखों शिक्षक और उनके परिवारों के जीवन और रोजगार के लिए बड़ा खतरा है।
जिलाध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश धर दुबे ने कहा की यह फैसला शिक्षा, न्याय और मानवता तीनों के खिलाफ है। लगातार बदलते आदेश शिक्षक समाज को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। प्रशासन लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की भूमिका को महत्व नहीं दे रहा। यह आदेश लाखों परिवारों और बच्चों के भविष्य पर हमला है।
भूत लक्षित आदेश ने बढ़ाई विवाद की आग संघ के जिला मंत्री श्रीधर मिश्रा ने कहा यह आदेश पूरी तरह अनुचित है। 2009 में RTE एक्ट और 2010 में शासनादेश के अनुसार पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार भूतलक्षित आदेश लागू कर पूरे शिक्षक समुदाय को सीधे संकट में डाल दिया।
कौड़िया ब्लॉक अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि मूल मामला केवल अल्पसंख्यक विद्यालयों का था, लेकिन NCET 2017 के संशोधन के जरिए इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया। पहले की सेवा शर्तों और वर्षों से निभाई जा रही जिम्मेदारी को नजरअंदाज करना सीधे अन्याय के समान है। शिक्षक समाज शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक आंदोलन के लिए तैयार है।