Lord Krishna’s teachings, Even if it is difficult, it is best to stick to our religion and our duty, lesson of lord krishna to arjun | सही निर्णय कैसे लें?: श्रीकृष्ण की सीख- भले ही कठिन हो, लेकिन अपने धर्म और अपने कर्म में बने रहना श्रेष्ठ है

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23 घंटे पहले

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जब मन किसी उलझन में, ओवरथिंकिंग में फंसा हो तो श्रीमद् भगवद्गीता के तीसरे अध्याय में इस समस्या का समाधान भगवान श्रीकृष्ण ने बताया है-

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।

स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।।”

श्रीमद् भगवद्गीता, अध्याय 3, श्लोक 35

जब मन किसी उलझन में होता है, जब लगातार अलग-अलग विचार चलते रहते हैं, ऐसे समय में व्यक्ति सोचता है कि अब आगे क्या होगा?, क्या मैं सही कर रहा हूं?, लोग क्या सोचेंगे? ऐसे सवालों में उलझा हुआ व्यक्ति सही निर्णय नहीं ले पाता है। ऐसी स्थिति के लिए भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि हमें अच्छी तरह आचरण में लाए हुए दूसरे के धर्म और कर्म की बजाय कम गुण वाले अपने धर्म और कर्म को अपनाना चाहिए। अपने धर्म में मरना भी श्रेष्ठ है, लेकिन दूसरों का धर्म भय देने वाला है। हमें वही करना चाहिए जो धर्म के अनुसार सही है।

सही निर्णय तक पहुंचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए…

मन की चंचलता को समझें

भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि मन को वश में करना अत्यंत कठिन है, लेकिन अभ्यास और वैराग्य भाव से ये संभव है। जब हम अपने विचारों को देखना शुरू करते हैं, उनसे जुड़ना बंद करते हैं, तो पहली बार हमारे और हमारे विचारों के बीच एक दूरी बनती है। यही दूरी हमारे जीवन में स्पष्टता लेकर आती है।

स्वधर्म का अनुसरण करें, स्वयं की राह अपनाएं

अधिकतर लोग इस बात को लेकर भ्रमित हैं कि वह अपनी जिंदगी में क्या करे, समाज, माता-पिता, सोशल मीडिया, हर कोई कहता है कि क्या करना चाहिए। लेकिन गीता सिखाती है कि दूसरों का धर्म निभाना कितना भी सफल लगे, लेकिन हमें अपना धर्म अपनाना चाहिए, यही सबसे श्रेष्ठ है। आपका रास्ता, आपकी पहचान से जुड़ा होता है। जब आप अपने स्वधर्म को पहचानते हैं, तो ओवरथिंकिंग कम होने लगती है, क्योंकि निर्णय का आधार भीतरी स्पष्टता होती है, बाहरी अपेक्षाएं नहीं।

फल की चिंता से मुक्त होकर कर्म करो

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन, ये गीता का मूलमंत्र है। ओवरथिंकिंग का बड़ा कारण यही है कि हम परिणाम को लेकर पहले से ही घबराने लगते हैं। अगर फेल हो गए तो क्या?, अगर उम्मीद पर खरे नहीं उतरे तो? श्रीकृष्ण समझाते हैं कि फल हमारे अधिकार में नहीं है। हम केवल अपने कर्म पर ध्यान दें। जब हम सिर्फ वर्तमान के कार्य पर ध्यान देते हैं, तब भविष्य की आशंका हमें कमजोर नहीं कर पाती हैं।

सफलता और असफलता में संतुलन बनाए रखें

जीवन में सफलता और असफलता दोनों आएंगे, लेकिन जो व्यक्ति हर उतार-चढ़ाव पर आत्ममूल्यांकन करने लगता है, वह ओवरथिंकिंग की दलदल में फंस जाता है। योगस्थः कुरु कर्माणि, योग का अर्थ है संतुलित मन, जो न तो सफलता से प्रसन्न होता है, न ही असफलता से दुखी होता है। ये संतुलन ही विचारों की बाढ़ को और ओवरथिंकिंग को रोक सकता है।

मन को संयमित रखें

गीता में बताया गया है कि इंद्रियां मन को बाहर की ओर खींचती हैं, जिससे मन असीम इच्छाओं, तुलनाओं और लालसाओं में उलझ जाता है। यही अनियंत्रित इच्छाएं ओवरथिंकिंग को जन्म देती हैं। इंद्रियों को दबाने की नहीं, उन्हें सही दिशा देने की आवश्यकता है। धीरे-धीरे अभ्यास से मन को भीतर की ओर मोड़ा जा सकता है। जब मन संयमित होने लगता है तो मन की गलत इच्छाएं शांत होने लगती हैं और हम ओवरथिंकिंग से दूर होने लगते हैं।

बुद्धि को बल दें, निर्णय की शक्ति को बढ़ाएं

मन की स्थिति तब डगमगाती है जब बुद्धि कमजोर हो जाती है। गीता में बुद्धियोग की बात की गई है, जिसमें बुद्धि को ज्ञान, विवेक और आत्मचिंतन से मजबूत किया जाता है। जब बुद्धि स्पष्ट होती है, तब मन भटकता नहीं है, बल्कि निर्देशों का पालन करता है। ओवरथिंकिंग तब घटती है, जब निर्णय दृढ़ होते हैं। बुद्धि बढ़ाने के लिए ग्रंथों का पाठ करें, सत्संग करें।

किसी नियंत्रित करने की कोशिश न करें

मनुष्य सोचता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में होना चाहिए। यही सोच उसे डर, चिंता और ओवरथिंकिंग में डाल देती है। श्रीकृष्ण कहते हैं, सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज, सब कुछ मेरे चरणों में समर्पित कर दो। समर्पण कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ा बल है, इससे मन हल्का होता है और मन वर्तमान में स्थिर होता है।

गीता हमें बताती है कि मन को दबाना नहीं है, उसे सही दिशा देना है। जब मन बुद्धि के अधीन होता है, जब हम स्वधर्म में ध्यान लगाते हैं, जब परिणामों से ऊपर उठकर कर्म करते हैं, तब हम ओवरथिंकिंग से बचते हैं और स्पष्टता, साहस और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।

स्वधर्मे निधनं श्रेयः, अपने मार्ग पर चलिए, चाहे वह कठिन हो, लेकिन वही शांति देगा।

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