Narnaul, Mahendergarh, Manish Saini, Awarded, National Film Award, Updated | नारनौल के मनीष सैनी को तीसरी बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: ‘गिद्ध’ ने दिलाया सम्मान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों मिला अवॉर्ड – Narnaul News

Actionpunjab
5 Min Read


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों पुरस्कार लेते मनीष सैनी

हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अटेली कस्बे के निवासी मनीष सैनी को उनकी शॉर्ट फिल्म ‘गिद्ध’ (The Scavenger) के लिए 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया। आज दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह स

.

यह मनीष सैनी का तीसरा नेशनल अवॉर्ड है। सैनी ने एक बार फिर अटेली और हरियाणा का नाम पूरे देश में रोशन किया है।

समाज के हाशिए पर खड़े तबके की कहानी बयां करती है फिल्म ‘गिद्ध’

भारतीय सिनेमा में सामाजिक सरोकारों और नई सोच को लेकर अपनी अलग पहचान बनाने वाले निर्देशक मनीष सैनी को आज राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। शॉर्ट फिल्म ‘गिद्ध’ समाज के हाशिए पर खड़े तबके की कहानी बयां करती है। इसमें मानवीय संघर्ष, सामाजिक विडंबनाओं और जीवन की कठोर परिस्थितियों को गहरी संवेदनाओं के साथ प्रस्तुत किया गया है।

आलोचकों के अनुसार, यह फिल्म केवल एक कथा नहीं बल्कि समाज के आईने में झांकने का अनुभव कराती है। यही वजह है कि इसे बेस्ट शॉर्ट फिल्म का राष्ट्रीय सम्मान दिया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मान लेते मनीष सैनी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मान लेते मनीष सैनी।

तीसरी बार मिला राष्ट्रीय सम्मान, पिता बोले- भगवान ऐसा बेटा सबको दे

तीसरी बार राष्ट्रीय सम्मान मिलने पर मनीष सैनी के परिवार में खुशी का माहौल है। उनके पिता सुगन चंद सैनी, जो भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और माता शकुंतला देवी ने भावुक होकर कहा भगवान ऐसा बेटा सबको दे, जिसने न केवल अटेली का बल्कि हरियाणा और पूरे देश का नाम रोशन किया।

मनीष सैनी के बारे में जानें…

मनीष सैनी का जन्म 3 मई 1985 में एक साधारण परिवार में हुआ था। इनके चार बहने हैं 2 इन से बड़ी है 2 इन से छोटी है। इनके पिता सुगन चंद सैनी जो नगरपालिका अटेली के चेयरमैन तथा तीन बार नगर पार्षद रहे हैं। इनकी माता शकुंतला देवी ग्रहणी है।

इनके माता-पिता बताते हैं कि इनका जो बचपन है वह अटेली में ही बीता है। उस दौरान दसवीं तक आदर्श विद्या मंदिर में पढ़ाई की तथा दसवीं के बाद सरस्वती विद्या मंदिर नारनौल में 12वीं की पढ़ाई की। इन दिनों के दौरान वह अपने बचपन के दोस्तों के साथ रामलीला मंचन दशहरे के टाइम रावण दहन करना इनका बचपन का शौक था।

बचपन में जब यह दूध नहीं पीते थे तब इनकी माता शकुंतला इनको 1 रुपया दिखाकर कहती थी दूध पी लो नहीं तो पैसे नहीं मिलेंगे। मनीष रुपया लेने के लिए दूध पिता था और गुल्लक में डालकर बचत करता था। उसमें पैसे बचाने की बचपन से ही आदत थी।

पहली बार गुजराती फिल्म ढह का किया निर्माण

मनीष सैनी ने अपनी शिक्षा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन अहमदाबाद से पूरी की। जिसके बाद उसने अपनी पहली गुजराती फिल्म ढह का निर्माण किया। वर्ष 2018 में इस फिल्म को बेस्ट गुजराती फिल्म का अवॉर्ड मिला था।

4 फीचर और 1 शॉर्ट फिल्म बनाई

मनीष सैनी अब तक 4 फीचर फिल्म और 1 शॉर्ट फिल्म बना चुके हैं। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन अहमदाबाद फिल्म एंड वीडियो कम्युनिकेशन का कोर्स किया उसके बाद फिल्म की कहानी लिखने लगे और पहली कहानी ढह लिखी और साल 2017 में फिल्म बन कर तैयार हुई और 2018 में पहला नैशनल अवॉर्ड मिला।

गुजराती सिनेमा से मनीष सैनी ने बनाई अलग पहचान मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले मनीष सैनी ने गुजराती सिनेमा में अपनी एक खास जगह बनाई है। उनकी फिल्मों में मानवीय मूल्यों, सामाजिक सरोकार का दृष्टिकोण दर्शाया जाता रहा है।

फिल्म समीक्षकों का मानना है कि सैनी भारतीय सिनेमा को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उसे सामाजिक मुद्दों से जोड़कर नई दिशा देते हैं।

पहले मिले राष्ट्रीय पुरस्कार मनीष सैनी को पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें 65वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (2017): गुजराती फिल्म ‘ढह’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान। 69वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (2023): ‘गांधी एंड कंपनी’ को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का अवॉर्ड। 71वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (2025): शॉर्ट फिल्म ‘गिद्ध’ को बेस्ट शॉर्ट फिल्म का सम्मान शामिल हैं।

हरियाणा से निकले और गुजराती सिनेमा में अपनी गहरी छाप छोड़ने वाले मनीष सैनी की यह यात्रा नई पीढ़ी के फिल्मकारों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *