जैसलमेर में मरुस्थल की सुनहरी रेत पर प्रवासी परिंदों का सफर शुरू हो चुका है। यहां धोलिया गांव में पहली बार 13 व्हाइट स्टॉर्क (सफेद सारस) का झुंड देखा गया है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह इस बात का प्रमाण है कि जैसलमेर की पारिस्थितिकी प्रवासी पक्षियों के लिए बेहद अहम है। आने वाले समय में जैसलमेर प्रवासी पक्षियों के अध्ययन और पर्यटन दोनों का हब बन सकता है।
ईआरडीएस फाउंडेशन के मानद सलाहकार डॉ. सुमित डुकिया और गोडावण मित्र अभिषेक बिश्नोई ने सर्वे के दौरान भादरिया ओरण क्षेत्र में इन्हें देखा। इससे पहले यहां अधिकतम 1–2 जोड़े ही आते रहे हैं।
इस पक्षी की खासियत ये है कि ये यूराेप और मध्य एशिया में पाया जाता है। ये जीवनभर एक ही जोड़ा बनाकर रहता है और हर साल पुराने घोंसले का दुबारा उपयोग करता है।

जैसलमेर के भादरिया ओरण क्षेत्र में 21 सितंबर की सुबह खुले घास के मैदान में 13 दुर्लभ प्रवासी पक्षी व्हाइट स्टॉक को विचरण करते देखा गया।
व्हाइट स्टॉर्क एक नजर में धोलिया गांव में दर्ज हुआ व्हाइट स्टॉर्क का झुंड जैसलमेर की पारिस्थिति की और प्रवासी पक्षियों की दुनिया में एक अहम घटना है। यह न केवल स्थानीय लोगों और वैज्ञानिकों के लिए गौरव की बात है, बल्कि इस बात का संकेत भी है कि मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित और आकर्षक है। जैसलमेर में सर्दियों की शुरुआत के साथ अब परिंदों का यह कारवां लगातार बढ़ेगा। आने वाले महीनों में आसमान डेमोइसेल क्रेन के कलरव से गूंजेगा, तालाब फ्लेमिंगो से गुलाबी हो जाएंगे और रेगिस्तान प्रवासी परिंदों की उड़ानों से जीवंत हो उठेगा।
पश्चिमी राजस्थान बना सुरक्षित ठिकाना विशेषज्ञ बताते हैं कि जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर का इलाका सेंट्रल एशियन फ्लाई वे का अहम हिस्सा है, जिससे होकर हर साल हजारों प्रवासी पक्षी भारत आते हैं। यहां की ठंडी लेकिन शुष्क जलवायु, खड़ीन और तालाब इनके लिए सुरक्षित ठिकाना प्रदान करते हैं।
सर्दियों में जैसलमेर में डेमोइसेल क्रेन, फ्लेमिंगो, ह्यूबरारा बस्टर्ड, साइबेरियन हंस व बतख जैसी अनेक प्रजातियां भी दिखाई देती हैं। स्थानीय समुदाय और संस्थाओं की पहल से इनकी मॉनिटरिंग और संरक्षण लगातार हो रहा है।
डॉ. सुमित डुकिया का कहना है, “धोलिया में दर्ज हुआ यह झुंड इस बात का प्रमाण है कि जैसलमेर की पारिस्थितिकी प्रवासी पक्षियों के लिए बेहद अहम है। संरक्षण प्रयास जारी रहे तो यह इलाका भविष्य में प्रवासी पक्षियों के अध्ययन और इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र बन सकता है।”

धोलिया गांव में दर्ज हुआ व्हाइट स्टॉर्क का झुंड जैसलमेर की पारिस्थिति की और प्रवासी पक्षियों की दुनिया में एक अहम घटना है।
धोलिया में मिला दुर्लभ नजारा 21 सितंबर रविवार की सुबह, जब गोडावण मित्र अभिषेक बिश्नोई और ईआरडीएस फाउंडेशन के मानद सलाहकार डॉ. सुमित डुकिया भादरिया ओरण क्षेत्र में सर्वे कर रहे थे, तब उन्होंने खुले घास के मैदान में 13 बड़े सफेद पक्षियों को चरते और उड़ान भरते देखा। करीब से पहचान करने पर यह स्पष्ट हुआ कि यह दुर्लभ प्रवासी पक्षी व्हाइट स्टॉर्क हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जैसलमेर में इतनी बड़ी संख्या में व्हाइट स्टॉर्क का झुंड दर्ज होना पहली बार हुआ है। इससे पहले जिले के अलग-अलग हिस्सों में 1–2 जोड़े देखे जाते रहे हैं, लेकिन झुंड में दर्ज होना इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी के लिए अहम संकेत है।

जैसलमेर के धोलिया गांव में 13 व्हाइट स्टॉर्क का एक साथ दिखना क्षेत्र की पारिस्थितिकी के लिए अहम संकेत माना जा रहा है।
संरक्षण और गिरती संख्या व्हाइट स्टॉर्क की संख्या पिछले कुछ दशकों में तेजी से घटी है। इसके प्रमुख कारण इस प्रकार है:
- शिकार
- दलदली क्षेत्रों का नष्ट होना
- बिजली की तारों से टकराना
- जलवायु परिवर्तन
- हालांकि यूरोप में संरक्षण प्रयासों से इनकी संख्या अब स्थिर हो रही है।
- भारत में भी राजस्थान और गुजरात के तटीय क्षेत्रों में यह शीत प्रवासी मेहमान बनकर आते हैं।
जैसलमेर की जलवायु और प्रवासी पक्षियों का आकर्षण
- जैसलमेर थार मरुस्थल का हिस्सा है। यहां की जलवायु 3 मुख्य स्वरूपों में विभाजित है –
- गर्मियां (अप्रैल-जून) : तापमान 45–48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
- मानसून (जुलाई-सितंबर) : बहुत कम वर्षा, औसतन 150 मिमी।
- सर्दियां (नवंबर-फरवरी) : तापमान 5–20 डिग्री सेल्सियस, शुष्क और ठंडी हवाएँ।
यही सर्दियों का मौसम प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करता है। जब यूरोप, मंगोलिया और साइबेरिया के झील-तालाब बर्फ से ढक जाते हैं, तब वहां भोजन और पानी मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में प्रवासी परिंदे हजारों किलोमीटर उड़कर राजस्थान और गुजरात के गर्म व अपेक्षाकृत सुरक्षित इलाकों में पहुंचते हैं।

व्हाइट स्टॉर्क यूरोप में सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माने जाते हैं।
जैसलमेर में आने वाले प्रमुख प्रवासी पक्षी- जैसलमेर प्रवासी पक्षियों का “हॉटस्पॉट” माना जाता है। हर साल अक्टूबर से फरवरी तक यहां अनेक प्रजातियों के पक्षी दिखाई देते हैं।
1. डेमोइसेल क्रेन (कुरजा)
- मंगोलिया और साइबेरिया से आते हैं।
- खिचन गाँव (फलौदी) इनके लिए प्रसिद्ध ठिकाना है।
- बड़ी संख्या में आते हैं और ग्रामीण इन्हें अनाज खिलाकर स्वागत करते हैं।
2. ग्रेटर फ्लेमिंगो
- यूरोप और एशिया के खारे झीलों से आते हैं।
- रामसर साइट व खारे तालाब इनका पसंदीदा ठिकाना।
3. ह्यूबरारा बस्टर्ड
- अरब से आता है।
- लुप्त प्राय प्रजाति, अक्सर डेजर्ट नेशनल पार्क में देखी जाती है।
4. साइबेरियन प्रवासी पक्षी
- हंस, बतख, पेलिकन आदि साइबेरिया से आते हैं।
- तालाबों और खड़ीनों में बड़ी संख्या में देखे जाते हैं।
5. व्हाइट स्टॉर्क (सफेद सारस)
- यूरोप और मध्य एशिया से आते हैं।
- जैसलमेर में अब तक जोड़े के रूप में मिलते रहे, पर अब पहली बार झुंड में दर्ज।

जैसलमेर में प्रवासी पक्षियों का आगमन इस बात का सूचक है कि यहां कि पारिस्थितिकी अभी भी जीवंत और उपयोगी है।
सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे : अंतरराष्ट्रीय मार्ग जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर का भूभाग सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे के मध्य में आता है। यह एक प्रमुख प्रवासी मार्ग है, जिससे होकर हर साल हजारों पक्षी एशिया और यूरोप से भारत की ओर आते हैं। यह मार्ग न केवल पक्षियों के लिए अहम है बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी शोध का केंद्र है। प्रवासी पक्षियों का आगमन इस बात का सूचक है कि यहां की पारिस्थितिकी अभी भी जीवंत और उपयोगी है।
ईआरडीएस फाउंडेशन और स्थानीय समुदाय की भूमिका पिछले एक दशक से ईआरडीएस फाउंडेशन पश्चिमी राजस्थान में स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर कम्युनिटी साइंस प्रोजेक्ट चला रहा है। इसमें युवाओं को प्रशिक्षण देकर वन्यजीव संरक्षण और मॉनिटरिंग में शामिल किया जाता है। यही कारण है कि पिछले 3 साल में जैसलमेर में व्हाइट स्टॉर्क के 5 अलग-अलग स्थलों की जानकारी जुटाई गई। हाल ही 21 सितंबर को खाबा गांव के पास बुच खड़ीन में भी इनका एक जोड़ा दर्ज किया गया था।
विशेषज्ञ की राय डॉ. सुमित डुकिया कहते हैं – “धोलिया में दर्ज हुआ यह झुंड इस बात का प्रमाण है कि जैसलमेर की पारिस्थितिकी प्रवासी पक्षियों के लिए बेहद अहम है। यह इलाका केवल गोडावण का ही घर नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अनेक दुर्लभ पक्षियों का सुरक्षित ठिकाना है। अगर स्थानीय समुदाय की भागीदारी और संरक्षण प्रयास ऐसे ही जारी रहे तो आने वाले समय में जैसलमेर प्रवासी पक्षियों के अध्ययन और पर्यटन दोनों का हब बन सकता है।”
नजरिया : जैसलमेर और प्रवासी परिंदों का रिश्ता जैसलमेर का नाम सुनते ही रेगिस्तान, किले और हवेलियां याद आती हैं, लेकिन यहां का असली आकर्षण सर्दियों में लौटने वाले प्रवासी पक्षी भी हैं। यह परिंदे न केवल पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखते हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान करते हैं। हर साल हजारों पक्षी प्रेमी और पर्यटक इनको देखने जैसलमेर आते हैं, जिससे इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलता है।
