प्रशासन के खिलाफ विरोध करते हुए लोग
अमृतसर जिले के वेरका गांव में इन दिनों एक पुरानी लेकिन बेहद अहम जगह को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गांव की सार्वजनिक ज़मीन, हड्डा रोड़ी पर कब्जे की कोशिशों का आरोप लग रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से यह स्थान मरे हुए पशुओं के निपटारे के
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हड्डा रोड़ी की जमीन
हड्डा रोड़ी का महत्व
गांववालों के अनुसार, हड्डा रोड़ी केवल एक खाली ज़मीन नहीं बल्कि गांव की ज़रूरत है। मरे हुए पशुओं को खुले में फेंकने से बीमारी फैलने का खतरा रहता है और आवारा जानवरों का आतंक बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए पंचायत कमेटी ने इस जगह पर चारदीवारी करवाई थी, ताकि स्वच्छता बनी रहे और किसी तरह का खतरा न हो। वर्षों से यहां पशुओं का सुरक्षित निपटारा होता आया है।
विवाद की शुरुआत
विवाद तब खड़ा हुआ जब पास ही बसी एक कॉलोनी जिसकी नींव लगभग 15 साल पहले रखी गई थी के कुछ निवासियों ने इस जमीन की शिकायत नगर निगम में कर दी। शिकायत के बाद निगम की ओर से अचानक कार्रवाई करते हुए हड्डा रोड़ी की चारदीवारी गिरा दी गई। यह घटना गांववालों के लिए चौंकाने वाली थी। उनका आरोप है कि यह काम बिना किसी सूचना और अनुमति के किया गया और इसके पीछे कुछ प्रभावशाली लोगों का हाथ है।
डिप्टी मेयर के पति पर आरोप
गांववालों ने सीधे तौर पर अमृतसर की सीनियर डिप्टी मेयर के पति पर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हीं के दबाव में हड्डा रोड़ी की चारदीवारी तोड़ी गई और अब इस जगह पर कॉलोनी के लिए पार्क बनाने की योजना बनाई जा रही है। ग्रामीणों ने इस कदम को गांव के अधिकारों और जरूरतों पर सीधा हमला बताया है। उन्होंने बताया कि गांव के लिए हड्डा रोड़ी की जगह बेहद जरूरी है, अगर यह जगह खत्म हो गई तो गांव में मरने वाले जानवरों को कॉलोनी में घर के आगे फेंक दिया जाएगा।
ग्रामीणों का गुस्सा
गांववासियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी ज़मीन वापस नहीं दी गई, तो वे मजबूरी में मरे हुए पशुओं को उसी जगह पर फेंकेंगे, जहाँ से उनका हक छीना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हड्डा रोड़ी सरकारी दस्तावेजों और पंचायत रिकॉर्ड में दर्ज है और इसे निजी स्वार्थ के लिए हड़पना सीधा गैरकानूनी काम है।
ग्रामीणों ने डीसी स्तर तक शिकायत दर्ज करवाई है, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार है। उनका कहना है कि यह सिर्फ ज़मीन का मामला नहीं है, बल्कि गाँव के सम्मान और हक का सवाल है।
आंदोलन की चेतावनी
गांव की मांग है कि हड्डा रोड़ी को पूर्व स्थिति में बहाल किया जाए। यदि प्रशासन ने उनकी बात नहीं मानी, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। गांववालों का मानना है कि उनकी बुनियादी जरूरतों को इस तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और यदि ज़रूरत पड़ी तो वे सड़क पर उतरकर तीखा विरोध करेंगे।
वहीं, आरोपों पर सफाई देते हुए सीनियर डिप्टी मेयर के पति का कहना है कि हड्डा रोड़ी में पले आवारा कुत्तों से लोगों को जान का खतरा था। इसी कारण सरकार ने इसे हटाने और जगह का वैकल्पिक उपयोग करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि इन पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। यह कार्य प्रशासन की तरफ से किया जा रहा है। सरकार की तरफ से कई सालों से जानवरों को कॉरपोरेशन की जगह से बाहर लेकर जाने के निर्देश दिए गए हैं और ऐसे खुले में जानवरों का फेंकना सिर्फ बीमारियों को न्योता देता है। इसीलिए जहां भी आबादी के पास हड्डा रोड़ी का स्थान है, उसे हटाया जाए और अगर कोई पालतू जानवर मरता है तो उसे उठाने के लिए कॉरपोरेशन से संपर्क किया जाए।