CAG report reveals negligence in drug testing in Tamil Nadu | CAG रिपोर्ट में खुलासा- तमिलनाडु में दवा जांच में अनदेखी: कफ सिरप से बच्चों की मौत मामला; सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच की मांग खारिज की

Actionpunjab
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नई दिल्ली51 मिनट पहले

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CAG रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में तमिलनाडु में दवाई जांच में अनदेखी की गई। फाइल - Dainik Bhaskar

CAG रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 में तमिलनाडु में दवाई जांच में अनदेखी की गई। फाइल

तमिलनाडु में बने कफ सिरप से एमपी-राजस्थान में बच्चों की मौत का मामला चर्चा में आने के बाद भारत के महालेखा परीक्षक (CAG) की 10 दिसंबर 2024 की तमिलनाडु के पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रचर एंड मैनेजमेंट ऑफ हेल्थ सर्विस से जुड़ी एक रिपोर्ट में सामने आई।

इसमें बताया गया है कि राज्य में ड्रग इंस्पेक्शन (टेस्टिंग) में कमी देखी गई थी। साथ ही ड्रग्स (दवा) सैंपल कलेक्शन में भी कमी की गई थी। तमिलनाडु में एक लाख सैंपल के टेस्टिंग का टारगेट था, लेकिन सिर्फ 66,331 टेस्ट ही किए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश-राजस्थान में कफ सिरप से बच्चों की मौत मामले में CBI या ज्यूडिशियल जांच की मांग खारिज कर दी है। CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने ब्रीफ सुनवाई के बाद ये फैसला किया।

विशाल तिवारी ने याचिका में मांग की थी कि ये लापरवाही की चरम सीमा है। इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। केंद्र की ओर से पेश सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा-

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याचिका अखबारों में पढ़ी गई खबरों पर आधारित है। घटना से संबंधित कोई भी दस्तावेज या सबूत याचिकाकर्ता के पास मौजूद नहीं है। ऐसे में इस याचिका पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।

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MP के छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा में जहरीले कफ सिरप कोल्ड्रिफ के सेवन से अब तक 25 बच्चों की मौत हो चुकी है। सिरप बनाने वाली श्रीसन फार्मास्युटिकल का मालिक रंगनाथन 9 अक्टूबर को चेन्नई से गिरफ्तार किया गया। उसे आज छिंदवाड़ा लाया जा रहा है। मामले में जांच SIT कर रही है।

एमपी एसआईटी टीम रंगनाथन को नागपुर एयरपोर्ट से छिंदवाड़ा लाई।

एमपी एसआईटी टीम रंगनाथन को नागपुर एयरपोर्ट से छिंदवाड़ा लाई।

CAG ने 2024 में क्या कहा…

  • 2016-17 में तमिलनाडु में कुल 1,00,800 टेस्टिंग का टारगेट था, लेकिन 34% कम यानी 66,331 टेस्ट ही किए गए।
  • 2020-21 में ड्रग्स इंस्पेक्शन की कमी बढ़कर 38% हो गई, इस दौरान 1लाख 800 टेस्ट की जगह केवल 62,358 टेस्ट ही किए गए।
  • 2016 से 2021 के पीरियड में सबसे ज्यादा 40% टेस्ट की कमी 2019-20 में दर्ज की गई थी।
  • ड्रग्स इंस्पेक्टरों ने दवा के सैंपल कलेक्ट करने में लापरवाही दिखाई, साल 2018-19 और 2020-21 में सैंपल कलेक्शन में 54% की कमी रही।

मध्य प्रदेश में जहरीले कफ सिरप पीने से अब तक 25 बच्चों की मौत

कोर्ट रूम लाइव…

याचिकाकर्ता एडवोकेट विशाल तिवारी, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता

याचिकाकर्ता: यह पहली बार नहीं है जब ऐसी मिलावटी दवा से मौतें हुई हैं। राज्यों के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं, इसलिए जांच एक केंद्रीय एजेंसी से कराई जानी चाहिए।

SG: कोर्ट को बताते हुए- तमिलनाडु, मध्य प्रदेश सहित संबंधित राज्य सरकारें इस मामले में खुद कार्रवाई कर रही हैं। हम राज्यों पर भरोसा नहीं कर सकते? बेशक, वे कार्रवाई करेंगे।

याचिकाकर्ता: कई बच्चों की मौत हो चुकी है और किसी तरह की लैब टेस्टिंग या क्लीनिकल ट्रायल नहीं किए गए।

SG: आपत्ति जताते हुए- जब भी कुछ होता है, वे अखबार में पढ़कर सीधे कोर्ट चले आते हैं, जबकि सारी संस्थाएं पहले से मौजूद हैं।

CJI: याचिकाकर्ता से पूछते हुए- आपने अब तक कितनी जनहित याचिकाएं दायर की हैं… तिवारी ने कहा कि 8-10 पीआईएल… इसके बाद बेंच ने याचिका खारिज कर दी

तमिलनाडु में बनने वाली कोल्ड्रिफ सिरप में 48% जहर

कांचीपुरम जिले के सुंगुवर्चत्रम में स्थित श्रीसन फार्मास्यूटिकल की यूनिट से कोल्ड्रिफ सिरप (बैच नंबर SR-13) जब्त किया गया। जांच में पता चला कि इसमें नॉन-फार्माकॉपिया ग्रेड प्रोपीलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल हुआ, जो संभवतः डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल से दूषित था। दोनों ही केमिकल किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले जहरीले पदार्थ हैं।

जैसे ही सैंपल चेन्नई की सरकारी ड्रग्स टेस्टिंग लैब में भेजे गए, वहां से 24 घंटे में रिपोर्ट दी गई। इसमें पाया गया कि कोल्ड्रिफ सिरप का यह बैच 48.6% w/v DEG से जहरीला और ‘Not of Standard Quality’ है। जबकि अन्य चार दवाओं (रेस्पोलाइट D, GL, ST और हेप्सैंडिन सिरप) को स्टैंडर्ड क्वालिटी का पाया गया।

9 अक्टूबर: सरकार देशभर में कफ-सिरप बनाने वाली कंपनियों की जांच करेगी

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) देशभर में सिरप बनाने वाली फॉर्मा कंपनियों की जांच और सैंपल टेस्टिंग करेगी। सरकार ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से सिरप बनाने वाली कंपनियों की लिस्ट मांगी है, ताकि उनकी क्वालिटी और सुरक्षा की जांच की जा सके।

CDSCO ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को बताया कि तीन सिरप कोल्ड्रिफ, रेस्पिफ्रेश-टीआर और रिलाइफ की बाजार में बिक्री और उनके प्रोडक्शन पर भी रोक लगाई है। पूरी खबर पढ़ें…

जानिए क्या है ColdRif कफ सिरप से जुड़ा मामला

मध्य प्रदेश में अब तक 25 बच्चों की मौपरत श्रीसन फार्मास्युटिकल के बनाए कफ सिरप ColdRif से हो चुकी है। जांच में पाया गया कि इस सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) मिला हुआ था। जो जहरीला पदार्थ है। ये इंसानों में किडनी, लिवर और इम्यून सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। पूरी खबर पढ़ें…

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कफ सिरप से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

मध्य प्रदेश के रीवा में एम्बुलेंस बनी नशे की डिलीवरी वैन: भास्कर की पड़ताल में खुला कफ सिरप माफिया का जाल; अब तक 25 बच्चों की मौत

मध्य प्रदेश में जहरीला कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से अब तक 25 बच्चों की मौत हो चुकी है। छिंदवाड़ा, बैतूल और पांढुर्णा जिलाें में मामले सामने आने के बाद से ही प्रदेश के हर जिले में गांव से लेकर मुख्यालय तक मेडिकल स्टोर, एजेंसी और क्लिनिक पर जांच कर अमानक दवाइयां जब्त की जा रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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