Rajnath Singh; UNTCC Chiefs Conclave 2025 | Delhi India | राजनाथ बोले- कुछ देश अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहे: कुछ अपना दबदबा बनाना चाहते हैं; शांति भारत के अहिंसा-सत्य की फिलॉसफी में शामिल

Actionpunjab
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नई दिल्ली3 घंटे पहले

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को दिल्ली में UNTCC के प्रमुखों के कॉन्क्लेव को संबोधित किया। - Dainik Bhaskar

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को दिल्ली में UNTCC के प्रमुखों के कॉन्क्लेव को संबोधित किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र सैनिक योगदान देने वाले देशों (UNTCC) के प्रमुखों के सम्मेलन में एक सभा शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा- कुछ देश अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने किसी देशों का नाम लिए बिना कहा- कुछ देश अंतरराष्ट्रीय नियमों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कुछ खुद के नियम बनाकर अगली सदी पर अपना दबदबा बनाना चाहते हैं। इन सबके बीच, भारत पुरानी अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था को कायम रखने में मजबूती से खड़ा है।

राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि शांति भारत के अहिंसा और सत्य की फिलॉस्फी में गहराई से शामिल है, जिसका प्रचार महात्मा गांधी ने किया था। उन्होंने कहा कि शांति की स्थापना सिर्फ एक मिलिट्री मिशन नहीं, बल्कि एक साझा जिम्मेदारी है।

बता दें कि भारत पहली बार UNTCC प्रमुखों के कॉन्क्लेव की मेजबानी कर रहा है। यह सम्मेलन में 14 अक्तूबर से 16 अक्तूबर तक चलेगा। इसमें फ्रांस, इटली, थाइलैंड सहित 32 देशों के सीनियर सैन्य अधिकारी एक साथ मौजूद रहेंगे।

रक्षा मंत्री बोले- मानवता संघर्षों और हिंसा से ऊपर राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में संघर्ष और हिंसा के बजाय मानवता को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा- महात्मा गांधी के लिए, शांति सिर्फ युद्ध का अभाव नहीं था, बल्कि न्याय, सद्भाव और नैतिक शक्ति की एक सकारात्मक स्थिति थी।

रक्षा मंत्री ने कहा- हम सभी जानते हैं कि शांति स्थापना एक सैन्य मिशन से कहीं बढ़कर है। यह एक साझा जिम्मेदारी है। यह हमें याद दिलाती है कि संघर्षों और हिंसा से ऊपर, मानवता है और इस बनाए रखने की जरूरत है।

राजनाथ सिंह के संबोधन की 3 अहम बातें-

  • दशकों से, लगभग 2,90,000 भारतीय जवानों ने 50 से ज्यादा संयुक्त राष्ट्र (UN) शांति अभियानों में सेवा दी है और अपनी साहस और करुणा के लिए वैश्विक सम्मान हासिल किया है।
  • कांगो और कोरिया से लेकर दक्षिण सूडान और लेबनान तक, हमारे सैनिक, पुलिस और मेडिकल पेशेवर, कमजोर लोगों की रक्षा और समाज के पुनर्निर्माण के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं।
  • इस कड़ी में भारत के जवान बलिदान देने से भी पीछे नहीं रहे। देश के 180 से अधिक जवानों ने संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले अपने प्राणों की आहुति दी है। हमारा योगदान बलिदान के बिना नहीं रहा है।

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