Kerala Minister Sivankutty Directs Christian School| Muslim Girl Hijab Controversy​ | केरल में छात्रा को हिजाब पहनकर स्कूल आने की परमिशन: शिक्षा मंत्री ने स्कूल से रिपोर्ट भी मांगी; मैनेजमेंट ने स्टूडेंट को गेट पर रोका था

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तिरुवनंतपुरम26 मिनट पहले

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केरल के शिक्षा मंत्री वी. सिवनकुट्टी - Dainik Bhaskar

केरल के शिक्षा मंत्री वी. सिवनकुट्टी

केरल के शिक्षा मंत्री वी. सिवनकुट्टी ने मंगलवार को कोच्चि के सेंट रीटा पब्लिक स्कूल को आदेश दिया कि वह मुस्ल‍िम छात्रा को हिजाब पहनकर पढ़ाई जारी रखने दें।​ मंत्री ने कहा कि किसी भी स्कूल को संविधान के अधिकारों को तोड़ने की इजाज़त नहीं है।​

सिवनकुट्टी ने स्कूल की प्रिंसिपल और प्रबंधन से बुधवार सुबह 11 बजे तक पूरी रिपोर्ट सौंपने को भी कहा है। ​उन्होंने निर्देश दिए कि छात्रा व उसके माता-पिता को हुई मानसिक परेशानी को तुरंत दूर किया जाए।​

एर्नाकुलम के डिप्टी डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन की जांच में पाया गया कि छात्रा को हिजाब बांधने पर कक्षा में न घुसने देना गंभीर लापरवाही है और यह शिक्षा का अधिकार कानून का उल्लंघन है।​

दरअसल, केरल के कोच्चि स्थित एक निजी क्रिश्चियन स्कूल में सोमवार को 8वीं कक्षा की स्टूडेंट के हिजाब पहनने पर रोक लगा दी गई थी। हालात बिगड़ने के बाद सेंट रीटा पब्लिक स्कूल पल्लुरुथी ने सोमवार और मंगलवार (13 और 14 अक्टूबर) को दो दिन की छुट्टी घोषित कर दी गई थी।

पिता ने माने स्कूल के नियम

कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने बताया कि पिता ने बेटी को स्कूल के नियम मानते हुए पढ़ाई जारी रखने पर सहमति जताई है।​ फिर भी शिक्षा विभाग ने स्कूल के आचरण को ‘गंभीर दुर्व्यवहार’ माना है और भविष्य में ऐसी भूल न होने की चेतावनी दी है।​

7 अक्टूबर को पहली बार हिजाब पहनकर आई छात्रा

स्कूल का कहना है कि छात्रा ने चार महीने तक तय यूनिफॉर्म का पालन किया था लेकिन 7 अक्टूबर को वह पहली बार हिजाब लगाकर आई।​ छात्रा के पिता अज़ीज़ ने अगले दिन प्रबंधन से बात करने पहुंचे, वहां तीखी बहस हुई और वे लाइव वीडियो भी चलाने लगे।​

प्रिंसिपल ने बताया कि स्टूडेंट और उसके परिवार के दबाव में कुछ टीचर्स और स्टूडेंट्स मानसिक तनाव महसूस करने लगे। इसी कारण पैरेंट-टीचर एसोसिएशन (PTA) से चर्चा के बाद दो दिन की छुट्टी देने का फैसला किया गया। विवाद के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी सोमवार को स्कूल पहुंचे और मामले की जांच की।

2022 में कर्नाटक में स्कूल-कॉलेज में हिजाब पहनकर आने पर भी विवाद हुआ था। इसके बाद हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब बैन को सही बताया था।

2022 में कर्नाटक में स्कूल-कॉलेज में हिजाब पहनकर आने पर भी विवाद हुआ था। इसके बाद हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब बैन को सही बताया था।

स्कूल मैनेजमेंट बोला- 30 साल से ड्रेस कोड लागू

स्कूल के PTA सदस्य जोशी कैथावलप्पिल ने बताया कि पिछले 30 साल से स्कूल में एक समान ड्रेस कोड लागू है और सभी धर्मों के स्टूडेंट्स उसका पालन करते हैं। चार महीने तक स्टूडेंट ने नियम का पालन किया लेकिन 10 अक्टूबर को उसने सिर ढकना शुरू कर दिया।

जोशी ने कहा- जब स्कूल ने मना किया, स्टूडेंट के माता-पिता ने जोर दिया कि वह सिर ढककर आएगी। वे कुछ लोगों के साथ स्कूल आए और वीडियो रिकॉर्डिंग करने लगे साथ ही हंगामा किया। इससे बच्चे और टीचर डर गए, इसलिए स्कूल बंद करना पड़ा।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह विवाद सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) से जुड़े लोगों के समर्थन से बढ़ाया गया। SDPI एक इस्लामिक झुकाव वाली पार्टी है। उन्होंने कहा कि स्कूल ने केरल हाईकोर्ट से पुलिस सुरक्षा की मांग की थी और कोर्ट से इसके लिए अनुमति भी मिल गई है।

स्टूडेंट के पिता बोले- ये हमारा अधिकार है

स्टूडेंट के पिता ने कहा कि उनकी बेटी ने इसी साल स्कूल में एडमिशन लिया है। उनका आरोप है कि पहले स्कूल सिर्फ कक्षा के अंदर सिर ढकने से रोकता था, अब गेट पर ही रोक दिया गया है। इससे समानता प्रभावित होती है। ये हमारा अधिकार है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित मंत्री से की है। अगर स्कूल उसे सिर ढकने की अनुमति नहीं देता, तो हम उसे किसी और स्कूल में भेज देंगे।

कर्नाटक में भी हिजाब पहनकर आने पर विवाद हुआ था

फरवरी 2022 में कर्नाटक के कुंडापुरा कॉलेज की 28 मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनकर क्लास अटैंड करने से रोका गया था। मामले को लेकर छात्राओं ने हाईकोर्ट में याचिका लगाते हुए कहा था कि इस्लाम में हिजाब अनिवार्य है, इसलिए उन्हें इसकी अनुमति दी जाए। इन छात्राओं ने कॉलेज गेट के सामने बैठकर धरना देना भी शुरू कर दिया था।

इसके बाद कर्नाटक हाईकोर्ट ने स्कूल-कॉलेज में हिजाब बैन को सही ठहराया था। कोर्ट ने कहा था कि हिजाब इस्लाम की अनिवार्य प्रथा का हिस्सा नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

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कर्नाटक हिजाब विवाद मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस सुधांशु धुलिया की बेंच ने कहा था कि पब्लिक प्लेस पर ड्रेस कोड लागू होता ही है। पिछले दिनों ही एक महिला वकील सुप्रीम कोर्ट में जींस पहनकर आ गईं, उन्हें तुरंत मना किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा था कि ड्रेस कोड लागू करने का मतलब है कि आप लड़कियों को कॉलेज जाने से रोक रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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