India is building a 200 MW nuclear power reactor. | भारत 200 मेगावाट का न्यूक्लियर पावर रिएक्टर बना रहा: नौसेना की ताकत बढ़ेगी, मर्चेंट नेवी और कॉमशिर्यल शिप में भी होगा इस्तेमाल

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नई दिल्ली9 घंटे पहले

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PM मोदी ने 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर कैपेसिटी हासिल करने का टारगेट रखा है, जो अभी 8.8 गीगावाट है। - Dainik Bhaskar

PM मोदी ने 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर कैपेसिटी हासिल करने का टारगेट रखा है, जो अभी 8.8 गीगावाट है।

भारत 200 मेगावाट के छोटे आकार के न्यूक्लियर पावर रिएक्टर बना रहा है, जिनसे कॉमर्शियल जहाजों को पावर दिया जा सकेगा। न्यूज एजेंसी PTI ने रविवार, 19 अक्टूबर को सोर्सेस के हवाले से यह जानकारी दी।

मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इस रिएक्टर को आप कहीं भी लगा सकते हैं, यहां तक कि जहाज पर भी। ये रिएक्टर गर्मी पैदा करते हैं, जिससे बिजली बनती है।

अधिकारी ने बताया कि भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) के साइंटिस्ट 55 मेगावाट और 200 मेगावाट के दो न्यूक्लियर रिएक्टर डेवलप कर रहे हैं। इन्हें सीमेंट जैसी ज्यादा एनर्जी खपत करने वाली कंपनियों के कैप्टिव पावर प्लांट्स में भी लगाया जा सकता है।

मर्चेंट नेवी के जहाजों को भी पावर देगा रिएक्टर

अधिकारी ने बताया कि ये न्यूक्लियर रिएक्टर बहुत सुरक्षित हैं और मर्चेंट नेवी के जहाजों को पावर देने के लिए भी इस्तेमाल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR) भारत में न्यूक्लियर पावर की हिस्सेदारी बढ़ाने में अहम होंगे।

फिलहाल, भारत के पास स्वदेशी न्यूक्लियर सबमरीन – INS अरिहंत और INS अरिघात हैं, जो 83 मेगावाट के रिएक्टर से पावर लेते हैं। तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन INS अरिधमन अभी ट्रायल फेज में हैं। अगर इन सबमरीन में 200 मेगावाट के न्यूक्लियर रिएक्टर इस्तेमाल होते हैं तो इनकी ताकत और रफ्तार बढ़नी तय है।

प्राइवेट कंपनियों को भी न्यूक्लियर प्लांट देने की तैयारी

इसके अलावा सरकार 1962 के एटॉमिक एनर्जी एक्ट (AEA) में बदलाव करने की तैयारी कर रही है, ताकि प्राइवेट कंपनियों को सिविल न्यूक्लियर सेक्टर में आने का मौका मिलेगा। प्लान के मुताबिक सरकार प्राइवेट कंपनियों को न्यूक्लियर पावर प्लांट चलाने और न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल के शुरुआती हिस्से को हैंडल करने की इजाजत दे सकती है।

AEA में बदलाव के चर्चा के मुताबिक, प्राइवेट कंपनियां विदेशों से न्यूक्लियर पावर प्लांट्स के लिए फ्यूल खरीद सकेंगी और इस्तेमाल किए गए फ्यूल को उसी देश में वापस भेज सकेंगी। सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट (CLND) में बदलाव से न्यूक्लियर इक्विपमेंट सप्लायर्स की जिम्मेदारी को भी सीमित करने की कोशिश है।

मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी दावा किया जा रहा है कि सप्लायर को क्रिटिकल इक्विपमेंट देने वाली कंपनी के तौर पर डिफाइन किया जाए। PM मोदी ने 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर पावर कैपेसिटी हासिल करने का टारगेट रखा है, जो अभी 8.8 गीगावाट है।

भारत-अमेरिका भारत में परमाणु रिएक्टर बना रहे

इसी साल 26 मार्च को अमेरिका एनर्जी डिपार्टमेंट (DoE) ने अमेरिकी कंपनियों को भारत में संयुक्त तौर पर न्यूक्लियर पावर प्लांट डिजाइन और निर्माण के लिए अंतिम मंजूरी दी थी। यह मंजूरी भारत और अमेरिका के बीच 2007 में हुई सिविल न्यूक्लियर डील के तहत दी गई थी।

तब तक भारत-अमेरिका सिविल परमाणु समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियां भारत को परमाणु रिएक्टर और इक्विपमेंट निर्यात कर सकती थीं, लेकिन भारत में न्यूक्लियर इक्विपमेंट के किसी भी डिजाइन कार्य या मैन्युफैक्चरिंग पर रोक थी। पूरी खबर पढ़ें…

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18 मई 1974 की सुबह यानी आज से ठीक 51 साल पहले। प्रधानमंत्री आवास में सुबह से ही चहल-पहल थी। इंदिरा गांधी लोगों से मिल जरूर रही थीं, लेकिन अंदर से बेचैन थीं। उन्होंने करीब 8.30 बजे अपने सेक्रेटरी पीएन धर को आते देखा, तो लगभग दौड़ते हुए खुद ही उनके पास पहुंच गईं। इंदिरा ने पूछा- क्या हुआ? धर बोले- बुद्ध मुस्कुराए हैं। इतना सुनते ही इंदिरा ने सुकून की एक गहरी और लंबी सांस ली।

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