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शहर के चंदन चौक स्थित श्रीराम-कृष्ण मंदिर दीपावली पर दीयों से झिलमिला उठता है। यहां श्रीराम-सीता के साथ लक्ष्मण विराजमान है। शाम को इनका विशेष शृंगार होता है। घर-घर से महिलाएं व युवतियां दीपक लेकर आती हैं। मंदिर परिसर में चारों तरफ दीपक की रोशनी रहती है। मंदिर सेठ रामगोपाल मांगीलाल धर्मार्थ ट्रस्ट अध्यक्ष अर्पण अग्रवाल ने बताया कि श्रीराम-कृष्ण मंदिर शहर के बड़े मंदिरों में शामिल है। यहां सालभर श्रद्धालु आते हैं, लेकिन नवरात्र व दीपावली पर श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा रहती है। पूर्व में यहां सनातन धर्म से वंशावली अंकित थी।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि दीपोत्सव पर मंदिर में विभिन्न महोत्सव होते हैं। इसमें अन्नकूट भी रहता है। चार प्रहर की आरती होती है। सुबह करीब 3 बजे मंदिर के द्वार खुलने के बाद भगवान का स्नान, शृंगार करवाकर सुबह 5:15 बजे मंगला आरती, संपूर्ण शृंगार के बाद शृंगार आरती 6:30 बजे होती है। दोपहर 12 बजे तक द्वार खुले रहते हैं। संध्या आरती 7 बजे और रात 9 बजे शयन आरती होती है। कार्तिक माह के चलते इन दिनों महिलाएं प्रतिदिन सुबह 5:30 बजे कीर्तन करती हैं। शहर में भगवान श्रीराम के कई मंदिर है, लेकिन श्रीराम-कृष्ण मंदिर सबसे बड़ा माना जाता है।