Jairam Ramesh Donald Trump pm Modi crude oil import from russia | जयराम रमेश बोले-ट्रम्प ने भारतीय विदेश मंत्रालय को नजरअंदाज किया: कहा- अमेरिकी राष्ट्रपति ने 5 दिन में 3 बार रूसी तेल खरीद का मुद्दा उठाया

Actionpunjab
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नई दिल्ली8 घंटे पहले

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दावे पर केंद्र सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा- ट्रम्प ने पिछले 5 दिन में 3 बार भारत के रूस से तेल इम्पोर्ट का मुद्दा उठाया, इसमें कोई शक नहीं कि वे इस हफ्ते बुडापेस्ट में पुतिन से मुलाकात से पहले इस बात को और दोहराएंगे।

उन्होंने कहा- राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि उन्होंने अपने अच्छे दोस्त प्रधानमंत्री मोदी से बात की और भारत ने रूस से तेल इम्पोर्ट रोकने का विश्वास दिलिया। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ऐसी किसी बातचीत की जानकारी होने से इनकार किया है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प ने मंत्रालय की इस बात को नकार दिया।

दरअसल, 15 अक्टूबर को ट्रम्प ने दावा किया था कि उनकी पीएम मोदी से फोन पर बात हुई। इसमें पीएम मोदी ने ट्रम्प को आश्वासन दिया कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा। अगले दिन भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।

ट्रम्प ने कब-कब बयान दिन

  • 15 अक्टूबर: मैंने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, यह एक बड़ा कदम है।
  • 17 अक्टूबर: भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा, वे पहले 38% खरीदते थे और अब ‘पुलिंग बैक’ कर रहे हैं।
  • 19 अक्टूबर: मैंने प्रधानमंत्री मोदी से बात की और उन्होंने कहा कि वे रूस से तेल नहीं करेंगे। अगर वे ऐसा कहना चाहें कि नहीं की बात हुई, तो उन्हें भारी टैरिफ चुकाना होगा और उन्हें वह नहीं करना होगा।

भारत पर प्रतिबंध का मकसद रूस पर दबाव बनाना

अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रम्प कई बार यह दावा कर चुके हैं कि, भारत के तेल खरीद से मिलने वाले पैसे से रूस, यूक्रेन में जंग को बढ़ावा देता है। ट्रम्प प्रशासन रूस से तेल लेने पर भारत के खिलाफ की गई आर्थिक कार्रवाई को पैनल्टी या टैरिफ बताता रहा है।

ट्रम्प भारत पर अब तक कुल 50 टैरिफ लगा चुके हैं। इसमें 25% रेसीप्रोकल यानी जैसे को तैसा टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 25% पैनल्टी है। रेसीप्रोकल टैरिफ 7 अगस्त से और पेनल्टी 27 अगस्त से लागू हुआ। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव केरोलिना लेविट के मुताबिक इसका मकसद रूस पर सेकेंडरी प्रेशर डालना है, ताकि वह युद्ध खत्म करने पर मजबूर हो सके।

सितंबर में भारत ने 34% तेल रूस से खरीदा

ट्रम्प के दावे के बावजूद, रूस भारत का सबसे बड़ा तेल स्रोत बना हुआ है। कमोडिटी और शिपिंग ट्रैकर क्लेप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ही नई दिल्ली ने आने वाले शिपमेंट का 34 फीसदी हिस्सा लिया। हालांकि, 2025 के पहले आठ महीनों में आयात में 10 फीसदी की गिरावट आई थी।

एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 2025 के अगस्त महीने में रूस से औसतन 1.72 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) कच्चा तेल आयात किया। वहीं, सितंबर में यह आंकड़ा थोड़ा घटकर 1.61 मिलियन bpd रह गया।)

एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह कटौती अमेरिकी दबाव और सप्लाई में डाइवरसीफिकेशन लाने के लिए की गई है। इसके विपरीत रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी निजी रिफाइनरी कंपनियों ने इसकी खरीद बढ़ा दी है।

सरकारी रिफाइनरियों ने रूसी आयात में कमी की

सरकारी कंपनियां (जैसे IOC, BPCL, HPCL) ने रूसी तेल आयात 45% से ज्यादा घटाया। जून में 1.1 मिलियन bpd से सितंबर में घटकर 600,000 bpd रह गया।

वहीं, प्राइवेट रिफाइनरीयां (रिलायंस इंडस्ट्रीज: 850,000 bpd, नयारा एनर्जी: ~400,000 bpd) ने इसे संतुलित किया, जिससे कुल आपूर्ति पर असर नहीं पड़ा।

रूस से सस्ता तेल खरीदने की शुरुआत कैसे हुई?

फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद रूस ने अपने तेल को एशिया की ओर मोड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने 2021 में रूसी तेल का सिर्फ 0.2% आयात किया था।

2025 में यह भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। औसतन 1.67 मिलियन बैरल प्रति दिन की आपूर्ति कर रहा है। यह भारत के कुल जरूरत का करीब 37% है।

भारत रूस से तेल खरीदना क्यों नहीं बंद करता? भारत को रूस से तेल खरीदने के कई डायरेक्ट फायदे हैं…

  • अन्य देशों से सस्ता तेल: रूस अभी भी भारत को दूसरे देशों की तुलना में सस्ता तेल दे रहा है। हालांकि, जो डिस्काउंट पहले 30 डॉलर प्रति बैरल तक था वह अब 3-6 डॉलर प्रति बैरल तक रह गया है।
  • लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स: भारत की प्राइवेट कंपनियों के रूस के साथ लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स हैं। उदाहरण के लिए, दिसंबर 2024 में रिलायंस ने रूस के साथ 10 साल के लिए हर रोज 5 लाख बैरल तेल खरीदी का कॉन्ट्रैक्ट किया। इस तरह के समझौतों को रातोंरात तोड़ना संभव नहीं है।
  • वैश्विक कीमतों पर प्रभाव: भारत का रूसी तेल आयात वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद करता है। यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो ग्लोबल सप्लाई कम हो सकती है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं। यूक्रेन के साथ युद्ध के बाद मार्च 2022 में तेल की कीमतें 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।

भारत के पास रूस के अलावा किन देशों से तेल खरीदने के विकल्प हैं? भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से ज्यादा इम्पोर्ट करता है। ज्यादातर तेल रूस के अलावा इराक, सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देशों से खरीदता है। अगर रूस से तेल इम्पोर्ट बंद करना है तो उसे इन देशों से अपना इम्पोर्ट बढ़ाना होगा…

  • इराक: रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर है, जो हमारे इम्पोर्ट का लगभग 21% प्रोवाइड करता है।
  • सऊदी अरब: तीसरा बड़ा सप्लायर, जो हमारी जरूरतों का 15% तेल (करीब 7 लाख बैरल प्रतिदिन) सप्लाई करता है।
  • अमेरिका: जनवरी-जून 2025 में भारत ने अमेरिका से रोजाना 2.71 लाख बैरल तेल इम्पोर्ट किया, जो पिछले से दोगुना है। जुलाई 2025 में अमेरिका की हिस्सेदारी भारत के तेल आयात में 7% तक पहुंच गई।
  • साउथ अफ्रीकन देश: नाइजीरिया और दूसरे साउथ अफ्रीकन देश भी भारत को तेल सप्लाई करते हैं और सरकारी रिफाइनरीज इन देशों की ओर रुख कर रही हैं।
  • अन्य देश: अबू धाबी (UAE) से मुरबान क्रूड भारत के लिए एक बड़ा ऑप्शन है। इसके अलावा, भारत ने गयाना ब्राजील, और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों से भी तेल आयात शुरू किया है। हालांकि, इनसे तेल खरीदना आमतौर पर रूसी तेल की तुलना में महंगा है।

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