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सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार की अतिक्रमण कर बसी अवैध कॉलोनियों के नियमन करने की मंशा को झटका लगा है। मामला सांगानेर क्षेत्र में हाउसिंग बोर्ड की अवाप्तशुदा जमीन पर बसी 86 अवैध कॉलोनियों का है।
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सरकार इन्हें पट्टे देना चाहती थी, लेकिन मामला हाई कोर्ट पहुंच गया था जहां सरकार के खिलाफ फैसला आया था। सरकार ने इस फैसले के खिलाफ एसएलपी दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। साथ ही सरकार को निर्देश दिया था कि वह अवैध अतिक्रमण हटाकर संबंधित जमीन खाली कराए और जिन अफसरों ने अवैध निर्माणों को मंजूरी दी, उनके खिलाफ कार्रवाई करे। इस फैसले के साथ ही अब हाउसिंग बोर्ड अतिक्रमण हटाने और कब्जा लेने के लिए स्वतंत्र हो गया।
प्रभावशाली लोगों ने काटी कॉलोनियां, सरकार की नियमन की थी तैयारी
हाउसिंग बोर्ड की अवाप्तशुदा जमीनों पर बसी काॅलाेनियों के नियमन के लिए राज्य सरकार ने 12 मार्च 2025 को आदेश निकाला था।
आदेशानुसार इन कॉलोनियों काे जेडीए के नाम ट्रांसफर कर पट्टे देने की प्रक्रिया शुरू करनी थी। इसमें ऐसी अवाप्तिशुदा जमीन जिस पर 50% ज्यादा बसावट हाे चुकी है। सोसायटियों के पट्टे वैलिडिटी 17 जून 1999 रखी थी।
जेडीए में जुलाई में नियमन कैम्प की योजना थी। इनमें ज्यादातर जमीनें ऐसी हैं, जाे हाउसिंग बोर्ड ने अवाप्त की थी, लेकिन कब्जा नहीं लिया था।
प्रभावशाली लोगों ने इन पर कब्जा कर लिया। करीब 86 कॉलोनियां काटकर सोसायटियों के पट्टे जारी कर दिए। {इसे पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था ने पीआईएल के जरिए हाई कोर्ट की खंडपीठ में चुनौती देते हुए कहा कि अफसरों ने भूमाफियाओं से मिलीभगत कर हाउसिंग बोर्ड की जमीन का कब्जेधारियों के पक्ष में नियमन करने का निर्णय लिया।
हाउसिंग बोर्ड ने 69 कॉलोनियों की सूची भी बनाई
हाउसिंग बोर्ड ने 69 अवाप्तशुदा कॉलोनियों की सूची तैयार की है, जिनमें लगभग 7,258 भूखंड हैं। इन कॉलोनियों में 70 से 80 प्रतिशत तक बसावट हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाउसिंग बोर्ड जमीन खाली कराने के लिए स्वतंत्र होगा, जिससे करीब 10 हजार भूखंडधारी प्रभावित होंगे। बोर्ड की सूची में 50 कॉलोनियों के भूखंड शामिल हैं, जबकि डेढ़ दर्जन कॉलोनियों की भूखंड संख्या सूची में नहीं है।