Doctors COVID Insurance Case; Guidelines | Supreme Court | सुप्रीम कोर्ट बोला- डॉक्टर्स का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी: नहीं तो समाज माफ नहीं करेगा; कोविड में मृत प्राइवेट डॉक्टर्स को सरकारी बीमा का लाभ मिले

Actionpunjab
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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोविड-19 के दौरान जान गंवाने वाले प्राइवेट डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सरकारी बीमा योजना का लाभ देने के मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि अगर न्यायपालिका डॉक्टरों का ध्यान नहीं रखेगी और उनके साथ खड़ी नहीं होगी, तो समाज हमें कभी माफ नहीं करेगा।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बीमा कंपनियां वैध दावों का भुगतान करें। उन्होंने कहा कि यह मान लेना गलत है कि प्राइवेट डॉक्टर सिर्फ प्रॉफिट के लिए काम करते हैं। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

मामला प्रदीप अरोड़ा और अन्य लोगों की याचिका से जुड़ा है। इसमें बॉम्बे हाईकोर्ट के 9 मार्च 2021 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टर या स्टाफ को इंश्योरेंस का लाभ तभी मिलेगा जब सरकार ने उनकी सेवाएं आधिकारिक रूप से मांगी हों।

SC बोला- सरकार बताए और कौन सी योजनाएं हैं

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह बताए कि प्रधानमंत्री बीमा योजना के अलावा क्या ऐसी और भी योजनाएं हैं। अदालत ने कहा कि वह एक नियम तय करेगी, जिसके आधार पर बीमा कंपनियां आगे ऐसे मामलों में फैसला ले सकेंगी।

यह मामला किरण भास्कर सुर्गडे की कहानी से जुड़ा है, जिन्होंने अपने पति को कोविड-19 महामारी में खो दिया था। उनके पति ठाणे में एक निजी क्लीनिक चलाते थे। बीमा कंपनी ने उनका दावा यह कहकर खारिज कर दिया कि उनका क्लीनिक मान्यता प्राप्त कोविड अस्पताल नहीं था।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (PMGKP) मार्च 2020 में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत कोविड-19 से ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के परिवार को 50 लाख रुपए का बीमा कवर दिया जाता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने 28 साल पुराने एक केस में फैसला सुनाते हुए कहा था कि किसी डॉक्टर को लापरवाही के लिए तभी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है जब उसके पास योग्यता या स्किल न हो। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और पंकज मिथल की बेंच ने कहा कि जब तक कि यह साबित नहीं हो जाता कि कोई मेडिकल प्रोफेशनल मरीज का उचित देखभाल या इलाज नहीं कर पाया। तब तक लापरवाही का केस नहीं बनेगा। पूरी खबर पढ़ें…

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