फ्रांसीसी टीचर ने 89 नाबालिगों के साथ रेप किया:50 साल में भारत समेत 9 देशों की लड़कियों को निशाना बनाया; मां-मौसी की हत्या की

Actionpunjab
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फ्रांस में एक 79 साल के रिटायर्ड शिक्षक पर 1960 के दशक से 2022 तक 89 नाबालिगों के साथ रेप और यौन शोषण का आरोप लगा है। फ्रांस के ग्रेनोबल शहर में अभियोजक एटिएन मंटो ने मंगलवार को इस केस को सार्वजनिक करते हुए पीड़ितों से आगे आने की अपील की। आरोपी का नाम जैक लेवुग्ल है। अभियोजक के अनुसार जैक लेवुग्ल ने 1967 से 2022 के बीच भारत, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, मोरक्को, नाइजर, अल्जीरिया, फिलीपींस, कोलंबिया और फ्रांस में नाबालिगों के साथ यौन अपराध किए। वह फ्रेंच भाषा के शिक्षक और गुफा अध्ययन (स्पेलियोलॉजी) के ट्रेनर के रूप में काम करता था। अभियोजक के अनुसार, वह हर जगह जाकर युवाओं से मिलता था और उनके साथ यौन संबंध बनाता था। पीड़ितों की उम्र 13 से 17 साल के बीच बताई गई है। वह 2024 में आरोप तय होने के बाद से हिरासत में है। अभियोजक के मुताबिक आरोपी ने अपनी बीमार मां और बुजुर्ग मौसी की हत्या की बात भी कबूल की है। USB ड्राइव से सामने आए 89 पीड़ित यह मामला तब सामने आया जब आरोपी के भतीजे को उसपर शक हुआ। भतीजे ने आरोपी के कमरे की तलाशी ली जहां उसे एक USB ड्राइव मिली, जिसमें नाबालिगों के साथ उसके यौन संबंधों की तस्वीरें शामिल थे। इस ड्राइव में 15 पार्टस में डिटेल में बताया गया था। उसमें उसने खुद नाबालिगों के साथ यौन संबंध का जिक्र किया था। जांचकर्ताओं ने इन लेखों को पढ़कर 89 नाबालिग पीड़ितों की पहचान की। आरोपी ने मां और मौसी की गला घोंट हत्या की जांच के दौरान आरोपी ने 1970 के दशक में अपनी कैंसर से पीड़ित मां को तकिए से दम घोंटकर मारने की बात कबूली। उसने 1990 के दशक में अपनी 92 साल की बुआ की भी तकिए से हत्या की। अभियोजक के अनुसार मौसी ने उसे यात्रा पर जाने से रोका था। मंटो ने कहा, “उसने तय किया कि वह उसे भी मार देगा। जब वह सो रही थी, तब उसने तकिए से उसका दम घोंट दिया।” अपने डायरी में आरोपी ने लिखा था कि उसने दो लोगों की हत्या की है। इन दोनों मामलों में अलग से हत्या की जांच शुरू की गई है। अभियोजक के मुताबिक आरोपी अपने कृत्य को यह कहकर सही ठहराता है कि अगर वह खुद जीवन के अंतिम चरण में ऐसी स्थिति में हो, तो वह भी चाहता है कि कोई उसके साथ ऐसा ही करे। आरोपी का नाम सार्वजनिक हुआ अभियोजक एटिएन मंटो ने दक्षिण-पूर्वी फ्रांस के ग्रेनोबल में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस मामले में आरोपी का नाम सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने कहा, “यह नाम लोगों को पता होना चाहिए, ताकि पीड़ित सामने आ सकें।” जब उनसे पूछा गया कि जांच शुरू होने के समय नाम क्यों नहीं बताया गया, तो उन्होंने कहा कि यह अलग मामला था और पहले मामले की जांच जरूरी थी। बाद में लगा कि जिन पीड़ितों की पहचान नहीं हो पाई है, उन्हें सामने आने का मौका देना जरूरी है। फ्रांस के डॉक्टर ने 25 सालों में 299 मरीजों के साथ यौन अपराध किया था बीते साल भी ऐसा ही एक मामला सामने आया था। मई 2024 में फ्रांस की एक अदालत ने रिटायर्ड डॉक्टर जोएल ले स्कुआर्नेक को 20 साल की सजा सुनाई थी। पीड़ितों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा था कि इस मामले ने सिस्टम की खामियां उजागर कीं, जिनकी वजह से वह बार-बार अपराध करता रहा। जोएल ले स्कुआर्नेक का मामला फ्रांस के इतिहास में सबसे बड़े बाल यौन शोषण मामलों में से एक है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। 74 वर्षीय रिटायर्ड डॉक्टर ने 1989 से 2014 तक के 25 सालों में 299 मरीजों के साथ यौन शोषण या बलात्कार किया, जिनमें ज्यादातर बच्चे थे। इनमें से 256 पीड़ित 15 साल से कम उम्र के थे। अधिकतर अपराध अस्पतालों में हुए, जहां वह काम करता था। डॉक्टर पीड़ितों को एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) देकर अपराध करता था। ले स्कुआर्नेक ने खुद इन सभी अपराधों को कबूल किया और कहा कि उसने घिनौने काम किए हैं। यह मामला 2017 में सामने आया, जब ले स्कुआर्नेक को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान उसके घर से डायरी और नोटबुक मिले, जिनमें उसने खुद अपने अपराधों के बारे में लिखा था। इनमें 299 पीड़ितों के नाम और घटनाओं का जिक्र था। स्कुआर्नेक ने अपनी दो भतीजियों के साथ बलात्कार किया था जोएल ले स्कुआर्नेक को पहले 2020 में एक अलग मामले में 15 साल की सजा सुनाई गई थी, जिसमें उसने अपनी दो भतीजियों समेत चार बच्चों के साथ बलात्कार और यौन शोषण किया था। लेकिन मुख्य मामला फरवरी 2025 में वान्स शहर की अदालत में शुरू हुआ, जो तीन महीने से ज्यादा चला। 28 मई 2025 को अदालत ने उसे अधिकतम 20 साल की सजा सुनाई, जो फ्रांस में यौन अपराधों के लिए सबसे कड़ी सजा है। यह सजा उसकी पिछली 15 साल की सजा के साथ चलेगी। जांच से पता चला कि उसने 1980 के दशक से ही अपराध शुरू कर दिए थे, लेकिन दशकों तक यह किसी को पता नहीं चला। पीड़ितों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस मामले को सिस्टम की गंभीर खामियों का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में निगरानी की कमी, शिकायतों पर ध्यान न देना और डॉक्टरों की जांच प्रक्रिया में ढिलाई की वजह से वह बार-बार अपराध करता रहा। कुछ पीड़ितों ने पहले शिकायत की थी, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। इस मामले ने फ्रांस में स्वास्थ्य प्रणाली पर सवाल उठाए और बाल संरक्षण कानूनों को मजबूत करने की मांग बढ़ाई। कई पीड़ितों ने अदालत में गवाही दी और मुआवजे की मांग की। ————————— ये खबर भी पढ़ें… एपस्टीन फाइल्स-10 देशों में इस्तीफे, 80 ताकतवर लोगों की जांच: अमेरिका से यूरोप तक असर; राजनेताओं-अरबपतियों और शाही परिवारों तक फैली जांच अमेरिका में यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े सीक्रेट दस्तावेज सामने आते ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने करीब 30 लाख पेज के डॉक्यूमेंट्स 30 जनवरी को जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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