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चेन्नई/तिरुवनंतपुरम/कोलकाता32 मिनट पहले
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देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR 28 अक्टूबर से शुरू हो गया है।
12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के चुनाव आयोग के ऐलान पर सियासी गर्मी बढ़ गई है। केरल और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री इसके विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं।
केरल के सीएम पिनराई विजयन ने मंगलवार को इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा- बिहार SIR की संवैधानिक वैधता सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद अन्य राज्यों में यह लागू करना उचित नहीं है।
तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने SIR के खिलाफ एकजुट मोर्चे के लिए 2 नवंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। उनका मुख्य विरोध आधार को नागरिकता का प्रमाण नहीं मानने का है।
उन्होंने कहा कि यह लाखों वास्तविक वोटर्स को वोटर लिस्ट से बाहर करने की साजिश है। चिंता जताई कि वे प्रवासी कामगार भी वोटर लिस्ट में जोड़े जाएंगे, जिनके पास आवश्यक दस्तावेज हैं।
DMK इसका कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर विरोध करेगी। दलों को डर है कि इस प्रक्रिया से वोटर डेमोग्राफी बदल सकती है, जो चुनाव परिणामों पर असर डाल सकती है।
हालांकि, भाजपा की सहयोगी AIDMK ने एसआईआर का स्वागत किया है। वहीं पश्चिम बंगाल में बीएलओ को हिंसा का डर है।


मध्य प्रदेश: गलत जानकारी देने पर केस दर्ज
मध्य प्रदेश में मंगलवार से प्रदेशभर में मतदाता गणना फॉर्म (एन्युमरेशन फॉर्म) का प्रकाशन और बीएलओ की ट्रेनिंग शुरू हो गई है। 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक पूरे प्रदेश में घर-घर सर्वे किया जाएगा।
एक पेज का एन्युमरेशन फॉर्म आपको भरना है। एन्युमरेशन फॉर्म (ईएफ) हर वोटर के लिए अलग प्रिंट होगा। यह तीन भागों में है।
- पहला हिस्सा: वोटर का नाम, इपिक नंबर, पता रहेगा। साथ में क्यूआर कोड, फोटो और पोलिंग बूथ की जानकारी होगी। इसमें वोटर को नया फोटो लगाना होगा।
- दूसरा हिस्सा: जन्मतिथि, आधार, मोबाइल नंबर, पिता, माता व जीवन साथी का नाम और अगर उनके इपिक नंबर हैं तो उसकी जानकारी भरनी होगी।
- तीसरा भाग: पिछले एसआईआर का ब्योरा मिलेगा। पिछले डेटाबेस में आपका या माता-पिता का नाम देखें। अगर है तो इसमें नाम, इपिक नंबर, जिला, राज्य, निर्वाचन क्षेत्र का नाम जैसी जानकारियां भरनी होंगी।
दो बार अपील करने का मौका
अगर किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में गलती से नहीं जुड़ता है, तो उसे दो बार अपील करने का मौका मिलेगा।
पहली अपील कलेक्टर, दूसरी राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुनेंगे। अगर कोई व्यक्ति गणना फॉर्म में गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत कार्रवाई होगी।
जो मतदाता किसी अन्य जगह पर रह रहे हैं, वे अपना एन्युमरेशन फॉर्म ऑनलाइन भरकर बीएलओ को भेज सकते हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने बताया कि किसी से नागरिकता के दस्तावेज नहीं मांगे जाएंगे।
बूथ लेवल ऑफिसर (BLO): हर बूथ पर एक बीएलओ होगा। यह अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं से फॉर्म भरवाएगा। हर बूथ पर 1,000 मतदाता होंगे। कुल 65,014 बीएलओ नियुक्त हैं, साथ ही 7,000 बीएलओ की नियुक्ति प्रस्तावित है।

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