Interview of IG Kailashchand Vishnoi | आईजी कैलाशचंद विश्नोई का इंटरव्यू: साइबर ठगी करने वालों की लोकेशन 91 प्रतिशत तक घट गई लगातार कार्रवाई से घबराकर अब दूसरे जिलों में भाग गए – Bharatpur News

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रेंज की कमान संभालने के बाद आईजी कैलाशचंद विश्नोई ने पुलिसिंग को सिर्फ अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जनता के भरोसे से जोड़ने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। सीमावर्ती जिलों में बढ़ते अपराध, साइबर ठगी और स्थानीय गैंग की चुनौतियों के बीच उन

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पुलिस की साख केवल अपराधियों से सख्ती बरतने में नहीं, बल्कि आमजन से संवाद और विश्वास बनाने में है

Q1. आप किसी नए जिले या रेंज की ज़िम्मेदारी संभालते हैं, तो पहले किस चीज़ को समझना जरूरी मानते हैं? A: मैं सबसे पहले वहां के मानव व्यवहार और स्थानीय ताने-बाने को समझने की कोशिश करता हूं। अपराध के आँकड़े या रिकॉर्ड केवल एक पहलू हैं, लेकिन असली तस्वीर वहां के लोगों की सोच और समस्याओं से बनती है। इसलिए शुरुआत में मैं जनता से संवाद बढ़ाता हूं।

Q. अपने शुरुआती करियर के दिनों में कोई ऐसी घटना रही जिसने आपको पुलिसिंग की असल तस्वीर दिखाई हो? A: हां, एक बार एक गरीब मजदूर की चोरी की शिकायत को लेकर थाने में काफी देर तक सुनवाई नहीं हुई थी। तब मैंने देखा कि पुलिस की संवेदनशीलता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत हो सकती है। उस घटना ने मुझे सिखाया कि कानून का पालन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है इंसानियत के साथ व्यवहार करना। तभी से मैंने तय किया कि पुलिसिंग केवल अपराध रोकना नहीं, बल्कि लोगों का भरोसा जीतना भी है।

Q. अपराध नियंत्रण में कौनसी चुनौती गंभीर है- सीमावर्ती अपराध, साइबर ठगी या स्थानीय गैंग? A: तीनों चुनौतियां अपने-अपने स्वरूप में गंभीर हैं, लेकिन आज के समय में साइबर अपराध बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अपराधी अब मोबाइल व नेटवर्क के ज़रिए लाखों लोगों को निशाना बना लेते हैं। इस के लिए टेक्नोलॉजिकल स्किल और त्वरित इंटेलिजेंस शेयरिंग पर काम कर रहे हैं।

Q. आपको लगता है कि पुलिस और समाज के बीच भरोसे की दूरी अब भी एक चुनौती है? A: पहले से सुधार हुआ है, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं कह सकते। समाज को अब पुलिस से डर नहीं, बल्कि विश्वास होना चाहिए। यही हमारी कोशिश है। हमने ‘जन संवाद’ और ‘थाना दिवस’ जैसी पहल शुरू की हैं, जहां आमजन सीधे अपने सुझाव और शिकायतें रख सकते हैं।

Q. शिकायतकर्ता को समय पर न्याय मिले, इसके लिए आपने रेंज स्तर पर कौन-सी व्यवस्थाएं मजबूत की हैं? A: गंभीर मामलों में शिकायत की ट्रैकिंग सीधे रेंज स्तर से होती है। इसके अलावा, वाट्सऐप हेल्पलाइन और जनसुनवाई पोर्टल को और सक्रिय किया है। मेरा स्पष्ट निर्देश है कि हर पीड़ित बात प्राथमिकता से सुनी जाए।

Q. अगर किसी थाने में आमजन की सुनवाई न हो तो आप एक आईजी के तौर पर कैसे हस्तक्षेप करते हैं? A: पीड़ित को न्याय न मिलना प्रशासनिक नहीं, बल्कि नैतिक असफलता है। हाल ही में धौलपुर-करौली के एक-एक और भरतपुर के थाना चिकसाना और गढ़ी बाजना एसएचओं काे अनुशासनहीनता मामले में हटाया है।

Q. रेंज से जाते वक्त आप कैसी पहचान या बदलाव पीछे छोड़ना चाहेंगे? A: मैं चाहता हूं कि जब भी कोई व्यक्ति भरतपुर रेंज का नाम ले, उसे संवेदनशील, तकनीकी रूप से सशक्त और अनुशासित पुलिस व्यवस्था याद आए। अपराध पर नियंत्रण के साथ-साथ पुलिसकर्मियों में टीम भावना और आत्मविश्वास बढ़ाना प्राथमिकता है। मैं चाहता हूं कि यहां की पुलिस जनता से संवाद करने वाली, सुनने वाली और मददगार छवि के रूप में जानी जाए।

Q. युवा जो पुलिस या सिविल सर्विस में आना चाहते हैं, उनसे क्या कहना चाहेंगे? A: सफलता तभी सार्थक है जब उससे समाज को कुछ अच्छा मिले। युवाओं से कहना चाहूंगा मेहनत करें सफलता जरूर हासिल होगी।

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