November hindu festivals, kartika purnima 2025, teej tyohar of November, darsh amawasya on 19th November | नवंबर के तीज-त्योहार, जानिए किस दिन क्या करें: 5 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा, 6 तारीख से शुरू होगा मार्गशीर्ष मास और 19 को रहेगी अमावस्या

Actionpunjab
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14 घंटे पहले

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2025 का 11वां महीना नवंबर शुरू हो गया है। हिन्दी पंचांग के मुताबिक इस महीने में कार्तिक पूर्णिमा, मार्गशीर्ष मास, उत्पन्ना एकादशी, अमावस्या, विवाह पंचमी जैसे बड़े व्रत-पर्व मनाए जाएंगे। जानिए नवंबर के तीज-त्योहार और किस दिन कौन-कौन से शुभ काम कर सकते हैं…

  • 2 नवंबर (रविवार) – इस साल देवउठनी एकादशी 1 और 2 नवंबर को दो दिन है। आज एकादशी का दूसरा दिन है। कल यानी 1 नवंबर को तुलसी विवाह का पर्व मनाया गया। पंचांग भेद की वजह से कई क्षेत्रों में आज एकादशी व्रत किया जाएगा। शाम को तुलसी के पास दीपक जलाकर पूजा कर सकते हैं।
  • 3 नवंबर (सोमवार) – सोम प्रदोष व्रत: यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। शाम को प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में भगवान शिव की पूजा-अभिषेक करें।
  • 4 नवंबर (मंगलवार) – बैकुंठ चतुर्दशी और मणिकर्णिका स्नान: इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। काशी में इस दिन मणिकर्णिका घाट पर स्नान करने की परंपरा है। जो लोग काशी नहीं जा पाते हैं, वे अपने-अपने क्षेत्र की पवित्र नदी में स्नान कर सकते हैं। अगर नदी स्नान भी नहीं कर सकते हैं तो घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
  • 5 नवंबर (बुधवार) – कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली और गुरु नानक जयंती: कार्तिक मास पूर्णिमा पवित्र नदियों (गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा आदि) में स्नान करने की परंपरा है। स्नान के बाद नदी किनारे दान करना बहुत शुभ माना जाता है। शाम को मंदिरों और घाटों पर दीपदान करें।
  • 6 नवंबर (गुरुवार) – मार्गशीर्ष मास का प्रारंभ: कार्तिक मास के बाद मार्गशीर्ष (अगहन) मास शुरू होता है। इस मास में भगवान कृष्ण की पूजा और नदी स्नान का महत्व है।
  • 8 नवंबर (शनिवार) – गणेश चतुर्थी व्रत: इस दिन भर भगवान गणेश की पाने की कामना से व्रत रखें और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें।
  • 12 नवंबर (बुधवार) – कालभैरव जयंती (कालाष्टमी): ये दिन भगवान शिव के रूद्र रूप, कालभैरव को समर्पित है। इस दिन कालभैरव की पूजा और व्रत करें।
  • 15 नवंबर (शनिवार) – उत्पन्ना एकादशी: ये एकादशी मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष में आती है और ये एकादशी माता की जयंती का पर्व है। भगवान विष्णु के लिए व्रत रखें और बाल गोपाल का अभिषेक करें।
  • 17 नवंबर (सोमवार) – सोम प्रदोष व्रत और वृश्चिक संक्रांति: इस दिन सूर्य देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। सुबह सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें और शाम को भगवान शिव की पूजा और दान-पुण्य करें।
  • 19 नवंबर (बुधवार) – मार्गशीर्ष अमावस्या (श्राद्ध अमावस्या): इस तिथि पर पितरों के निमित्त धूप-ध्यान करें।
  • 24 नवंबर (सोमवार) – विनायक चतुर्थी: ये व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन व्रत रखकर भगवान गणेश की पूजा करें।
  • 25 नवंबर (मंगलवार) – विवाह पंचमी (श्रीराम विवाहोत्सव): ये दिन भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का उत्सव है। इस दिन मंदिरों और घरों में राम-सीता का विवाह उत्सव मनाया जाता है। राम और सीता का विशेष अभिषेक करें।

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