Bhagwat said – the Sangh was not formed to destroy anyone. | भागवत बोले-संघ किसी को नष्ट करने के लिए नहीं बना: संघ को प्रत्यक्ष अनुभव किए बिना संघ के बारे में राय मत बनाइए – Jaipur News

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत ने कहा है कि संघ किसी को नष्ट करने के लिए नहीं बना है। भारत वर्ष में हमारी पहचान हिन्दू है। हिन्दू शब्द सबको एक करने वाला है। हमारा राष्ट्र संस्कृति के आधार पर एक है न कि राज्य के आधार पर।

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उन्होने कहा कि संघ को प्रत्यक्ष अनुभव किए बिना संघ के बारे में राय मत बनाइए। संघ से जुड़ने के लिए शाखा में आइए, जो आपको अनुकूल लगे वह काम आप कर सकते हैं। संघ पूरे समाज को ही संगठित करना चाहता है। पूरा समाज संघ बन जाए यानी प्रमाणिकता से निस्वार्थ बुद्धि से सब लोग देश के लिए जिएं।

मोहन भागवत गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर ‘100 वर्ष की संघ यात्रा श्रंखला’ के अंतर्गत कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में ‘उद्यमी संवाद नए क्षितिज की ओर’ कार्यक्रम में राजस्थान प्रदेश के प्रमुख उद्यमियों को सम्बोधित कर रहे थे।

संघ प्रमुख ने कहा कि सहकार, कृषि और उद्योग हमारे विकास के आधार स्तंभ हैं।

संघ प्रमुख ने कहा कि सहकार, कृषि और उद्योग हमारे विकास के आधार स्तंभ हैं।

भारत को विश्वगुरू बनाना एक व्यक्ति के वश में नहीं सरसंघचालक ने कहा कि संघ के 100 साल की यात्रा पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम कोई सेलिब्रेशन नहीं है बल्कि आगे के चरण की दृष्टि से अपने कार्य की वृद्धि का विचार करने के लिए ये कार्यक्रम किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र को परम वैभव संपन्न और विश्वगुरु बनाना किसी एक व्यक्ति के वश में नहीं है। नेता, नारा, नीति, पार्टी, सरकार, विचार, महापुरुष, अवतार और संघ जैसे संगठन इसमे सहायक हो सकते हैं। परन्तु मूल कारण नहीं बन सकते। यह सबका काम है और इसके लिए सबको साथ लेकर चलना है।

मंदिर,पानी,शमशान सबके लिए खुले होने चाहिए उन्होने संघ कार्य के आगामी चरण के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि सारा समाज देश हित में जिए, ये संघ का आगे का काम है। समाज की सृजन शक्ति जागृत हो, सामाजिक समरसता का वातावरण बने और मंदिर, पानी, शमशान सबके लिए खुले होने चाहिए।

परिवार के सभी सदस्य सप्ताह में कम से कम एक बार एकत्र हो, अपना भोजन, भजन अपनी भाषा और अपनी परंपरा के अनुसार करें। पानी बचाने, पेड़ लगाने और प्लास्टिक हटाने जैसे पर्यावरण संरक्षण के कार्यों के लिए भी हमें आगे आना चाहिए।

स्व का बोध और स्वदेशी का भाव सबके मन में जागृत हो, देश स्वनिर्भर बने। नागरिक कर्तव्य और नागरिक अनुशासन के प्रति हम सजग बनें और नियम, कानून, संविधान का पालन करें। उन्होंने कहा कि सारा समाज देश हित में जिए। सारा समाज एक बनकर अपना अपना काम अपनी अपनी पद्धति से करे ताकि हम सभी एक दूसरे के बाधक नहीं बल्कि पूरक बनें।

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