Fake Domicile Certificate Racket Busted in Haldwani | उत्तराखंड में 4 दिन में तैयार हुआ फर्जी स्थायी निवास: बरेली के युवक को हल्द्वानी का बनाया; रिश्तेदार ने खोली CSC संचालक की पोल – Nainital News

Actionpunjab
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फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र।

उत्तराखंड में एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालक ने उत्तरप्रदेश के रईस अहमद को हल्द्वानी का दिखाकर 4 दिनों में फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र बना दिया।

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मामला तब सामने आया जब 13 नवंबर की शाम एक व्यक्ति की शिकायत पर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने इस फर्जी CSC सेंटर पर छापा मारा। शिकायतकर्ता का आरोप था की उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर किसी दूसरे व्यक्ति का स्थायी निवास बना दिया गया है।

लेकिन आखिर शिकायतकर्ता को पता कैसे लगा की उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल हो रहा है, ये जानने के लिए दैनिक भास्कर एप ने पड़ताल की। जिसमें सामने आया कि इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा CSC संचालक के रिश्तेदार ने किया था। वही शिकायतकर्ता को सीधे दीपक रावत के पास लेकर गया।

काली टोपी में नजर आ रहे आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

काली टोपी में नजर आ रहे आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़ें कैसे खुली पूरी पोल

25 साल से हल्द्वानी में रहता है फैजान हल्द्वानी में स्थित CSC सेंटर का संचालक फैजान पिछले 25 सालों से हल्द्वानी में रह रहा है। वह तहसील में अर्जीनवीस(अर्जी लगाने या लिखने वाला) के पद पर भी काम कर रहा था।

वहीं, फैजान का एक रिश्तेदार भी पिछले कई सालों से यहीं पर रह रहा है। दैनिक भास्कर की टीम ने इसी व्यक्ति से बात की जिसमें उसने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि कैसे उसने इस फर्जीवाड़े को उजागर किया।

RTI लगाई, व्यक्ति तक पहुंचा व्यक्ति ने बताया कि उसे किसी सूत्र से पता लगा कि फैजान फर्जी स्थायी निवास बनवा रहा है। उसने फैजान से भी बात की लेकिन उसने इस बातों पर विश्वास ना करने को कहा। जिसके बाद उसे पता लगा की कुछ समय पहले ही हल्द्वानी में आए एक बरेली के व्यक्ति का स्थायी निवास बन गया है, तो उसने आरटीआई लगाकर ये पता लगाया कि आखिर किन दस्तावेजों के आधार पर फैजान ने उसका स्थायी निवास बनाया है।

किसी और व्यक्ति के दस्तावेज लगाए आरटीआई में पता लगा कि फैजान ने बरेली के रहने वाले रईस अहमद का स्थायी निवास बनाने के लिए हल्द्वानी में पिछले 20 सालों से रह रहे दूसरे रईस अहमद के दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था।

हल्द्वानी के रईस का स्थायी निवास प्रमाण पत्र भी फैजान ने ही बनाया था इसलिए उसके पास उसके सारे दस्तावेज थे। बरेली के रईस अहमद के पिता जिंदा थे लेकिन हल्द्वानी वाले के पिता की मौत हो चुकी थी इसलिए फैजान ने बरेली वाले रईस के पिता को भी मृत दिखा दिया और स्थायी निवास के लिए आवेदन कर दिया।

बरेली के निवासी रईस अहमद की फाइल फोटो।

बरेली के निवासी रईस अहमद की फाइल फोटो।

ओटीपी किसी और व्यक्ति के मोबाइल से भेजा आवेदन सबमिट करने से पहले एक ओटीपी भी आता है, जो फैजान के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। उसने पूरी प्लानिंग के तहत चाल चली, 26 जुलाई को फैजान की दुकान पर एक व्यक्ति अपना स्थायी निवास बनाने के लिए आया, तो फैजान उससे नंबर लेता है और उसके मोबाइल नंबर से दो लोगों का आवेदन कर देता है, एक उस व्यक्ति का जो स्थायी निवास बनाने आया था और दूसरा बरेली के रईस का, और कुछ इस तरह वह आवेदन पूरी तरह सबमिट कर देता है। 29 जुलाई को यानि सिर्फ चार दिनों में ये फर्जी स्थायी निवासी बनकर भी आ जाता है।

कमिश्नर दीपक रावत का छापा

फैजान के रिश्तेदार को जब इस पूरे फर्जीवाड़े के बारे में पता लगा तो वही हल्द्वानी निवासी रईस से मिला और उसे बताया कि उसके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल हुआ है, जिसके बाद दोनों योजनाबद्ध तरीके से कमिश्नर रावत की जनसुनवाई में पहुंचे और पूरे मामले की शिकायत दी। जिसके बाद रावत ने गोपनीय जांच कराई। फैजान का नाम कन्फर्म होने पर 13 नवंबर की शाम बनभूलपुरा के CSC सेंटर पर छापा मारा गया।

छापे में सेंटर से कई लोगों के निजी दस्तावेज मिले जो सेंटर पर नहीं होने चाहिए थे। जिसके बाद पुलिस ने तहसीलदार की शिकायत पर मामला दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि पिछले कुछ महीनों में उसने कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं।

सीएससी सेंटर में पहुंच दस्तावेजों की जांच करते कमिश्नर दीपक।

सीएससी सेंटर में पहुंच दस्तावेजों की जांच करते कमिश्नर दीपक।

सरकार सख्त, 5 साल के प्रमाणपत्रों की जांच

वहीं इस मामल के सामने आने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी सख्त एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री ने गृह सचिव को निर्देश दिए हैं कि जनसेवा केंद्रों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो। इसके साथ ही DM नैनीताल ललित मोहन रयाल ने हल्द्वानी SDM को आदेश दिया है कि पिछले 5 सालों में बने सभी स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जांच की जाए।

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