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जोधपुर में पूर्व सीएम अशोक गहलोत पर पूर्व जिलाध्यक्ष सईद अंसारी ने मुस्लिमों का वोट बैंक के तौर पर दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। बाड़मेर में सेड़वा एसडीएम बद्रीनारायण विश्नोई ने ऊंट पर गांव-गांव जाकर एसआईआर को लेकर लोगों को जागरूक किया। सीकर के पचार गांव के लोगों ने खराब क्वालिटी की सड़क बनाने को लेकर आरटीआई लगाई है। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में…
1. ‘गहलोत ने मुस्लिम समाज का दुरुपयोग किया…’
यह इल्जाम एक दोस्त ने लगाया। जिलाध्यक्ष की लिस्ट निकलने के बाद से वे आहत थे। कांग्रेस की लिस्ट में अल्पसंख्यक नहीं।
उनका नाम सईद अंसारी है। पार्टी में सीनियर नेता। जोधपुर के जिलाध्यक्ष रहे हैं। गहलोत साहब से पुरानी यारी है।
दूसरी पार्टी से तो वे उम्मीद नहीं करते, लेकिन अपनी ही पार्टी समाज को दरकिनार करने लगे तो मन की बातें सतह पर आ ही जाती हैं।
अंसारी साहब ने लंबी-चौड़ी पोस्ट में लिखा- मुझे 3 बार टिकट मिला, लेकिन उन्होंने मदद नहीं की। उनके करीबी मेरा विरोध करते रहे। मैंने पूरा जीवन कांग्रेस में दिया। किसी ने मुस्लिम को सत्ता में भागीदारी नहीं दी। मैं 50 साल से समर्पित हूं।
इस पर गहलोत के रिएक्शन का तो पता नहीं, लेकिन दोनों के कॉमन फ्रेंड और कांग्रेस नेता सुपारस भंडारी ने अंसारी जी को जवाब दिया। लिखा- आप अक्सर कहते थे कि मेरी पहचान बनाने का श्रेय गहलोत को है।
खैर, राजनीति में दोस्ती-दुश्मनी की कोई उम्र नहीं होती। राजनीति में भी वही दिक्कतें आती हैं जिनका जिक्र 45 साल पहले आनंद बख्शी साहब ने इस तरह किया था- शीशा हो या दिल हो आखिर टूट जाता है।
यह कहानी सिर्फ जोधपुर की नहीं। बाड़मेर के गफूर अहमद को भी जिलाध्यक्ष बनने की उम्मीद थी। कार्यकारी जिलाध्यक्ष रहे भी। लेकिन ऐलान हुआ लक्ष्मण गोदारा के नाम का।

जोधपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष सईद अंसारी ने अपने दोस्त और पूर्व सीएम अशोक गहलोत पर सवाल उठाया। कहा कि उन्होंने मुस्लिम समाज का दुरुपयोग किया।
2. ऊंट पर SDM साहब
एक ऐसा सरकारी काम चल रहा है जो विशेष और गहन है। इस काम में BLO नामक प्राणियों को लगाया गया है। खबरें हैं कि देशभर में बेचारे BLO काम से तंग आ रहे हैं, परेशान हो रहे हैं।
लेकिन बाड़मेर जैसे रेगिस्तानी जिले में ये परेशानियां और बढ़ जाती हैं। रेगिस्तान मीलों तक फैला है। गांव-ढाणियां दूर-दूर। जाने का कोई साधन नहीं। पच्चीस-पचास लोगों की बस्ती तक पहुंचना ही मुश्किल।
बाड़मेर जिले के सेड़वा SDM बद्रीनारायण विश्नोई ने यह परेशानी समझी और खुद भी मतदाताओं को जागरूक करने निकले पड़े। रेगिस्तान में उनकी सवारी बना ऊंट।
ऊंट पर बैठकर अब साहब गांव-गांव पहुंच रहे हैं। लोगों से कह रहे हैं कि SIR के काम में बीएलओ की मदद करें। रंगीन लेटेस्ट फोटो खिंचाकर रखें। सही जानकारी दें। फॉर्म फटाफट भरकर जमा कराएं।
साहब के इस तरह के काम से बीएलओ भी हिम्मत दिखा रहे हैं। उनका मनोबल बढ़ा है। वे भी ऊंटों पर बैठकर ढाणियों में पहुंच रहे हैं।

बाड़मेर के सेड़वा एसडीएम बद्रीनारायण विश्नोई ऊंट पर बैठकर गांवों-ढाणियों में पहुंच रहे हैं और लोगों को SIR के काम में सहयोग की अपील कर रहे हैं।
3. सीकर में टूटी सड़क पर RTI
सरकारी अधिकारियों को वो नागरिक बिल्कुल पसंद नहीं जो अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हों और बहुत सवाल पूछते हों।
सीकर में पीडब्लूडी विभाग की AEN मेघा के व्यवहार से ऐसा ही दिखा। वीडियो पुराना है लेकिन ताजा-ताजा वायरल हो रहा है।
सीकर में पचार से खाचरियावास तर रोड बन रही थी। काम खराब क्वालिटी का किया जा रहा था। पहली लेयर ही उखड़ रही थी।
ऐसे में जागरूक गांव वाले मौके पर पहुंच गए। मौके पर मैडम भी मौजूद थीं। लोगों ने शिकायत की कि क्वालिटी खराब है।
मैडम पल्ला झालने लगीं। कभी चेक कराने की बात कही कभी पीछा छुड़ाकर भागने लगीं। इसी क्वालिटी की सड़क आधी से ज्यादा बन चुकी है।
अब पचार गांव के लोगों ने सड़क निर्माण को लेकर RTI (राइट टू इन्फॉर्मेशन) एप्लीकेशन लगा दी है। अब अधिकारी कहां भागेंगे? जवाब तो देना पड़ेगा।

सीकर में खराब सड़क को लेकर पीडब्लूडी विभाग की एईएन मेघा से सवाल किया तो पीछा छुड़ाने लगीं।
4. चलते-चलते…
शादी में ‘दिखावा’ न हो तो हर जलवा फीका। भारत से अमेरिका जाकर उद्योगपति बने एक पिता ने अपनी बेटी की शादी भारत आकर की।
पूरे भारत को दिखाया कि मैंने अमेरिका में कितना पैसा कमाया। यही पैसा शादी में जिस तरह से बहाया, वह चर्चा का विषय बन गया। चर्चा तो यह भी है कि
एक मशहूर महिला गायिका को उन्होंने गीत गाने के लिए 60 करोड़ रुपए दिए। गांवों में शादी में गीत गाने वाली महिलाएं गुड़ और बताशे में खुश हो जाती हैं।
शादी को लग्जरी बनाने का हर उपाय किया गया। फिल्मी परदे पर नजर आने वाले सितारे पैरों में गिर-गिर कर नाच रहे थे। पैसे की यही माया है।
अविवाहित लोग ऐसी ही शादी का सपना देखते हैं। किसी जमाने में लालटेन की रोशनी में शादी होती थी और सात जनम तक जोड़ा बना रहता था।
खैर, हर कोई अपने हिसाब से शादी को लग्जरी बनाने की कोशिश करता है। कोटपूतली के इंजीनियर दूल्हे ने चौमूं की डॉक्टर दुल्हन से शादी की।
दुल्हनिया को चौमूं से हेलिकॉप्टर में विदा किया गया। ढाणी में हेलिकॉप्टर उतरा तो दूर छतों से देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। गांव के हिसाब से शादी शाही रही।
बाकी उदयपुर वाली शादी के नजरिए से देखें तो हेलिकॉप्टर से ज्यादा अपना ‘बाबू’ कमा लाया होगा।

कोटपूतली के इंजीनियर ने चौमूं की डॉक्टर से शादी की। चौमूं से दोनों को हेलिकॉप्टर में विदा किया गया।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…