Jalandhar Police Trap Lohian Gang Rape Suspects by Posing as Doctors in a Unique Medical Camp | जालंधर पुलिस ने मेडिकल कैंप लगाकर पकड़े रेप के आरोपी: पुलिस बनी डॉक्टर-कंपाउंडर, चेकअप करते फोटो खींची, रेप विक्टिम से पहचान होते ही दबोचे – Jalandhar News

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आरोपियों को पकड़ने के लिए डॉक्टर की ड्रेस में पुलिस द्वारा लगाया गया मेडिकल कैंप।

जालंधर पुलिस ने लोहियां में मां-बेटी से हुए रेप के आरोपियों को पकड़ लिया है। पुलिस ने आरोपियों को पहली बार अनोखे ढंग के साथ पकड़ा है। इसके लिए गांव में मेडिकल कैंप लगाया गया। इसमें पुलिस वाले ही डॉक्टर और कंपाउंडर बने। जैसे-जैसे लोग चेकअप के लिए आने

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बता दें कि लोहियां ब्लॉक के एक गांव में सोमवार 24 नवंबर को मां-बेटी के साथ गैंगरेप हुआ था। 36 साल की विधवा और उसकी 19 साल की शादीशुदा बेटी ने लोहियां पुलिस को 4 युवकों के खिलाफ शिकायत दी थी। SSP हरविंदर सिंह विर्क टीम सहित मौके पर पहुंचे। महिला पुलिस ने पीड़िताओं से जानकारी जुटाई और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी।

पुलिस को मिला सीसीटीवी फुटेज जिसके आधार पर आरोपियों को पकड़ा गया।

पुलिस को मिला सीसीटीवी फुटेज जिसके आधार पर आरोपियों को पकड़ा गया।

कैसे बिछाया जाल, SSP ने 5 पॉइंट में बताया

  • 50 से अधिक कर्मचारियों की टीम लगाई ः SSP विर्क ने बताया कि सभी आरोपियों को ट्रेस करने के लिए SP सरबजीत राय के नेतृत्व में टीम बनाई गई। DSP इंदरजीत सिंह, ओंकार सिंह बराड़, सुखपाल सिंह, CIA स्टाफ इंचार्ज पुष्पबाली व 50 से अधिक कर्मचारियों की टीम मैदान में उतारी। क्राइम सीन से लेकर 20 किलोमीटर के दायरे में 350 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले गए।
  • पहले एक साथ रेड का प्लान बना फिर बदला ः CCTV फुटेज खंगाले तो पता चला कि आरोपी बाइक से आए थे। पुलिस ने पहले 20 किलोमीटर के दायरे में सर्च की। इसके बाद इसे 5 किलोमीटर के दायरे में लेकर आई। जहां से पुलिस को आरोपियों के बारे में पहली लीड मिली। पता चला कि आरोपी लोहियां के वार्ड नंबर-1 की कॉलोनी में रहते हैं। यहां समस्या ये पैदा हो गई कि अगर घरों में एक साथ सर्च करते हैं तो आरोपी भाग सकते हैं। दूसरा पुलिस को उनके चेहरों की पहचान भी नहीं है।
  • कैंप लगाने के लिए वेट मशीन, दवाइयां और टॉर्च खरीदी ः लीड मिलने के बाद पुलिस के पास आरोपियों की पहचान करने का चैलेंज था। SSP विर्क ने बताया कि इस दौरान उनके दिमाग में आइडिया आया कि पहचान करने का तरीका ढूंढते हैं। सबके साथ डिस्कस के बाद तय हुआ कि मेडिकल कैंप लगाया जाए और एक-एक कर सबका फोटो ले लिया जाए। इसके बाद कुछ पुलिस कर्मचारियों को डॉक्टर, कुछ को कंपाउंडर बनाया गया। पुलिस टीम डॉक्टरों की लुक में गांव में पहुंची। बीपी मशीन, वजन मशीन, विटामिन की गोलियां, आंखों की जांच के लिए टॉर्च खरीदी गई। गांव में पहुंचकर कैंप लगाने की सूचना दी गई।
  • कैंप के 3 घंटे बाद पहला संदिग्ध मिला ः कैंप लगने के बाद पहले कुछ घंटों में 100 से ज्यादा लोग आए। इनको जांच पर शक नहीं होने दिया गया। दवाइयां विटामिन की थीं तो सबको दे दी गईं। इतने लोगों में कोई भी ऐसा नहीं था जो संदिग्ध हो। कैंप में ज्यादा से ज्यादा लोग आएं, इसके लिए फल भी बांटे गए। गांव के कुछ बच्चों की ड्यूटी लगाई कि सबके घर पर कैंप में आने के लिए कहकर आओ। 3 घंटे बाद एक युवक आया। उसने बताया कि उसे सांस से संबंधित दिक्कत है। ये युवक पुलिस टीम को संदिग्ध लगा। इसकी बहाने से फोटो ली गई। उसने पर्ची पर अपना नाम साजन लिखवाया और मोबाइल नंबर भी दिया।
  • फोटो मिलते ही मां-बेटी से पहचान करवाई और पकड़ लिया ः युवक को कहा गया कि उसकी सांस की समस्या गंभीर है। इसलिए बड़े डॉक्टर को दिखाना होगा। वह उनके साथ जाने के लिए और फोटो खिंचवाने के लिए भी नहीं मान रहा था, लेकिन किसी तरह मनाया गया। वहां मौजूद टीम ने आरोपी की फोटो को मां-बेटी को व्हाट्सएप से भेजी। उन्होंने पहचानते ही कहा कि रेप करने वाला यही है। युवक को जाने दिया गया, लेकिन टीम उसके पीछे लग गई। इसके बाद कैंप में रॉकी और अर्श नामक युवक भी आए। उन्होंने थकान की समस्या बताई। इनको विटामिन की गोली दी गई और भेज दिया। इनकी फोटो भी भी मां-बेटी को भेजी गई तो उन्होंने पहचान की पुष्टि की। पुलिस पहचान होने पर तीनों को ट्रैक करने लगी। बाद दोपहर जैसे ही तीनों रेलवे लाइनों के पास एकत्रित हुए तो टीम ने इनको काबू कर लिया। लोहियां थाने में पूछताछ में आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। चौथा आरोपी राजन अभी फरार है।
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