साइबर जालसाजों ने फरीदाबाद निवासी एक युवक को विदेश मे 80 हजार रुपये मासिक वेतन पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर पहले बैंकॉक बुलाया | फिर वहां से किडनैप कर म्यांमार ले जाकर वहां पर ठगों ने युवक को कमरे में बंद करके भूखा रखा और तरह-तरह की यातनाएं दी। फिर
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थाइलैंड की कंपनी में अकाउंटेंट की नौकरी का लालच दिया
सेक्टर-78 के रहने वाले युवक ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनको नौकरी की बहुत जरूरत थी। उन्होंने अलग-अलग वेबसाइट पर अपना बायोडाटा डाला हुआ था। उनके पास जुलाई में वाट्सएप नंबर से काल आया। काल करने वाले ने युवक के बारे में सारी जानकारी पूछी। फिर इसके बाद थाइलैंड की कंपनी में अकाउंटेंट की नौकरी लगवाने की बात कही। इसके साथ ही 80 हजार वेतन का भी आफर दिया। नौ अगस्त को ठगों ने राहुल को दिल्ली से बैंकाक की टिकट भेजी। शिकायतकर्ता ने ठगों के झांसे में आकर बैंकाक चला गया। बैंकाक जाने के बाद उसने ठगों को फोन किया।

प्रतीकात्मक फोटो
किडनैप करके म्यांमार ले गए
ठगों ने उसे एयरपोर्ट के गेट नंबर चार पर जाने को कहा। जब राहुल गेट नंबर चार पर गया तो वहां से कुछ युवक उसको किडनैप करके पिस्तौल के बल पर म्यांमार ले गए। वहां पर पीड़ित को एक चाइनीज कंपनी को बेच दिया गया। चाइनीज कंपनी ने म्यांमार बार्डर पर अपना कैंप बनाया हुआ था। जहां पर युवकों को बंधक बनाकर साइबर ठगी करवाई जाती थी। राहुल को भी एक कमरे में बंद करके उससे 15 दिन साइबर ठगी करवाई गई। फिर युवक को डेटिंग एप से अमेरिकी लोगों के नंबर और उनकी जानकारी निकालने के काम पर लगाया गया।
आर्मी की छापामारी के बाद भाग गए आरोपी
अक्टूबर में जिस कैंप में युवक को रखा गया था। उस पर म्यांमार आर्मी की छापामारी पड़ गई। जिसके बाद साइबर ठगी करने वाले आरोपी वहां से भाग गए। इसके बाद राहुल और उसके साथी करीब 20 दिन तक आर्मी के कैंप में रहे। फिर पीड़ित को थाइलैंड लेकर आया गया। जहां से भारत सरकार रेस्क्यू करके पीड़ित को वापस लाई। राहुल ने कहा कि उनको धोखाधड़ी से बैंकाक भेजा गया था। पुलिस प्रवक्ता यशपाल के अनुसार मामला दर्ज कर लिया गया है। जिस नंबर से वाट्सएप काल किया गया था। उसके बारे में जांच की जा रही है।