नई दिल्ली5 मिनट पहले
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केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि जनगणना 2027 की प्रक्रिया दो स्टेज में होगी, जिसकी शुरुआत 2026 में घरों की लिस्टिंग और घरों का डेटा इकट्ठा करने से होगी।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के एक सवाल के लिखित जवाब में विवरण देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि पहले चरण में आवास गणना और दूसरे चरण में आबादी की गणना की जाएगी।
पहला फेज अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच 30 दिन में पूरा होगा। इसके लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश टाइमलाइन तय करेंगे। दूसरा फेज जिसमें आबादी की गिनती होगी, वह फरवरी 2027 में होगा।
जनगणना 2027 की टाइमलाइन पिछली जनगणनाओं में अपनाए गए तरीकों की तरह ही रखी गई है। मंत्रालय के मुताबिक 1 मार्च 2027 को रात 12 बजे पूरे देश में गिनती के लिए रेफरेंस डेट होगी।
हालांकि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों के लिए, आबादी की गिनती सितंबर 2026 में की जाएगी। 1 अक्टूबर 2026 को रेफरेंस डेट माना जाएगा।
जनगणना 2027 पर नित्यानंद राय के जवाब की बड़ी बातें…
- सरकार पहले के जनगणना राउंड से सीखे गए सबक और बेस्ट प्रैक्टिस को शामिल करेगी, जिसमें कुछ राज्यों में किए गए जाति-आधारित सर्वे भी शामिल हैं। प्रोसेस में पहले से ही पिछली एक्सरसाइज से मिली सीख और स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन को शामिल किया गया है।
- जनगणना के दौरान पूछे जाने वाले सवाल संबंधित मंत्रालयों, यूजर ऑर्गनाइजेशन और सब्जेक्ट एक्सपर्ट के साथ चर्चा के बाद ही फाइनल किए जाते हैं।
- ऑफिशियल गजट में नोटिफाई किए जाने से पहले ड्राफ्ट क्वेश्चनेयर प्रैक्टिकल हैं या नहीं, यह देखने के लिए फील्ड टेस्टिंग होती है।
- जनगणना 2027 के लिए देश भर में प्री-टेस्ट 30 नवंबर को खत्म हुआ और फाइनल क्वेश्चनेयर जल्द ही नोटिफाई होने की उम्मीद है। रजिस्ट्रार जनरल और सेंसस कमिश्नर का ऑफिस क्वेश्चनेयर को फाइनल करने के प्रोसेस में है।
- हाउसलिस्टिंग फेज का पायलट 10 से 30 नवंबर 2025 के बीच किया गया। इस दौरान डिजिटल डेटा कलेक्शन मॉडल को भी टेस्ट किया गया। जवाब देने वालों को 1 से 7 नवंबर 2025 के बीच खुद गिनती करने की परमिशन दी गई।
- जनगणना 2027 में जाति की गिनती कैबिनेट कमेटी ऑन पॉलिटिकल अफेयर्स के 30 अप्रैल, 2025 के फैसले के मुताबिक की जाएगी। जवाब देने वाले को अपनी जानकारी या विश्वास के हिसाब से सवालों के जवाब देने होते हैं।
जनगणना का ज्यादातर काम पेपरलेस होगा
मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी। कागज पर लिखी जानकारी पढ़ने के लिए एआई आधारित इंटेलीजेंट कैरेक्टर रिकगनीशन टूल्स होंगे। जीपीएस टैगिंग और प्री-कोडेड ड्रॉपडाउन मैन्यू की व्यवस्था में गलती की गुंजाइश नहीं रहेगी। आम लोगों की मदद के लिए राष्ट्रव्यापी प्रचार होगा।