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आरपीएस जितेन्द्र आंचलिया की मुश्किलें फिर से बढ़ती नजर आ रही है। एनआरआई को उसी का प्लॉट 1.83 करोड़ में खरीदने के लिए मजबूर करने में दो साल से एसीबी केस में फंसे आंचलिया को जांच एजेंसी और हाईकोर्ट ने 9 माह पहले क्लीनचिट दे दी थी। अब पीड़ित ने फिर से
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एनआरआई नीरज पूर्बिया ने आरपीएस आंचलिया, सुखेर थाने के पूर्व एसआई रोशनलाल, दलाल मनोज श्रीमाली, पूर्व पार्षद रमेश राठौड़ के खिलाफ उसी का प्लॉट 1.83 करोड़ में खरीदने के लिए मजबूर करने और रिश्वत मांगने के आरोप लगाते हुए साल 2022 में केस दर्ज कराया था।
इस मामले में इसी साल मार्च में जांच एजेंसी ने आंचलिया, मनोज और रमेश पर आरोप प्रमाणित नहीं पाए। सिर्फ एसआई रोशनलाल को आरोपी माना। हाईकोर्ट ने भी आंचलिया समेत तीनों को क्लीनचिट दे दी थी। स्पष्ट भी किया कि परिवादी निचली अदालत में अपील कर सकता है, जो सबूतों के आधार पर फैसला करेगी।
एनआरआई ने निचली कोर्ट की शरण ली है ऐसे में एनआरआई ने फिर निचली कोर्ट की शरण ली है। इसमें आरोप लगाया कि पहले जांच के दौरान आंचलिया ने 1.83 करोड़ का एग्रीमेंट पेश किया था। इस पर लवलीना और उनके हस्ताक्षर थे। इसी दस्तावेज के आधार पर आंचलिया के सहयोगी एएसपी कैलाश सिंह सांदू ने वापस जांच की और गवाहों से झूठे बयान लिए। महत्वपूर्ण सबूत हटा दिए। कोर्ट को विश्वास दिलाया कि एग्रीमेंट उन्होंने साइन किया था। ऐसे में कोर्ट ने आरोपियों को डिस्चार्ज आदेश जारी कर दिया था।