कोलकाता4 मिनट पहले
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विधायक हुमायूं कबीर ने गुरुवार को कहा कि वे अब भी अपनी बातों पर कायम हैं।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद स्थित बेलडांगा में बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान करने वाले विधायक हुमायूं कबीर को तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने गुरुवार को पार्टी से निलंबित कर दिया। कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने इसकी जानकारी दी। मेयर ने कहा कि पार्टी सांप्रदायिक राजनीति में विश्वास नहीं करती।
TMC से निकाले जाने के बाद हुमायूं ने कहा, ‘मैं अपने बयान पर कायम हूं। मैं 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी की घोषणा करूंगा। विधानसभा चुनाव में 135 सीटों पर उम्मीदवार उतारूंगा। मैं उन दोनों (TMC और भाजपा) के खिलाफ चुनाव लड़ूंगा।
मुर्शिदाबाद जिले में 28 नवंबर को कई जगहों पर बाबरी मस्जिद के शिलान्यास के पोस्टर लगाए गए थे। इन पर लिखा था कि 6 दिसंबर को बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास समारोह होगा। पोस्टर पर हुमायूं कबीर को आयोजनकर्ता बताया गया था। इसके बाद विवाद बढ़ गया था।

25 नवंबर को TMC विधायक हुमायूं कबीर ने कहा कि हम 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे। 3 साल में इसका निर्माण पूरा होगा। कार्यक्रम में कई मुस्लिम नेता शामिल होंगे।
हुमायूं ने कहा- बाबरी मस्जिद का शिलान्यास तो करूंगा
TMC से निकाले जाने के बाद हुमायूं कबीर ने कहा, ‘मैं 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करूंगा। यह मेरा निजी मामला है। किसी पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने मुझे पहले भी 2015 में छह साल के लिए निलंबित किया था। अब फिर, इस पर मुझे कुछ नहीं कहना। वे जो करना चाहें, करें।’
कोलकाता मेयर ने कहा- हुमायूं को पहले भी चेतावनी थी
कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम ने कहा कि हमने देखा कि मुर्शिदाबाद से हमारे एक विधायक ने अचानक बाबरी मस्जिद बनवाने का ऐलान कर दिया। अचानक बाबरी मस्जिद क्यों? हमने उन्हें पहले भी चेतावनी दी थी। उनका यह बयान पार्टी लाइन से अलग है।
कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर
विधायक हुमायूं कबीर की ओर से बाबरी मस्जिद निर्माण के प्रस्ताव के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में गुरुवार को एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें कहा गया कि हुमायूं कबीर का प्रस्ताव संविधान का उल्लंघन करता है।हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर सकती है।

बाबरी विध्वंस की टाइमलाइन (1992-2025), 6 पॉइंट्स
1992- 6 दिसंबर को अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी विवादित ढांचे को कार सेवकों ने ध्वस्त कर दिया था।
2003- आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की रिपोर्ट में बाबरी ढांचे वाली जगह पर मंदिरनुमा संरचना मिलने का दावा किया गया। मुस्लिम पक्ष ने इसे चुनौती दी।
2010- 30 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला आया, जिसमें विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया गया। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
2019- 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 2.77 एकड़ की विवादित जमीन रामलला की जन्मभूमि है। मुस्लिम पक्ष को बाबरी ढांचे के लिए 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया।
2020- 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया।
2024- 22 जनवरी को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। रामलला के गर्भगृह के दर्शन औपचारिक रूप से शुरू हुए।
6 साल बाद भी प्रस्तावित मस्जिद का निर्माण शुरू नहीं हुआ

राम मंदिर से 25 किमी दूर धन्नीपुर मस्जिद के पास बाबरी के लिए 5 एकड़ भूमि आवंटित की गई है।
2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर से करीब 25 किमी दूर, अयोध्या में सोहावल तहसील के धन्नीपुर गांव में मुस्लिम पक्ष को 5-एकड़ की वैकल्पिक जमीन आवंटित की गई थी। हालांकि, अब तक इसका निर्माण शुरू नहीं हुआ है।
इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) के अनुसार, प्रस्तावित जमीन पर मस्जिद और सामुदायिक सुविधाओं का निर्माण प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि, अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) की तरफ से मस्जिद के लेआउट प्लान को मंजूरी नहीं मिली है। यानी सरकारी विभागों ने NOC नहीं दी है।
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