लखनऊ4 मिनट पहले
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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने अपनी स्थापना के 175 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लखनऊ में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। शुक्रवार को आयोजित इस संगोष्ठी का विषय ‘जलवायु परिवर्तन के प्रति हिममंडल की प्रतिक्रिया — हिमालयी एवं ध्रुवीय परिप्रेक्ष्य में’था।
कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यालय परिसर में नवनिर्मित रॉक गार्डन और स्ट्रेटिग्राफिक कॉलम के उद्घाटन से हुआ। अपर महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष राजिंदर कुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों और संगोष्ठी संयोजक संजीव कुमार (उप महानिदेशक) के साथ इसका विधिवत उद्घाटन किया। इस उद्यान का उद्देश्य विद्यार्थियों और आमजन में भूविज्ञान की समझ को बढ़ाना है।
जीएसआई रिकार्ड्स : खंड-158, भाग-8’ का विमोचन
इसके बाद हिमनद विज्ञान और संबंधित प्रभागों से जुड़ी एक विशेष प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया। इस प्रदर्शनी में जीएसआई अपनी तकनीक, उपकरण और अनुसंधान गतिविधियों को आम जनता तक पहुंचा रहा है। इस अवसर पर तीन महत्वपूर्ण प्रकाशनों — ‘हिमालय की ग्लेशियर तालिका’, ‘केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का भूविज्ञान व खनिज संसाधन’ और ‘जीएसआई रिकार्ड्स : खंड-158, भाग-8’ का विमोचन भी किया गया।
रिटायर उप महानिदेशक दीपक श्रीवास्तव ने मुख्य भाषण प्रस्तुत किया। निदेशक अजय कुमार और प्रदीप कुमार ने हिमालय और ध्रुवीय क्रायोस्फियर अध्ययन में जीएसआई के कार्यों की विस्तृत जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने 24 शोध-पत्र प्रस्तुत किए
संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में देशभर के विशेषज्ञों ने 24 शोध-पत्र प्रस्तुत किए और पोस्टर प्रेजेंटेशन आयोजित किए। वक्ताओं ने बताया कि हिमालय और आर्कटिक-अंटार्कटिक क्षेत्र पृथ्वी के सबसे संवेदनशील हिमानी क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में हिमनदों का तीव्र पिघलाव, संहति-संतुलन में कमी और GLOF (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) जैसी घटनाएँ जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेत हैं।
संगोष्ठी में चार प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा हुई, जिनमें हिमनद निगरानी तकनीक, भू-दृश्य विकास और जलवायु प्रभाव अध्ययन; रिमोट सेंसिंग और जीआईएस आधारित विश्लेषण; जल उपलब्धता एवं हिमानी अभियंत्रण समाधान; तथा भूस्खलन और हिमनद झील विस्फोट के जोखिम-नियंत्रण उपाय शामिल थे।उद्यान के उद्घाटन में उप महानिदेशक एवं उत्तर प्रदेश राज्य इकाई के प्रमुख वी.पी गौड़ ने भी भाग लिया। अंत में, आयोजक सचिव एवं निदेशक अजय कुमार ने धन्यवाद प्रस्ताव व्यक्त किया।


