Sanjay Mishra said – forget what people will say, listen to yourself. | संजय मिश्रा बोले- लोग क्या कहेंगे छोड़ो, खुद की सुनो: जिंदगी सिर्फ मरने के इंतजार में नहीं, सेकंड चांस के लिए जीनी चाहिए

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57 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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एक्ट्रेस महिमा चौधरी और संजय मिश्रा की फिल्म ‘दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी’ जल्द ही सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह एक रोमांटिक कॉमेडी है। जिसमें एक बेटा अपने विधुर पिता दुर्लभ प्रसाद के लिए दूसरी दुल्हन ढूंढता है। यह फिल्म परिवार के दबाव, प्यार, हंसी और पारिवारिक रिश्तों पर केंद्रित है।

हाल ही में दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान संजय मिश्रा ने फिल्म के पोस्टर पर लोगों की प्रतिक्रियाओं, महिमा चौधरी से शादी की अफवाहों की सच्चाई, और सेकंड चांस यानी जिंदगी में नए अवसरों को अपनाने की सोच पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने उम्र बढ़ने के बावजूद जीवन में उम्मीद और जिंदादिली बनाए रखने का संदेश दिया, साथ ही “लोग क्या कहेंगे” की चिंता छोड़ खुद की सुनने की प्रेरणा दी। पेश है बातचीत के कुछ और प्रमुख अंश..

महिमा चौधरी और संजय मिश्रा की फिल्म ‘दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी’ 19 दिसंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

महिमा चौधरी और संजय मिश्रा की फिल्म ‘दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी’ 19 दिसंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

सवाल: जब फिल्म ‘दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी’ का पोस्टर आया तो लोगों को लगा कि आपने सच में महिमा चौधरी से शादी कर ली। उस पोस्टर का इतना असर देखकर आप क्या कहेंगे?

जवाब: लोगों का इतना प्यार देखकर अच्छा लगता है। लोगों ने मुझ पर मजाक भी किया, जैसे ये सच में हुआ हो। मेरे बहुत लोग ने प्रतिक्रिया दी। मेरे चाचा जी ने मेरी मम्मी को फोन करके कहा कि भाभी अब यही देखना बाकी रह गया था। महिमा चौधरी अच्छी लड़की हैं, लेकिन बच्चे छोड़कर जाना मुश्किल होता है। हमारे प्रोड्यूसर्स ने इस तरह की शादी वाला माहौल बनाने के लिए यह पोस्टर बनाया, और लोगों को यह अच्छा लगा।

सवाल: चर्चा ऐसी भी रही कि आपने महिमा चौधरी से शादी के लिए गांव की 1200 करोड़ की जमीन बेच दी, इसकी क्या सच्चाई है?

जवाब: किसी ने लिख दिया कि आज तक कोई संजय मिश्रा से पूछता भी नहीं था। उन्होंने अपने गांव में 1200 करोड़ की जमीन बेची। मेरे पुरखे जाग गए भाई, और फिर महिमा जी की बात… यह मेरी कहानी नहीं है, किसी ने अपनी मनमर्जी से कहानी बनाई थी। और हर किसी को कहानियां बनाने का अधिकार होता है।

सवाल: ‘दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी’ में सेकंड चांस की बात होती है, जिसमें समाज का दबाव और आपकी मर्यादा, नैतिकता की जंग होती है। इस किरदार को निभाते हुए आपने अपनी असल जिंदगी से कैसे जोड़ा?

जवाब: हमारे यहां सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग उम्र बढ़ने पर सोचने लगते हैं कि अब बहुत हो गया, मरना है। जैसे कि 58, 59, 60 साल हो गए, तो लगता है कि अब जिंदगी खत्म। लेकिन जिंदगी का मतलब है हर दिन नया मौका, नई शुरुआत। हमारी जिंदगी 25 साल और भी हो सकती है, तो हर दिन को जीना चाहिए।

उम्र के बाद भी हम कुछ नया कर सकते हैं, चाहे शादी हो या कोई काम, क्यों नहीं? जब तक सांस है, तब तक जिंदगी जीने का अधिकार है। और अगर आपका काम किसी और की भलाई में मदद करता है, तो जरूर करना चाहिए।

लोग सोचते हैं कि बड़े हो गए तो जीना छोड़ देना चाहिए, या सिर्फ मरने का इंतजार करना चाहिए। यह सही नहीं है। आपको जीना चाहिए, कुछ करना चाहिए, अपने लिए मकसद होना चाहिए। आप चाहे जो भी करना पसंद करें, शादी करें या कोई काम शुरू करें, यह गलत नहीं है।

इसलिए, उम्र के बाद भी जिंदगी पूरी तरह खुली है। घबराना नहीं, खुद को मौका देना चाहिए और खुशी से जीना चाहिए।

संजय मिश्रा कहते हैं कि लोग क्या कहेंगे, इस बारे में मत सोचो। अपनी बात सुनो और उसी पर ध्यान दो।

संजय मिश्रा कहते हैं कि लोग क्या कहेंगे, इस बारे में मत सोचो। अपनी बात सुनो और उसी पर ध्यान दो।

सवाल: अक्सर लोग सवाल करते हैं, “लोग क्या कहेंगे?” क्या आपकी जिंदगी में ऐसा कभी हुआ है कि इस बात का असर पड़ा हो? और आप कैसे इससे बाहर निकले?

जवाब:“लोग क्या कहेंगे?” ये सबकी सोच होती है। मां से लेकर दूर के पड़ोसी तक हर कोई कुछ न कुछ कहता है। अगर आप सड़क पर बैठकर लोटा लेकर खड़े हो, तो लोग जरूर कहेंगे। लेकिन सबसे जरूरी होता है कि आपका अपना दिल क्या कहता है।

लोग हमेशा कुछ न कुछ बोलेंगे, ये उनका काम है। लेकिन एक हद होती है जिसके बाद हमें उनकी बातों की परवाह नहीं करनी चाहिए। आप भी किसी के लिए लोग होते हैं, जहां तक बात है रात में लाउडस्पीकर बजाने की, तो लोग कहते हैं कि करना नहीं चाहिए।

लेकिन अगर आपको कुछ करने का मन है, जैसे पेंटिंग करना या पब्लिक के सामने आना, तो आप को “लोग क्या कहेंगे” की चिंता छोड़ देनी चाहिए। इससे डर कर जिंदगी खत्म हो जाती है।

अखिर में आपको भगवान को नमस्ते करना है, इस सोच से नहीं कि लोग क्या कहेंगे। अगर ये सोचकर चले गए तो सही नहीं। जो आपका दिल कहे, वही करना चाहिए।

सवाल: कभी आपकी जिंदगी में ऐसा वक्त आया जब आप बहुत टूट गए हों, सबसे नीचे महसूस किया हो? फिर उस मुश्किल समय से कैसे बाहर निकले? क्योंकि हम अक्सर सेकंड चांस की बात करते हैं?

जवाब: दोस्त, अगर जिंदगी में सबसे कमजोर दौर ना आए तो जिंदगी में मजा क्या? यही तो वो असली जिंदगी है। हमेशा ऊपर-ऊपर ही चले जाना सही नहीं होता। जब आप थोड़ा नीचे आओगे, तब ही आपको ऊपर का सुख समझ आएगा। जैसे अच्छी किताब पढ़ो तो बुरी किताब भी समझ में आती है, अच्छी फिल्म देखोगे तो बुरी फिल्म का भी पता चलेगा।

जब नीचले दौर से गुजरोगे तब ही ऊंचाई का असली मजा मिलेगा। अगर हमेशा सफल होते रहो, तो जिंदगी बोरिंग हो जाएगी क्योंकि सब कुछ आसान मिलना शुरू हो जाएगा।

कभी-कभी लगता होगा कि मैं इस दुनिया से बाहर निकल जाऊं, लेकिन जब जिंदगी फिर से अच्छी हो जाती है, तो फिर जुड़कर उसे एंजॉय करना चाहिए। ये जो हम जिंदगी में हैं, ऊपर वाले ने हमें दिया है, तो इसका फायदा उठाओ और जी भर के जिंदगी जियो।

सवाल: आप दिल से बहुत इमोशनल इंसान हैं। कई बार फैंस आपसे बहुत भावुक हो जाते हैं। आपने एक बार बताया था कि एक आदमी दो दिन तक दादर से आकर आपके घर के बाहर खड़ा था। क्या आपको ऐसे और भी कोई फैन मोमेंट याद है?

जवाब: जब पता चलता है कि आपने किसी के दिल को छु लिया, बहुत अच्छा लगता है। एक बार एक लड़का बाथरूम में बंद हो गया था, मुझे फोन आया कि वापस आ जाओ। मैं वापस गया तो उसने मेरा नाम लेकर बहुत रोया। उसने मेरा कपड़ा भी खराब कर दिया। उसने कहा कि उसने मेरे में अपने पिता को देखा, जो छह महीने पहले गुजर गए। ऐसे फैंस से मिलना बहुत खास होता है।

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