Rahul Gandhi meets workers unions | राहुल गांधी ने वर्कर्स यूनियनों से मुलाकात की: 4 नए लेबर कानून पर चर्चा; लिखा- ये आवाज दबाने की कोशिश

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को देशभर के कई वर्कर्स यूनियनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और नए लेबर कोड्स पर चर्चा की। राहुल ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उनकी चिंताओं को उठाएंगे और चर्चा को आगे बढ़ाएंगे।

मुलाकात के बाद राहुल ने X पर लिखा- वे (प्रतिनिधि) इन चार नए लेबर कोड्स को लेकर बहुत चिंतित हैं। उनके अनुसार ये कानून वर्कर्स और उनके संगठनों के अधिकारों को कमजोर करने और उनके अधिकारों की आवाज को दबाने के लिए बनाए गए हैं।

दरअसल केंद्र सरकार ने देश के सभी मजदूरों और कर्मचारियों के लिए 21 नवंबर से चार नए लेबर कोड लागू किए थे। पहले जो 29 अलग-अलग श्रम कानून थे, उनमें से जरूरी बातें निकालकर इन्हें अब 4 आसान और साफ नियमों में बदल दिया गया है।

इन नए नियमों का मकसद हर कामगार को समय पर और ओवरटाइम वेतन, न्यूनतम मजदूरी, महिलाओं को बराबर मौका और सैलरी, सोशल सिक्योरिटी, फ्री हेल्थ चेकअप देना है।

राहुल की वर्कर्स यूनियन से मुलाकात की 3 तस्वीरें…

क्या हैं नए लेबर कोड्स, कैसे लागू हो रहे हैं?

भारत में पहले 29 अलग-अलग लेबर लॉज थे, जो कन्फ्यूजिंग थे। अब इन्हें चार कोड्स में समेट दिया गया है- कोड ऑन वेजेज (2019), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (2020), कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) और OSHWC कोड (2020)। वेज कोड 21 नवंबर 2025 से एक्टिव हो गया है। अगले 45 दिनों में डिटेल्ड रूल्स नोटिफाई होंगे। जिसके तहत सभी कंपनियों को अपने सैलरी स्ट्रक्चर को रीस्ट्रक्चर करना होगा।

नए कोड्स में मुख्य बदलाव ये है कि बेसिक सैलरी, डियरनेस अलाउंस और रिटेनिंग अलाउंस मिलाकर CTC का 50% या गवर्नमेंट नोटिफाई % होना चाहिए। ये वेजेज की डेफिनेशन को स्टैंडर्डाइज करता है, ताकि PF, ग्रेच्युटी और पेंशन कैलकुलेशन में कंसिस्टेंसी आए। पहले कंपनियां बेसिक को कम रखकर अलाउंस बढ़ा देती थीं, जिससे कंट्रीब्यूशन कम होता था। अब ये ट्रिक काम नहीं करेगी।

उदाहरण से समझें-टेक-होम सैलरी पर कैसे असर पड़ेगा

नए रूल्स से कर्मचारियों की मंथली टेक-होम कम हो सकती है, क्योंकि CTC फिक्स रहने पर डिडक्शंस बढ़ जाएंगे। मान लीजिए किसी की CTC 50,000 रुपए है। पहले बेसिक 30-40% (15,000-20,000 रुपए) होता था, तो PF कंट्रीब्यूशन (12% बेसिक पर) 1,800-2,400 रुपए का होता। अब बेसिक 50% यानी 25,000 रुपए करना पड़ेगा, तो PF 3,000 रुपए हो जाएगा। मतलब टेक-होम सैलरी 1,200 रुपए कम हो जाएगी।

ग्रेच्युटी भी अब ‘वेजेज’ पर कैलकुलेट होगी, जिसमें बेसिक के अलावा अलाउंस (HRA और कन्वेयंस को छोड़कर) जुड़ेंगे। इससे ग्रेच्युटी अमाउंट बढ़ेगा, लेकिन ये भी CTC से ही आएगा। नंगिया ग्रुप की पार्टनर अनजली मल्होत्रा ने कहा, ‘वेजेज में अब बेसिक पे, डियरनेस अलाउंस और रिटेनिंग अलाउंस शामिल हैं। 50% टोटल रेम्युनरेशन को ऐड करना पड़ेगा।’ ऐसे में छोटे-मझोले कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

PF और ग्रेच्युटी कंट्रीब्यूशन कैसे बढ़ेगा, क्या हैं फायदे?

PF 12% ‘वेजेज’ पर होगा, जो पहले सिर्फ बेसिक पर था। ग्रेच्युटी कैलकुलेशन भी वेजेज पर शिफ्ट हो गया है। फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई को अब सिर्फ 1 साल सर्विस के बाद ग्रेच्युटी मिलेगी, पहले 5 साल लगते थे। यूनिवर्सल मिनिमम वेजेज भी आएगा, जो लिविंग स्टैंडर्ड्स पर बेस्ड होगा। यह ऑर्गनाइज्ड और अन-ऑर्गनाइज्ड सेक्टर के सभी वर्कर्स को कवर करेगा।

गिग वर्कर्स (जैसे डिलीवरी बॉय) के लिए कंपनियों को 1-2% टर्नओवर पर कंट्रीब्यूशन देना होगा (5% पेमेंट्स तक कैप्ड)। EY इंडिया के पुनीत गुप्ता ने कहा, ‘ग्रेच्युटी पेमेंट्स बढ़ेंगे क्योंकि कैलकुलेशन सिर्फ बेसिक से आगे वेजेज पर होगा।’ लॉन्ग-टर्म में ये रिटायरमेंट सिक्योरिटी को स्ट्रॉन्ग बनाएगा, लेकिन कंपनियां अलाउंस घटाकर बैलेंस करने की कोशिश करेंगी।

क्यों लाए गए ये चेंजेस, गवर्नमेंट का प्लान क्या?

ये कोड्स वर्कफोर्स को मॉडर्नाइज करने के लिए हैं। पहले लॉज आउटडेटेड थे, जो सिर्फ 30% वर्कर्स को कवर करते थे। अब यूनिफॉर्म वेज डेफिनेशन से डिस्क्रिमिनेशन कम होगा। हायरिंग और वेजेज में जेंडर इक्वालिटी आएगी। नए कानून से लेऑफ थ्रेशोल्ड 100 से 300 वर्कर्स हो गया। वहीं छोटी फैक्ट्रीज के लिए 20-40 वर्कर्स तक रिलैक्सेशन दिया गया है। ओवरटाइम डबल रेट पर मिलेगा। गिग इकोनॉमी को सपोर्ट करने के लिए सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन अनिवार्य किया गया है।

इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुचिता दत्ता ने कहा, ‘नए कोड्स वेजेज डेफिनेशन को यूनिफाई करते हैं। इससे रिटायरमेंट सिक्योरिटी बेहतर होगी, लेकिन अगर एम्प्लॉयर्स अलाउंस घटाएंगे तो टेक-होम सैलरी कम हो सकती है।’ गवर्नमेंट का फोकस डिजिटाइज्ड कंप्लायंस- वन-लाइसेंस सिस्टम, रैंडमाइज्ड इंस्पेक्शंस और फाइन कंपाउंडिंग पर है।

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