Rajasthan Jaipur Court Controversy; Kirodi Lal Meena | CMO | हाईकोर्ट बिल्डिंग के लिए जमीन देने से किरोड़ी का इनकार: CM ऑफिस को लिखा- कृषि अनुसंधान 50-60 साल पिछड़ जाएगा, ये PM की मंशा के विपरीत – Rajasthan News

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राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ की नई बिल्डिंग के लिए जमीन देने से कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इनकार कर दिया है। कार्यालय विशिष्ट सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय ने नई हाईकोर्ट बिल्डिंग के लिए चयनित जमीन के संबंध में विभागीय टिप्पणी तथा इस जमीन के स्थ

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किरोड़ी लाल मीणा ने नोट के जवाब में जमीन देने से इनकार कर दिया। कृषि मंत्री का कहना है कि राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान दुर्गापुरा, जयपुर स्थित संस्थान की जमीन को किसी अन्य कार्य के लिए नहीं दिया जा सकता। ऐसा करने से राज्य का कृषि अनुसंधान कार्य 50-60 साल पिछड़ जाएगा। ऐसा करना पीएम मोदी की किसानों की आय दोगुनी करने की मंशा के विपरीत होगा।

60 वर्ष की कड़ी मेहनत से कृषि योग्य भूमि बनाया कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजे गए पत्र में लिखा- राजस्थान कृषि अनुसंधान केंद्र दुर्गापुरा की जमीन को 60 साल की कड़ी मेहनत के बाद कृषि योग्य बनाया गया है। इसका उपयोग वर्तमान में संस्थान द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं केंद्रीय सहायता से संचालित अखिल भारतीय समन्वित परियोजना नेटवर्क परियोजना के लिए किया जा रहा है।

संस्थान की भूमि को नई हाईकोर्ट की बिल्डिंग की बनाने के लिए उपलब्ध कराने पर राज्य में कृषि अनुसंधान कार्य बाधित होगा। कई साल से संचालित महत्वपूर्ण अनुसंधान परियोजनाओं को बंद किया जाना होगा, जिससे राज्य के कृषि अनुसंधान पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों द्वारा लगभग 60 साल की शोध के बाद सिक प्लांट विकसित किया गया है। सिक प्लांट फसलों की कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है।

गेहूं, जौ, चना, मसूर, बाजरा, ग्वार, मूंगफली, मूंग और सब्जी पर रिसर्च कर 140 से अधिक किस्में विकसित की जा चुकी हैं। ऑर्गेनिक मार्ट की स्थापना इसी परिसर में की गई है। नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जो पीएम मोदी की किसानों की आय दोगुनी करने की मंशा के विपरीत होगा।

वैकल्पिक भूमि देने से धन की बर्बादी किरोड़ी लाल ने पत्र में लिखा है- यदि इस जमीन के बदले दूसरी जमीन लेते हैं तो संस्थान परिसर में सालों से विकसित आधारभूत सुविधाएं जिस पर राज्य एवं केंद्र सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च किए हैं, उस राशि का अपव्यय होगा।

दूसरी जमीन पर नए सिरे से गतिविधियां आरंभ किए जाने की स्थिति में राज्य का कृषि अनुसंधान कार्य 50-60 साल पिछड़ जाएगा, जो राज्य हित और कृषि हित में नहीं होगा।

कृषि मंत्री द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा गया पत्र।

कृषि मंत्री द्वारा मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा गया पत्र।

मेट्रो परियोजना के लिए ली जा चुकी है भूमि कृषि मंत्री ने पत्र में लिखा- लगभग 21.04 हेक्टेयर भूमि मेट्रो परियोजना, बी-2 बाईपास से एवं अन्य परियोजनाओं के उपयोग के लिए दी जा चुकी है। ऐसी स्थिति में संस्थान के पास निर्मित क्षेत्र को छोड़कर शेष उपलब्ध 49.60 हेक्टेयर कृषि भूमि है। इसमें से अगर और जमीन दी गई तो यहां चल रही परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। संस्थान में अफगानिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और वियतनाम के अधिकारियों-कृषकों को भी प्रशिक्षण दिया जाता है।

(भास्कर ने मामले में कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा का पक्ष जानने की कोशिश लेकिन उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया।)

मुख्य न्यायाधीश ने दिए थे नई बिल्डिंग के संकेत हाईकोर्ट जयपुर पीठ की नई बिल्डिंग बनने के संकेत अक्टूबर महीने में मिल गए थे। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसपी शर्मा ने बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के एक्सटेंशन काउंटर के शुभारंभ समारोह में कहा था- मैं तो चाहता हूं कि हाईकोर्ट के लिए ज्यादा बड़ी जगह और मिल जाए। उसमें हर ऑफिस को अलग से जगह मिले, ऐसा मेरा प्रयास है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि कुछ दिनों अथवा कुछ महीनों बाद मैं आपको कह सकूं कि हमारी नई बिल्डिंग के लिए जगह उपलब्ध हो रही है।

हाईकोर्ट परिसर में पार्किंग की बड़ी समस्या राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव सोगरवाल का कहना है कि यह अभी पाइप लाइन में है। मैं इस पर अभी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं। मेरे पास अभी ऑफिशियल जानकारी नहीं है। हम तो चाहते हैं कि यहीं पर अच्छा हो। बहुत ज्यादा दूर जाने पर सभी को दिक्कत होती है।

राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील शिवलाल ने कहा- हाईकोर्ट परिसर में पार्किंग बहुत बड़ी समस्या है। वकीलों के बैठने के लिए भी पर्याप्त जगह नहीं है। सरकार यदि उचित व्यवस्था कराती है तो वह धन्यवाद की पात्र है।

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