हिसार मिनी सचिवालय के बाहर धरना देकर बैठे किसान नेता।
तमिलनाडु के किसान नेता पीआर पांडियन और सेल्वराज की रिहाई को लेकर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन एकता, सिंधुपुर सहित अन्य किसान यूनियन ने वीरवार को हिसार के लघु सचिवालय मे धरना दिया।
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किसान संगठन की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए मांगपत्र में कहा गया कि दोनों किसान नेताओं को झूठे मामलों में फंसाकर सजा दी गई है, जिससे देशभर के किसानों में रोष व्याप्त है। किसानों ने बताया कि आगामी समय में भी हमारा संघर्ष से जारी रहेगा।
किसान नेता हर्षदीप गिल ने बताया कि पीआर पांडियन ने अपना पूरा जीवन किसानों के उत्थान के लिए समर्पित किया है। वर्ष 2013 में तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले के काडालमलई क्षेत्र में राज्य सरकार द्वारा घोषित संरक्षित कृषि भूमि इलाके में एक निजी कंपनी द्वारा खनन एवं ड्रिलिंग का कार्य किया जा रहा था।

हिसार के लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे किसान।
फर्जी सबूतों के आधार पर किया गया मुकदमा दर्ज : हर्षदीप गिल
उन्होंने कहा कि, वर्ष 2013 में इस साइट पर गैस लीक की घटना भी सामने आई, जिससे जनजीवन और पर्यावरण को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया। स्थानीय नागरिकों के विरोध के बाद प्रशासन ने कार्य पर रोक लगाई, लेकिन आरोप है कि कंपनी ने नियमों की अनदेखी करते हुए काम जारी रखा।
उन्होंने बताया कि परियोजना से खेती और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका को देखते हुए वर्ष 2015 में पीआर पांडियन के नेतृत्व में किसानों ने शांतिपूर्ण आंदोलन किया। इसके बाद कंपनी ने अपने हित साधने के लिए किसानों की आवाज दबाने के लिए षड्यंत्र रचा और फर्जी साक्ष्यों के आधार पर पांडियन और सेल्वराज के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
किसान नेताओं ने कहा कि 6 दिसंबर 2025 को तिरुवल्लूर जिले की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दोनों किसान नेताओं को 13-13 वर्ष की सजा सुनाई, जिसके बाद वे जेल में हैं। भारतीय किसान यूनियन एकता ने राष्ट्रपति से संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए केंद्र और तमिलनाडु सरकार को निर्देश देकर कानूनी समाधान निकालने तथा दोनों किसान नेताओं की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित कराने की मांग की है। किसान नेता ने बताया कि पूरे हरियाणा में जिला मुख्यालय पर आज किसान प्रदर्शन कर रहे हैं।