श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर क्षेत्र के भोमपुरा गांव, यहां की गोशाला में 100 से ज्यादा गाय पिछले 3 महीने में मर चुकी हैं। अब भी 60 गायें तड़प रही हैं, जो जहां है वहीं पड़ी हैं, गर्दन तक नहीं उठा पा रहीं हैं। वजह है ठंड, दूषित भोजन और गीला चारा…
.
गोशाला के पीछे पहुंचते ही नजर आई प्रबंधन की लापरवाही, यहां एक के ऊपर एक 70 गायों के शव पड़े हैं। पूछने पर पता चला इन्हें दफनाया जा रहा था।
गोसेवकों ने जब मामले का खुलासा किया तो ये काम रोक दिया गया। यहीं कुछ दूर गायों के दफन शव जमीन से झांकते हुए नजर आए।
अध्यक्ष बीमारी और घर में बेटे की शादी का बहाना बना कर अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। दानदाता और जो रक्षक दलों का आरोप है कि यहां 100 गायों की मौत हुई है। जबकि प्रशासन ने 70 की पुष्टि की है। मामला भोमपुरा गांव की इच्छापूर्ण गोकुल गोशाला का है।
मुक्तिधाम मुकाम (नोखा) के कथावाचक और दानदाता राजन प्रकाश (36) ने इस मामले में समेजा कोठी पुलिस थाने में आरोपी गोशाला अध्यक्ष पालाराम बिश्नोई, मैनेजर सुनील व गोशाला कमेटी के अन्य सदस्यों के खिलाफ गौ हत्या के आरोप में मामला दर्ज कराया है।
पहले देखिए गोशाला की बदहाली की तस्वीरें…

ये तस्वीर, गोशाला के पिछले हिस्से की है। यहां गोवंश को दफनाया जा रहा था।

ये है वो गीला चारा, जिससे खाने से लगातार गायों की तबीयत बिगड़ रही है। वजह ठंड भी है।
आधा पैसा भी खर्च किया होता तो न होती मौतें
दानदाता राजन प्रकाश ने कहा- गोशाला को साल में 2 बार अनुदान मिलता है। इस बार भी अनुदान मिला है। मैं खुद इस गोशाला से काफी समय से जुड़ा हूं और 10 महीने पहले मैं यहां व्यक्तिगत 10 लाख रुपए दान दिया था।
इसके अलावा मेरे भक्तों ने भी ढाई लाख रुपए गोशाला में डोनेट किए थे। अगर इसमें से आधा पैसा भी गोशाला में लगता तो गोशाला की ऐसी स्थिति नहीं होती और गोवंश की मौत नहीं होती। गोशाला का पूरा पैसा व्यक्तिगत खर्च किया गया है। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अक्टूबर में की थी शिकायत
गौ रक्षा दल, रायसिंहनगर के अध्यक्ष बबलू भाटी बताते हैं- अक्टूबर महीने में हमने गोशाला की शिकायत की थी। इस दौरान पशुपालन विभाग ने यहां दौरा किया था और अव्यवस्थाएं देख प्रबंधन को 15 दिनों में सुधार के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी प्रबंधन ने कोई ध्यान नहीं दिया।

इसके बाद बुधवार को सूचना मिली कि बड़ी संख्या में यहां मृत गायों को दफनाया जा रहा है। तब गोरक्षा दल की टीम यहां तहसीलदार हर्षिता और एसडीएम सुभाष चंद्र चौधरी मौके पर पहुंचे। गायों को दफनाने और गोशाला की हालत देख चौंक गए।
बबलू भाटी बताते हैं- यहां 60 गाय मरने की हालत में थी, 100 को दफनाने की तैयारी थी। सर्दी के मौसम में न तो गायों के लिए सूखे चारे की व्यवस्था थी न ही साफ-सफाई। इतनी भयंकर बदबू आ रही थी कि खड़ा रहना भी मुश्किल था।
टीम का गठन किया जांच जारी
मामले को लेकर कलेक्टर डॉ. मंजू चौधरी ने कहा- मामला संज्ञान में आते ही तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की, जिसमें अतिरिक्त जिला कलेक्टर अशोक कुमार, एसडीएम सुभाष चौधरी और पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक शामिल हैं। माहौल शांत रखने के लिए गोशाला में पुलिस तैनात कर दी गई। नए प्रबंधन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत प्रशासक रिछपाल बावरी को सौंपी गई है।
कलेक्टर ने बताया- इसके अध्यक्ष पालाराम बिश्नोई ने स्वास्थ्य और पारिवारिक कारणों का हवाला देकर अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रथम दृष्टया ठंड और दूषित चारे से गायों की मौत होना सामने आया है।

पशुपालन विभाग ने मौके से गोवंश का पोस्टमॉर्टम करवाया और जांच के लिए सैंपल लैब म भेजे हैं।
सैंपल लैब में भेजे
कलेक्टर ने कहा- हमने गोशाला का निरीक्षण किया है। जिसमें गोशाला प्रबंधन समिति और उसके अध्यक्ष की घोर लापरवाही सामने आई है। जिसके कारण 60 से अधिक गोवंश की मौत हो चुकी है। इसके अलावा कुछ गोवंश बीमार भी हैं।
हमने एडीएम अनूपगढ़ की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है जो पूरे मामले की जांच कर रही है। डॉक्टरों की टीम भी यहां पर मौजूद है। गोवंश का पोस्टमॉर्टम कराया गया है और सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।

गोशाला को 64 लाख का अनुदान
कलेक्टर ने बताया- राज्य सरकार से इस गोशाला को इस वित्तीय वर्ष में 64 लाख का अनुदान भी मिला है। 2 किस्तों में अनुदान दिया गया है। इस मामले में सरकार की ओर कोई कोताही नहीं है।
इस मामले में कमेटी जांच करेगी और जो भी कोई अधिकारी या कर्मचारी भी दोषी पाया गया तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गोशाला में अब पशुओं को फ्रेश हरे-चारे की व्यवस्था करवा दी है।
पुराना चारा या तूड़ी वगैरा है उसको भी नष्ट करवा दिया गया है। साथ ही खराब चारे के उसके सैंपल भी लिए जा चुके हैं जो जांच के लिए भेजे जाएंगे। गोशाला के अंदर गीली मिट्टी व कीचड़ को भी साफ कराया गया है।

प्रशासन ने मौके से गोवंश के शवों को वहां से हटवाया है।
बोले- मामला गरमाया तो इस्तीफा दिया
गोशाला 2014 से चल रही थी 2016 से पालाराम बिश्नोई अध्यक्ष थे। उन्होंने मामले को लेकर कहा- मेरा स्वास्थ्य खराब है, घर में बेटे की शादी में व्यस्त था, इसलिए गोशाला में समय नहीं दे पाया। चारे की व्यवस्था भी थी। यहां करीब 75 गोवंश की मौत हुई है। इसकी वजह ठंड हो सकती है। मामला गरमाने पर इस्तीफा दिया है।


तस्वीर, बीमार गोवंश की है। बीमारी ऐसी है कि ये गर्दन भी नहीं उठा पा रहा है।
दूषित चारा देने की बात आई सामने
पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर संजीव मलिक ने कहा- पशुओं की मौतें शरीर में वीकनेस और ठंड की वजह से हुई है। इसके साथ ही इन्हें दूषित चेहरा देने की बात भी सामने आ रही है। मृत पशुओं के सैंपल लिए गए हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले का खुलासा हो पाएगा।

कलेक्टर की ओर से टीमें भी लगाई हैं। पशु चिकित्सकों की टीम गोवंशों की देखभाल कर रही है।

….
राजस्थान में गोशाला से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए…
राजस्थान में विवादित गोशालाओं को नहीं मिलेगा अनुदान:हाईकोर्ट ने PIL खारिज की, कहा- जमीन या कार्यकारिणी विवाद होने पर ग्रांट रोकना उचित

राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर पीठ ने ने स्पष्ट किया है कि जिन गोशालाओं की जमीन या कार्यकारिणी को लेकर कोर्ट में विवाद चल रहा है, वे सरकारी अनुदान की हकदार नहीं हैं। पूरी खबर पढ़िए…