Amritsar Balwant Singh Rajoana wrote letter Akal Takht Sahib Central Jail Update | जेल से राजोआना ने अकाल तख्त साहिब को लिखा पत्र: शहीद साहिबजादों के दिवस और पंथ की आवाज को लेकर जताई चिंता – Amritsar News

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बलवंत सिंह राजोआना , जो केन्द्रीय जेल पटियाला में बंद हैं, ने सिख पंथ और शहीद साहिबजादों के शहादत दिवस को लेकर गंभीर चिंता जताई है। जेल से लिखे गए अपने पत्र में उन्होंने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज को पत्र में कहा कि पंथ की आ

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राजोआना ने सवाल उठाया कि क्या अकाल तख्त साहिब की आवाज इतनी कमजोर हो गई है कि वह संसद में उठाए जाने वाले महत्वपूर्ण पंथक मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचा पा रही। उन्होंने लिखा कि साहिबजादों के शहादत दिवस का नाम बदलकर वीर बाल दिवस करने के लिए केंद्र सरकार के सांसदों से मदद मांगना पंथ की गरिमा और ऐतिहासिक महत्व को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।

कांग्रेस सांसदों से मदद मांगना शहीदों के बलिदान का अपमान: राजोआना

उन्होंने यह भी कहा कि जिन सांसदों से मदद मांगी गई है, उनमें से कई कांग्रेस पार्टी से हैं, जिन्होंने इतिहास में सिखों पर जुल्म किए। ऐसे सांसदों से मदद मांगना उन शहीदों और उनके बलिदानों का अपमान है। बलवंत सिंह ने स्पष्ट किया कि पंथ की आवाज को कमजोर या बेवस न बनाया जाए।

पंथ को चढ़दी कला में बनाए रखें, राजनीतिक दबाव से दूर रहें

राजोआना ने सुझाव दिया कि शहीद साहिबजादों के शहादत दिवस का नाम साहिबजादे शहादत दिवस ही रखा जाए और पंथ अपनी गरिमा और ऐतिहासिक महत्व की रक्षा स्वयं करे। उन्होंने यह भी कहा कि पंथ को चढ़दी कला में बने रहना चाहिए और किसी भी दबाव या राजनीतिक ताकतों के प्रभाव में नहीं आना चाहिए।

पत्र में बलवंत सिंह ने अपने विचारों में साफ तौर पर लिखा कि अकाल तख्त साहिब को किसी राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत हित के कारण कमजोर या अप्रभावी नहीं बनने देना चाहिए। उनका मानना है कि पंथ की आवाज दुनिया भर में गूंजनी चाहिए और शहीदों के बलिदान का सम्मान हमेशा बनाए रखा जाना चाहिए।

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