US Green Card Lottery DV1 Update | अमेरिका ने ग्रीन कार्ड लॉटरी प्रोग्राम सस्पेंड किया: दो यूनिवर्सिटी में गोलीबारी के बाद फैसला, 50 हजार लोगों पर असर पड़ेगा

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नई दिल्ली3 घंटे पहले

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ट्रम्प पहले से ही ग्रीन कार्ड लॉटरी प्रोग्राम का विरोध करते आ रहे हैं। (फोटो क्रेडिट-AI) - Dainik Bhaskar

ट्रम्प पहले से ही ग्रीन कार्ड लॉटरी प्रोग्राम का विरोध करते आ रहे हैं। (फोटो क्रेडिट-AI)

अमेरिका ने शुक्रवार को ग्रीन कार्ड लॉटरी या डाइवर्सिटी वीजा (DV1) प्रोग्राम को सस्पेंड कर दिया है। इसके जरिए अमेरीका में कम प्रतिनिधित्व वाले देशों के लोगों को ग्रीन कार्ड दिया जाता था।

ये निर्णय 14 दिसंबर को ब्राउन यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी और 15 दिसंबर को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की घर पर गोली मारकर हत्या के बाद लिया गया है।

होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प के निर्देश पर इस लॉटरी प्रोग्राम को रोका गया है ताकि कोई और अमेरिकी इस तरह की घटनाओं में घायल न हो। उन्होंने याद दिलाया कि 2017 में न्यूयॉर्क सिटी में ट्रक हमले के बाद भी ट्रम्प ने इस कार्यक्रम को खत्म करने की कोशिश की थी।

जानिए क्या है ग्रीन कार्ड लॉटरी प्रोग्राम…

ग्रीन कार्ड लॉटरी या डायवर्सिटी वीजा प्रोग्राम (DV1) एक ऐसा सिस्टम है जो हर साल लॉटरी के जरिए अमेरिका में कम प्रतिनिधित्व वाले देशों के लोगों को ग्रीन कार्ड देता है। इस प्रोग्राम के तहत हर साल लगभग 50,000 लोग चुने जाते हैं।

यह लॉटरी सिस्टम 1990 में लागू किया गया था ताकि अमेरिका में विभिन्न देशों के लोगों को आने का मौका मिले। साल 2025 में इस लॉटरी के लिए करीब 20 मिलियन लोगों ने आवेदन किया था।

इसमें विजेता लोगों के साथ उनके जीवनसाथी और बच्चे भी शामिल किए गए, जिससे कुल मिलाकर 131,000 से ज्यादा लोगों को चुना गया। इनकी प्रारंभिक जांच के बाद 50 हजार लोगों को चुना जाएगा।

भारतीयों को इससे कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत, चीन, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश इसमें शामिल नहीं होते क्योंकि वहां से पहले से ही ज्यादा लोग अमेरिका आते हैं।

ट्रम्प DV1 प्रोग्राम के विरोधी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय से डायवर्सिटी वीजा (DV1) प्रोग्राम का विरोध करते रहे हैं। उनका कहना था कि इस लॉटरी के जरिए आने वाले कुछ लोग अमेरिका में सुरक्षा या अन्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

इससे पहले नवंबर में नेशनल गार्ड के सदस्यों पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें एक अफगानी व्यक्ति को बंदूकधारी पाया गया। उस घटना के बाद ट्रम्प प्रशासन ने अफगानिस्तान और अन्य देशों से आने वाले लोगों के लिए इमिग्रेशन नियम और कड़े कर दिए थे।

अब 14 दिसंबर को ब्राउन यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी के बारे में जानिए…

ब्राउन यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी में मारे गए छात्रों की पहचान एला कुक (19) और मुहम्मद अजिज उमुर्जोकॉव (18) के रूप में की गई थी।

ब्राउन यूनिवर्सिटी में हुई गोलीबारी में मारे गए छात्रों की पहचान एला कुक (19) और मुहम्मद अजिज उमुर्जोकॉव (18) के रूप में की गई थी।

अमेरिका के रोड आइलैंड राज्य के प्रोविडेंस शहर में ब्राउन यूनिवर्सिटी में 14 दिसंबर को हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने बताया कि इस मामले का मुख्य संदिग्ध 48 साल का क्लाउडियो नेवेस वैलेंते था। वह 2017 में डायवर्सिटी लॉटरी के जरिए अमेरिका आया था और उन्हें ग्रीन कार्ड मिला था।

इस घटना में एला कुक (19) और मुहम्मद अजिज उमुर्जोकॉव (18) की मौत हुई और नौ अन्य घायल हुए थे। वैलेंते को 15 दिसंबर को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के पुर्तगाली प्रोफेसर नूनो लोरेइरो की हत्या में शामिल माना जा रहा है।

पुलिस ने छह दिन की तलाश के बाद वालेंटे को न्यू हैम्पशायर की एक स्टोरेज सुविधा में मृत पाया। उसके पास दो बंदूकें और एक बैग था। ब्राउन यूनिवर्सिटी की अध्यक्ष क्रिस्टिना पैक्सन ने बताया कि वैलेंते 2000-2001 में यहां फिजिक्स में पीएचडी कर रहे थे, लेकिन अभी उनका विश्वविद्यालय से कोई सक्रिय संबंध नहीं था।

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