Thousands take to the streets in Iran to protest inflation | ईरान में महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग: तीन साल में सबसे बड़ा प्रदर्शन, सेंट्रल बैंक के प्रमुख ने दिया इस्तीफा

Actionpunjab
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तेहरान8 घंटे पहले

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ईरान में बढ़ती महंगाई और मुद्रा संकट के खिलाफ सोमवार को हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। यह पिछले तीन साल में सबसे बड़ा प्रदर्शन बताया जा रहा है। इस बीच सेंट्रल बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

राजधानी तेहरान के सादी स्ट्रीट और ग्रैंड बाजार इलाके में व्यापारियों और दुकानदारों ने प्रदर्शन किया। कई जगहों पर दुकानें बंद रहीं, जिससे कारोबार ठप हो गया। चश्मदीदों के मुताबिक, इस्फहान, शिराज और मशहद जैसे बड़े शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए।

प्रदर्शन उस वक्त तेज हुए जब ईरान की मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। इससे खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतें और बढ़ गईं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर में महंगाई दर 42 फीसदी से ज्यादा रही, जबकि खाने की चीजों की कीमतें 70 फीसदी से अधिक बढ़ चुकी हैं।

ईरान में प्रदर्शन की तस्वीरें…

बढ़ती मंहगाई के खिलाफ हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी ईरान की सड़कों पर उतर आए।

बढ़ती मंहगाई के खिलाफ हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी ईरान की सड़कों पर उतर आए।

तीन साल में सबसे बड़ा प्रदर्शन

ये प्रदर्शन 2022 के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं। उस समय 22 साल की महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद पूरे देश में आंदोलन भड़क गया था। उन्हें हिजाब ठीक से न पहनने के आरोप में मोरैलिटी पुलिस ने पकड़ा था।

सोमवार को तेहरान के कुछ इलाकों में हालात काबू से बाहर होने पर पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को हटाया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे।

ईरान की करेंसी रियाल में ऐतिहासिक गिरावट

रविवार को ईरान की मुद्रा 1 डॉलर के मुकाबले 14.20 लाख रियाल तक गिर गई थी। सोमवार को इसमें हल्का सुधार हुआ और यह 13.80 लाख रियाल प्रति डॉलर पर पहुंची।

करेंसी में तेज गिरावट से महंगाई और बढ़ गई है। खाने-पीने की चीजें और रोजमर्रा का सामान लगातार महंगा हो रहा है।

हाल में पेट्रोल की कीमतों में बदलाव से हालात और बिगड़ने की आशंका है। कई एक्सपर्ट्स इसे हाइपरइन्फ्लेशन (अत्यधिक महंगाई) की तरफ बढ़ने का संकेत मान रहे हैं।

ईरानी मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकार 21 मार्च से शुरू होने वाले नए ईरानी साल में टैक्स बढ़ा सकती है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

ईरान का दुनिया के साथ व्यापार और संबंध तनावपूर्ण

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही ईरान की अर्थव्यवस्था को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। महंगाई दर लगातार बढ़ रही है इसका मुख्य कारण रहा है आयात (इंपोर्ट) का ज्यादा होना और निर्यात (एक्सपोर्ट) का कम होना।

इससे रियाल की कीमत लगातार गिरती गई। 2023 में स्थिति इतनी खराब हुई कि महंगाई (मुद्रास्फीति) ने रियाल के अवमूल्यन (मूल्य में जानबूझकर की गई कमी) को भी पीछे छोड़ दिया। अवमूल्यन से देश की मुद्रा सस्ती हो जाती है, जिससे उसके उत्पाद विदेशी खरीदारों के लिए सस्ते होते हैं और निर्यात की मांग बढ़ती है।

अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों ने विदेशी मुद्रा की कमी को और गहरा दिया। ईरान का दुनिया के साथ व्यापार और संबंध तनावपूर्ण रहे। राजनीतिक अलगाव ने अर्थव्यवस्था को और कमजोर किया, जिससे रियाल का मूल्य और गिरा।

अमेरिका ने लगा रखा है प्रतिबंध

अमेरिका ने एटमी प्रोग्रामों और सुरक्षा कारणों से ईरान पर कई प्रतिबंध लगा रखे हैं। ट्रम्प प्रशासन ने ईरान के खिलाफ ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति अपनाई, जिसमें तेल निर्यात, बैंकिंग, और शिपिंग पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए। साथ ही ईरानी तेल खरीदने वाली कंपनियों को भी दंडित किया।

अक्टूबर 2025 तक, यूएन सैंक्शन ने ईरान के हथियार कार्यक्रमों पर और प्रतिबंध बढ़ाए। इन पाबंदियों के कारण विदेशी बैंकिंग लेन-देन मुश्किल हो गया, डॉलर और यूरो जैसी विदेशी मुद्रा कम आई, आयात महंगा और सीमित हो गया। साथ ही निवेश और व्यापार प्रभावित हुए।

ईरान की इकोनॉमी तेल निर्यात पर निर्भर

2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पैट्रोकैमिकल्स का बड़ा हिस्सा था, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंध के कारण यह घाटा और बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ा है। मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन (35% निर्यात), तुर्की, यूएई और इराक शामिल हैं। ईरान चीन को 90% तेल निर्यात करता है।

ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश की है, जैसे कि INSTC कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स। फिर भी, 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है। प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल का मूल्य स्थिर करना मुश्किल रहेगा।

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