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श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पावन स्वरूपों के कथित रूप से गायब होने से जुड़े अत्यंत संवेदनशील और आस्था से जुड़े मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक और आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने साफ
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इस मामले में कुलवंत सिंह ने अग्रिम जमानत की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि वह यानि कुलवंत सिंह न तो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का नियमित कर्मचारी रहा है और न ही उसका इस पूरे प्रकरण से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध है। याचिका में कहा गया कि वह केवल एक जिल्दसाज (बुक बाइंडर) था, जिसे ठेके के आधार पर काम पर रखा गया था।
याचिका के अनुसार कुलवंत सिंह ने वर्ष 2010 से 2020 तक जिल्दसाजी का कार्य किया और इसके बाद उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। याचिकाकर्ता का दावा है कि पावन स्वरूपों के कथित गायब होने की घटना से उसका कोई लेना-देना नहीं है, इसके बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते उसे इस मामले में आरोपी बना दिया गया।
कुलवंत सिंह की ओर से अदालत को यह भी आश्वासन दिया गया कि वह जांच में पूरा सहयोग करेगा, जांच एजेंसियों के समक्ष उपस्थित होगा और अदालत द्वारा लगाई जाने वाली सभी शर्तों का पालन करेगा। ऐसे में उसे अग्रिम जमानत का संरक्षण दिया जाना न्यायसंगत होगा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कुलवंत सिंह की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि कुलवंत सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पहले से दायर दो अन्य आरोपियों परमदीप सिंह और दलबीर सिंह की अग्रिम जमानत याचिकाओं के साथ ही 9 जनवरी को की जाएगी, ताकि पूरे मामले पर एक साथ विचार किया जा सके।