Haryana former DGP OP Singh Last Post | लोगों के सवालों से परेशान हुए पूर्व DGP: बोले- लोग पूछते हैं कि आगे क्या करोगे?; स्कूल में था तो यही पूछते थे – Haryana News

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हरियाणा पूर्व डीजीपी ओपी सिंह।

हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) ओपी सिंह रिटायरमेंट के बाद लोगों के सवालों से परेशान हो गए हैं। उन्होंने इसको लेकर अपने सोशल मीडिया X पर इसको लेकर एक पोस्ट भी की है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि लोग पूछते हैं कि आगे क्या करोगे?

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दरअसल, 1992 बैच के आईपीएस ओपी सिंह का 31 दिसंबर 2025 को रिटायरमेंट हो गए हैं। उनके स्थान पर इसी बैच के आईपीएस अजय सिंघल ने जॉइन किया है। वहीं लोगों के सवालों के बाद अब इस पोस्ट के जरिए ओपी सिंह ने रिटायरमेंट के बाद आगे का प्लान अब शेयर किया है।

यहां पढ़ते हैं उन्होंने अपनी पोस्ट में क्या लिखा…

बोले- अब काम गढ़ने का समय आ गया

ओपी सिंह ने लोगों के सवालों का जवाब देते हुए लिखा है, स्कूल में था तो यही पूछते थे। सोचता था कि जब नदी आएगी तो पार कर जाएंगे। इतनी चिंता क्यों करनी है?

जब IPS में थे तो आठ-नौ साल ही फील्ड में एसपी, सीपी, आईजी-एडीजी, रेंज और डीजीपी रहे। घटनाएं तेज़ी से घटित होती थी। हैंड्स-ऑन रहना होना था। बाक़ी जगह तो काम खुद ही गढ़ना होता था। अब काम खुद गढ़ने का समय दोबारा आ गया है।

छठ पूजा का किस्सा बताया

पिछले अक्टूबर जब छठ पूजा में घर गए थे तो पुराने लोगों से मिलना हुआ। हमसे पहले जैसा प्यार रखते है। जीवन के आख़िरी दौर में हैं। बच्चे रोज़ी-रोटी की तलाश में बाहर चले गए हैं। शरीर जवाब दे रहा है। कोई हालचाल भी पूछ ले तो आंखें भर आती है। परिवार में भी हमसे बड़े हैं। हमसे पहले वाली अपेक्षा रखते हैं – कुछ बड़ा करो, फिर से।

लिखा- किताब का आखिरी अध्याय पुलिसिंग पर

सोचता हुं कि इससे बड़ा क्या हो सकता है कि जीवन के चौथेपन से जूझ रहे स्वजनों को समय दूं? किताब हौसलानामा का आखिरी अध्याय – ‘चौथेपन की मार’ – इसी विषय पर है। सरकार-युवा सरोकार ठीक कैसे रहे इस विषय पर किताब बीच में है। उसे पूरा करना है।

पुलिस को ताकतवर नहीं मजबूत और कारगर कैसे बनाते हैं, इसपर भी एक किताब बनती है। पिछले दिनों हमने ये देखा कि ये संभव है।

500-600 पेज की किताब लिखेंगे

​​​​​​​पांच-छह सौ पेज की आत्मकथा तो लिखनी ही लिखनी है। जेपी के संपूर्ण क्रांति, #इमरजेंसी, अमिताभ बच्चन के शोले और उसके बाद की घटनायें स्मृतिपटल पर स्पष्ट है।दुनियां अच्छी कहने की नहीं बनाने की चीज़ है। वर्ष 2018 में हिंदी पत्रिका कादम्बिनी में हौसलानामा की समीक्षा छपी थी। ‘चौथेपन की मार’ अध्याय का विशेष उल्लेख था। मेनुस्क्रिप्ट की स्क्रीन रिकॉर्डिंग पोस्ट कर रहा हुं।

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