लोकतंत्र सेनानी बालमुकुंद चौरसिया 'बाली दादा' का निधन:95 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस, शाम को हुआ अंतिम संस्कार

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ललितपुर जिले के कस्बा पाली निवासी वरिष्ठ लोकतंत्र सेनानी बालमुकुंद चौरसिया, जिन्हें ‘बाली दादा’ के नाम से जाना जाता था, का शुक्रवार को निधन हो गया। वे 95 वर्ष के थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही नगर सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार शाम पांच बजे मुक्ति धाम में किया गया। परिजनों ने बताया कि उनका स्वास्थ्य सामान्य था, लेकिन शुक्रवार सुबह अचानक उनका निधन हो गया। स्वर्गीय बालमुकुंद चौरसिया लंबे समय से समाजसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण के लिए सक्रिय रहे थे। वे अपने जीवनकाल में सरलता, सादगी और राष्ट्रभक्ति के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। उनके विचार और संघर्षशील जीवन को आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत माना जाता है। इनके दो पुत्र तीन पुत्रियां है ,बड़े पुत्र का निधन हो चुका है , एक पुत्र अरविंद उर्फ रामकुमार चौरसिया वर्तमान में नगर पंचायत में पार्षद है । उनके पौत्र जितेंद्र चौरसिया ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की। परिवार और शुभचिंतकों में गहरा शोक व्याप्त है। बाली दादा के निधन पर नगर के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। नगर पंचायत कार्यालय में एक शोकसभा आयोजित की गई, जहां दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर नगर पंचायत के अधिकारी-कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। शोकसभा में वक्ताओं ने बाली दादा के योगदान को याद करते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और सामाजिक चेतना के लिए उनका संघर्ष सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके निधन को नगर के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया गया।

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