टांडा गैंग के सरगना 8वीं पढ़ें, लेकिन टेक्नो फ्रेंडली:पुलिस ट्रेस नहीं कर सके, इसलिए एक ही मोबाइल करते यूज; जेल में बनाया गिरोह

Actionpunjab
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कोटा ग्रामीण पुलिस की गिरफ्त मे आई एमपी की टांडा गैंग के सरगना करन और भारत 8 वीं तक पढ़े हैं, लेकिन वारदात के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करते। 4 साल पहले जेल मे रहते हुए दोनों ने मिलकर गैंग बनाई। दोनों के खिलाफ एमपी, तेलंगाना और राजस्थान में 30 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर ने बताया शुरुआती जांच मे सामने आया हैं कि गिरोह का सरगना (8 वीं तक) कम पढ़ा लिखा हैं। लेकिन मोबाइल टेक्नोलॉजी यूज करने में एक्सपर्ट है। वो गूगल मैप से पॉश कॉलोनियों को सर्च कर बड़े बंगलों को टारगेट करते थे। आरोपी वारदात के समय एक ही एंड्रॉयड फोन यूज करते हैं। लोकेशन ट्रेस होने के डर से वॉट्सऐप कॉल करके फोन को स्विच ऑफ कर देते। सीएफसीएल मे नकबजनी के बाद आरोपियों ने फोन बंद कर दिया था। बदमाशों को ट्रेस करना बड़ा चेलेंजिंग काम था। आरोपी इतने शातिर कि हाईवे पर टोल से गुजरने से परहेज करते थे। ट्रेस होने के डर से कच्चे रास्तों से होकर जाते थे। गिरोह के तरीकों पर नजर रखी, तो क्लु मिला बदमाशों का पता लगाना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण था। बदमाशों ने कोई सुराग नहीं छोड़ा। टीम ने आसपास और एमपी के चोर गिरोह के वारदात करने के तरीकों की छानबीन की। एक टीम सीसीटीवी फुटेज खंगाले में जुटी रही। टीम को खानपुर टोल पर एक संदिग्ध कार का फुटेज मिला। ये कार एमपी के टांडा गांव के व्यक्ति के नाम थी। इसके बाद टीम ने लगातार कार को फोलो किया। जगह-जगह सीसीटीवी फुटेज चैक किए। टीम ने एमपी की टांडा पुलिस की मदद से बदमाशों के संभावित ठिकानों धार, राजगढ़, कुक्शी, इंदौर व टांडा में दबिश दी। आरोपी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर भागने में कामयाब हो गए। 15 दिन धार में रही टीम पुलिस की एक टीम ने 15 दिन तक धार मे रहकर बदमाशों पर नजर रखी। इस दौरान टीम के सदस्य कभी फल, सब्जी वाले बनकर, कभी ड्राइवर बनकर, कभी मेकेनिक, ढाबा कर्मचारी बनकर रेकी की। इसी दौरान तकनीकी मदद से आरोपियों को लोकेशन इंदौर मे होना पता लगा। मुख्य आरोपी करन अपनी स्कोडा कार से इंदौर में किसी वारदात की फिराक मे घूम रहा था। टीम ने एरोड्रम इंदौर से करन को पकड़ लिया। करन की उम्र 24, आपराधिक मामले 30 पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी ने साल 2021 में तेलंगाना में सांगारेड्डी व रंगारेड्डी जिले में 3 वारदातों को अंजाम दिया। इसी साल भारत ने भी तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में अलग-अलग जगहों पर 15 से ज्यादा वारदात की।दोनों आरोपी एमपी के टांडा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। जेल में रहते हुए दोनों ने गैंग बनाया। अपने गांव के संजय, महेंद्र, मान सिंह सहित 7-8 लोगों को शामिल किया। करन व भारत के खिलाफ 30-30 मामले दर्ज है। इनमें ज्यादातर वारदात तेलंगाना में की। करन ने साल 2025 में कोटा, झालावाड़ और बारां में भी वारदात की। चोरी का माल बेचने के लिए अपने जैसे लोगों को ढूंढा आरोपी करन व भारत ने चोरी का सामान बेचने के लिए अपने जैसे लोगों को ढूंढा। इसी दौरान राहुल सोनी, करन के संपर्क में आया। जबकि संजय सोनी भारत के संपर्क में आया। आरोपियों ने झालावाड़ में वारदात के बाद कोटा में रेकी कर नकबजनी की वारदात की। फिर भारत ने इंदौर निवासी संजय सोनी को चोरी का 14 लाख का सामान बेचा। बाकी 34 लाख का आइटम अलीराजपुर निवासी राहुल सोनी व दाहोद निवासी हार्दिक सोनी को बेचना बताया।आरोपी करन व भारत गुजरात, एमपी, आंध्रप्रदेश के कई थानों में सालों से वांछित चल रहे है। ये खबर भी पढ़े गूगल-मैप से पॉश-कॉलोनी चुन करोड़ों की चोरी करती थी गैंग:कोटा पुलिस ने MP से 6 बदमाशों को पकड़ा; 30 लाख कैश और सोना-चांदी के गहने बरामद मध्य प्रदेश की टांडा गैंग पहले गूगल पर पॉश कॉलोनियों को सर्च करती थी, फिर रेकी करके चोरी की योजना बनाती और वारदात को अंजाम देती थी। यह गैंग दो गुटों में बंटी हुई थी। पहला गुट चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था, जबकि दूसरा गुट चोरी के माल को ठिकाने लगाता था। कोटा ग्रामीण पुलिस ने गैंग को उस समय दबोच लिया, जब वे इंदौर (मध्य प्रदेश) की एक पॉश कॉलोनी में रेकी कर वारदात की योजना बना रहे थे। खबर पढ़े

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