मौनी अमावस्या आज:दोपहर में करें पितरों के लिए धूप-ध्यान, शाम को तुलसी के पास जलाएं दीपक, जानिए माघी अमावस्या पर कौन-कौन से शुभ काम करें

Actionpunjab
4 Min Read




आज (रविवार, 18 जनवरी) माघ महीने की अमावस्या है। इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। रविवार और अमावस्या के योग में सूर्य पूजा के साथ ही पितरों के लिए धूप-ध्यान कर सकते हैं। इस तिथि पर दान-पुण्य और नदी स्नान करने की परंपरा भी है। आज मौन रहकर पूजा-पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, माघी अमावस्या को मौनी अमावस्या इसलिए कहा जाता है, ब्रह्मा जी के मानस पुत्र मनु ऋषि ने माघी अमावस्या पर मौन रहकर तप किया था। इसी कारण इस अमावस्या पर मौन व्रत करने का विशेष महत्व है। मौन रहने से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं। अमावस्या तिथि के स्वामी पितर देव माने गए हैं। इस दिन अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और धूप-ध्यान करने से तृप्ति मिलती है। पितर देव प्रसन्न होकर अपने कुटुंब को आशीर्वाद देते हैं। उनके आशीर्वाद से घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। मान्यता है कि अगर पितर देवता असंतुष्ट होते हैं, तो परिवार में रोग, बाधाएं और अशांति बनी रहती है। मौनी अमावस्या पर किए गए उपायों से पितृ दोष भी शांत होता है। माघी अमावस्या पर गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना गया है। इसके साथ ही मथुरा, काशी, उज्जैन और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थानों में दर्शन-पूजन किया जा सकता है। जो लोग नदी तक नहीं जा पाते, वे घर पर ही स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद दान-पुण्य जरूर करना चाहिए। इस दिन जूते-चप्पल, कपड़े, ऊनी वस्त्र, कंबल, अनाज, भोजन, स्वर्ण और चांदी जैसी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। मंदिरों में पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, गुलाल, अबीर, घी-तेल, रुई, धूपबत्ती, चंदन, जनेऊ, फूल, मिठाई और माता जी के लिए चुनरी दान कर सकते हैं। दान करते समय मौन रहना चाहिए। माघ महीने की अमावस्या पर स्नान के बाद तांबे के लोटे में जल, कुमकुम, लाल फूल और चावल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इस दौरान ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें। इसके बाद पूरे घर में साफ-सफाई करें और गंगाजल या गौमूत्र का छिड़काव करें। घर के मुख्य द्वार पर रंगोली बनाना भी शुभ माना गया है। सुबह पीपल के पेड़ को जल चढ़ाएं और उसकी 108 परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। मौनी अमावस्या पर पूरे दिन मौन रहना उत्तम माना गया है। अगर यह संभव न हो, तो कम से कम पूजा-पाठ और दान करते समय मौन जरूर रखें। इस दिन भगवान विष्णु और महालक्ष्मी का विशेष अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के समय ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। घर में स्थापित बाल गोपाल का अभिषेक करें और उन्हें माखन-मिश्री और तुलसी अर्पित करें। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करें। अमावस्या की दोपहर करीब 12 बजे गाय के गोबर से बने कंडे जलाएं। धुआं बंद होने पर अंगारों पर गुड़-घी, थोड़ी सी खीर-पुड़ी अर्पित करें। इसके बाद तांबे या पीतल के लोटे में जल, काले तिल, जौ, चावल और फूल डालें। पितरों का ध्यान करते हुए हथेली से जल अर्पित करें और ऊँ पितृदेवेभ्यो नम: मंत्र का जप करें। अंत में पितरों से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा मांगें। धूप-ध्यान के बाद गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए भोजन रखें और जरूरतमंद लोगों को दान दें।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *