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करनाल जिले की घरौंडा अनाज मंडी से जुड़े एक बड़े चावल मिलिंग मामले में सरकारी धान के बदले निर्धारित समय पर चावल की आपूर्ति न करने पर राइस मिलर, उसके प्रोपराइटर और गारंटरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। खरीफ सीजन 2024-25 के दौरान सरकार द्वारा अलॉट किए गए धान के एवज में चावल की डिलीवरी न होने से विभाग को करोड़ों रुपये का नुकसान होने का आकलन किया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि राइस मिल परिसर में धान और चावल का कोई स्टॉक मौजूद नहीं था। मिलिंग के लिए हुआ था सरकारी एग्रीमेंट
खरीफ वर्ष 2024-25 में मैसर्स शिवाए एग्रोटेक, जी.टी. रोड घरौंडा, जिला करनाल का चयन सरकारी धान की मिलिंग के लिए किया गया था। इस चयन की प्रक्रिया मिलिंग कमेटी करनाल के माध्यम से हुई, जिसके चेयरमैन डीसी करनाल हैं। डीसी के निर्देशों पर गठित कमेटी द्वारा राइस मिल का चयन किया गया और डीएफएससी ने धान अलॉट करने के आदेश जारी किए थे। इन आदेशों की पालना में विभाग के इंस्पेक्टर द्वारा धान की अलॉटमेंट करवाई गई। घरौंडा और असंध मंडी से हुआ धान अलॉट
विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार घरौंडा अनाज मंडी से 27 हजार 198 क्विंटल और असंध अनाज मंडी से करीब 9 हजार 187 क्विंटल धान मिलर को दिया गया। इस तरह कुल करीब 36 हजार 385 क्विंटल धान मैसर्स शिवाए एग्रोटेक को अलॉट किया गया था। नियमों के अनुसार 67 प्रतिशत रिकवरी के आधार पर मिलर को करीब 24 हजार 378 क्विंटल चावल सरकारी एजेंसियों को वापस करना था। निर्धारित समय तक पूरी डिलीवरी नहीं
रिकॉर्ड के मुताबिक राइस मिलर द्वारा 30 सितंबर 2025 तक केवल करीब 12 हजार 66 क्विंटल चावल ही विभाग को भेजा गया। इस हिसाब से अब भी करीब 12 हजार 311 क्विंटल चावल बकाया पाया गया। आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि मिलर सरकार द्वारा निर्धारित समय-सीमा में चावल की पूरी डिलीवरी करने में विफल रहा। पीवी में स्टॉक शून्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब राइस मिल की फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई गई तो वहां चावल और धान का स्टॉक शून्य पाया गया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि सरकारी धान के बदले चावल की आपूर्ति जानबूझकर नहीं की गई। विभाग का आकलन है कि इस पूरे मामले में सरकार को 5 करोड़ 30 लाख 14 हजार 204 रुपये का नुकसान हुआ है। यह गणना 30 सितंबर 2025 तक की गई है, जिसमें ब्याज, होल्डिंग चार्ज, टैक्स और अन्य शुल्क शामिल नहीं हैं। नोटिस के बाद भी सिर्फ 20 लाख जमा
विभाग की ओर से कई नोटिस जारी किए जाने के बावजूद अब तक केवल 20 लाख रुपये ही जमा करवाए गए। इसके बाद खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के इंस्पेक्टर सज्जन मान की शिकायत पर पुलिस को लिखित दरखास्त दी गई। प्रोपराइटर और गारंटरों के खिलाफ केस
थाना प्रभारी दीपक कुमार ने बताया कि शिकायत के आधार पर प्रोपराइटर सेक्टर-8 पार्ट-2 करनाल निवासी विकास गुप्ता, गारंटर सेक्टर-7 करनाल निवासी सतीश कुमार और सेक्टर-8 पार्ट-2 करनाल निवासी अंकित गुप्ता के खिलाफ थाना घरौंडा में मुकदमा दर्ज किया गया। अब पुलिस मामले की गहनता से जांच करेगी और सबूतों के आधार पर आगामी कार्रवाई अमल में लाएगी।
करनाल में शिवाए एग्रोटेक के राइस मिलर पर FIR:नहीं लौटाया सरकार का चावल, सरकार को लगाया 5 करोड़ का चुना
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