Tilkund chaturthi significance in hindi, ganesh puja vidhi, guru graha puja vidhi

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9 घंटे पहले

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आज (गुरुवार, 22 जनवरी) माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का व्रत है। इसे तिलकुंद चतुर्थी, विनायकी और वरद चतुर्थी भी कहते हैं। चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश हैं और गुरुवार का कारक ग्रह गुरु (बृहस्पति) है। ऐसे में इस दिन भगवान गणेश के साथ ही गुरु ग्रह के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, ज्योतिष में गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, भाग्य, संतान और सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है। गुरु ग्रह धनु और मीन राशि का स्वामी है। जिन लोगों की कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर है, उन्हें चतुर्थी और गुरुवार के योग में गुरु ग्रह की पूजा करनी चाहिए। गुरु ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल चढ़ाएं। पीले फूल, चंदन, बिल्व पत्र, आंकड़े के फूल, गुलाब से श्रृंगार करें। गुरु ग्रह के मंत्र ॐ बृं बृहस्पतये नमः का जप करें। भोग में बेसन के लड्डू अर्पित करें।

तिलकुंद चतुर्थी पर करें गुरु ग्रह से जुड़े शुभ काम

  • तिलकुंद चतुर्थी पर पूजा-पाठ के साथ ही तिल और पीली वस्तुओं का दान करना चाहिए।
  • पानी में तिल मिलाकर स्नान करें। नहाने से पहले शरीर पर तिल से बना उबटन लगा सकते हैं।
  • भगवान गणेश को तिल के लड्डू का भोग लगाएं।
  • इस दिन तिल से हवन करना शुभ माना जाता है।
  • भोजन में तिल का सेवन करें।
  • शाम को भी भगवान गणेश की पूजा करें और तिल-गुड़ का भोग लगाएं।

सरल स्टेप्स में करें भगवान गणेश की पूजा

  • तिलकुंद चतुर्थी पर घर के मंदिर में भगवान गणेश का पंचामृत और जल से अभिषेक करें।
  • हार-फूल और वस्त्रों से श्रृंगार करें। दूर्वा, फल, फूल, चावल, रोली, मौली अर्पित करें।
  • तिल और तिल-गुड़ से बनी मिठाई, लड्डुओं का भोग लगाएं। गणेश पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए।
  • पूजा में ऊँ श्रीगणेशाय नमः मंत्र का जप करें। धूप-दीप जलाएं और कर्पूर से आरती करें।
  • पूजा के बाद भगवान से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें और फिर अन्य भक्तों को प्रसाद बांटें।
  • शाम को भी इसी विधि से पूजा करनी चाहिए। चतुर्थी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  • इस दिन पीले वस्त्र, पीली दाल, हल्दी, केला, चना दाल, गुड़, तिल और भोजन का दान करना चाहिए।
  • गुरु ग्रह की शांति के लिए ग्रंथों का दान कर सकते हैं। किसी मंदिर में पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, हार-फूल, प्रसाद, भगवान के वस्त्र, चंदन, घी, तेल और रूई आदि का दान करना भी शुभ माना जाता है।

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