प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच 8 दिनों से विवाद जारी है। यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने शंकराचार्य से विवाद खत्म करने की अपील की है। केशव मौर्य आज अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने जा सकते हैं।
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डिप्टी CM केशव मौर्य रविवार शाम प्रयागराज पहुंचे। सर्किट हाउस में डिप्टी सीएम ने कहा- मुख्यमंत्रीजी ने मामले का संज्ञान लिया है। मुझे जब बात करने के लिए कहा जाएगा, जरूर करूंगा। मैं प्रार्थना तो कर ही सकता हूं। उनके चरणों में शीश झुका सकता हूं। निवेदन कर सकता हूं। निवेदन किया है। आगे भी यही निवेदन करता हूं। जो भी विरोध है, उसको समाप्त करके, संगम में स्नान करके और जो एक संदेश अनुकूल जाना चाहिए, वह देने की कृपा करें।
केशव मौर्य ने शंकराचार्य के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्हें समझदार और सीएम बनाए जाने की इच्छा जताई थी। डिप्टी सीएम ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं। वह एक संत हैं और उनकी भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। अगर वह किसी को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं, तो हम उनकी भावना का सम्मान करते हैं।
शिविर में जबरन घुसे युवक, हंगामा शनिवार रात कट्टर सनातनी सेना नाम के संगठन के 8 से 10 युवक भगवा झंडा लिए नारे लगाते पहुंच गए थे। शंकराचार्य के शिविर में घुसने की कोशिश की। ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ के नारे लगाने लगे।
अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से धक्का-मुक्की भी हुई। 15 मिनट तक हंगामा चला। संगठन का प्रमुख सचिन सिंह नाम का व्यक्ति बताया जा रहा है। इसके बाद शंकराचार्य के शिष्यों ने शिविर को चारों तरफ से ढक दिया। अंदर जाने के रास्ते ब्लॉक कर दिए।
शंकराचार्य के शिविर प्रभारी ने थाने में शिकायत दी है। कहा है कि असामाजिक लोग लाठी-डंडे और झंडे लेकर आए थे। जबरन शिविर में घुसकर मारपीट करने पर उतारू थे। शिविर में मौजूद सेवकों ने उन्हें समझाकर बाहर निकाल दिया, लेकिन हालात काफी गंभीर थे। बड़ी घटना हो सकती थी। ऐसे में शंकराचार्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
शिविर में युवकों के हंगामे पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा-
हमारे ऊपर आक्रमण इसलिए किया गया है, क्योंकि हम गो-रक्षा की बात कर रहे हैं। हम इनकी (भाजपा) आंख की किरकिरी बन गए हैं, कितना भी परेशान करें, मैं पीछे नहीं हटूंगा। जितना हमारे ऊपर जुल्म होगा, उतनी ही मजबूती से कदम उठाऊंगा।


युवकों ने पहले शंकराचार्य के शिविर में घुसने की कोशिश की। उनके शिष्यों से धक्का-मुक्की के बाद वे योगी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे।

अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों ने शिविर के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया है। अंदर जाने के सभी रास्ते ब्लॉक कर दिए हैं।
मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था, जानिए- 18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे में दो नोटिस जारी किए। पहले में उनके शंकराचार्य की पदवी लिखने और दूसरे में मौनी अमावस्या को लेकर हुए बवाल पर सवाल पूछे गए। प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिस के जवाब भेज दिए थे।
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