कर्ण की मदद से अर्जुन को मारना चाहता था नाग:महाभारत: कर्ण की सीख- सफलता छल या गलत साधनों से मिले, तो वह लंबे समय तक सम्मान नहीं दिला सकती

Actionpunjab
3 Min Read




महाभारत में एक अश्वसेन नाम के नाग का किस्सा है। खाण्डव वन में एक बार भयंकर अग्निकांड हुआ था। इस अग्निकांड में जंगल के अधिकतर जीव-जंतु खत्म हो गए थे। उसी वन में अश्वसेन नाम का एक मायावी नाग रहता था। उसकी माता भी अग्निकांड में मारी गई। अश्वसेन इस घटना के लिए अर्जुन को जिम्मेदार मानता था। इसलिए अश्वसेन ने अर्जुन से बदला लेने का संकल्प कर लिया। कई वर्षों के बाद जब कुरुक्षेत्र में कौरव और पांडवों का युद्ध शुरू हुआ, उस समय अश्वसेन भी कुरुक्षेत्र में पहुंच गया था और अर्जुन से बदला लेने का अवसर खोजने लगा। तब एक दिन कर्ण और अर्जुन आमने-सामने आ गए। अश्वसेन ने इसे बदला लेने का उचित अवसर समझा। वह एक बाण का रूप धारण करके चुपचाप कर्ण के तरकस में जा बैठा। जब कर्ण ने अर्जुन पर प्रहार करने के लिए बाण निकाला, तो संयोग से वही बाण उसके हाथ में आया जिसमें अश्वसेन छिपा था। कर्ण के सारथी शल्य ने बाण को देखकर कहा था कि यह कुछ विचित्र बाण प्रतीत हो रहा है, इसलिए दूसरा बाण चुनना चाहिए, लेकिन कर्ण ने कहा कि वह एक बार धनुष पर चढ़े हुए बाण को वापस नहीं उतारता है। उसने उसी बाण को अर्जुन की ओर छोड़ दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने उस बाण में छिपे अश्वसेन को पहचान लिया। भगवान ने तुरंत रथ के घोड़ों को नीचे बैठा दिया। परिणाम यह हुआ कि बाण अर्जुन का सिर नहीं काट सका, केवल मुकुट ही कटकर गिरा। अर्जुन के बच जाने पर अश्वसेन बहुत क्रोधित हुआ। वह अपने वास्तविक नाग रूप में कर्ण के सामने पहुंच गया। उसने कहा कि यदि उसे दोबारा सावधानी से छोड़ा जाए, तो वह निश्चित रूप से अर्जुन का वध कर देगा। तब कर्ण ने उससे पूछा कि आप कौन हैं और मेरी सहायता क्यों करना चाहते हैं? अश्वसेन ने अपना परिचय दिया और बदला लेने की पूरी बात बताई। कर्ण ने कहा कि मैं अपनी विजय केवल अपने पुरुषार्थ से चाहता हूं। छल, द्वेष या किसी छिपी हुई सहायता के सहारे मिली सफलता मुझे स्वीकार नहीं है।
कर्ण अश्वसेन से आगे कहा कि अगर नैतिकता छोड़कर जीतना पड़े, तो ऐसी जीत से हार कहीं बेहतर है। यह उत्तर कर्ण के चरित्र की महानता और उसके आत्मसम्मान को प्रकट करता है। इसके बाद कर्ण ने अश्वसेन को वहां से लौटा दिया। प्रसंग की सीख

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *