उदयपुर और डूंगरपुर के जिले में पीएम किसान सम्मान निधि योजना को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत की सतर्कता के कारण एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। डूंगरपुर जिले की कई ग्राम पंचायतों में उन लोगों को भी योजना का लाभ दिया जा रहा था, जो इसके पात्र ही नहीं थे। जब सांसद को इसकी भनक लगी और जांच हुई, तो आंकड़े बेहद चौंकाने वाले निकले। मामले में उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने तथ्यात्मक जानकारी देते हुए बताया कि जिले की बारों का शेर, बोलाडरा, बटका फला और गुमानपुरा जैसी पंचायतों में भारी गड़बड़ी हो रही है। सांसद ने बकायदा एक सूची भी सौंपी और बताया कि जिन्हें लाभ मिल रहा है, वे डूंगरपुर के मूल निवासी ही नहीं हैं, बल्कि बाहरी लोग हैं। मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए डूंगरपुर कलेक्टर को तुरंत जांच के आदेश दिए। कलेक्टर ने जब छानबीन करवाई, तो सांसद की आशंका सही साबित हुई। जांच के लिए कुल 550 लोगों की लिस्ट तैयार की गई और संबंधित तहसीलदारों को हर एक नाम की हकीकत जानने का जिम्मा सौंपा गया। जांच के बाद जो रिपोर्ट आई, उसने सबको हैरान कर दिया। जिन 550 लोगों की जांच हुई थी, उनमें से केवल 17 व्यक्ति ही पात्र पाए गए, जबकि 533 लोग पूरी तरह अपात्र निकले। अधिकतर मामलों में अपात्रता की सबसे बड़ी वजह यह थी कि ये लोग उस क्षेत्र के मूल निवासी ही नहीं थे और न ही इनसे कोई संपर्क हो पा रहा था। ग्राम पालगामडी, बारो का शेर, बोलाडरा, मानतफला, बटका फलां, मेताली, गुमानपुरा और सेरावाडा में पटवारी और तहसीलदार की जांच में लगभग सभी लोग फर्जी लाभार्थी निकले। इस खुलासे के बाद सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मांग की है कि न केवल इन अपात्र लोगों पर कार्रवाई हो, बल्कि इस साजिश के पीछे जो भी लोग शामिल हैं जिन्होंने इनके नाम लिस्ट में जोड़े, उनके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। अभी तो जांच की शुरुआत हुई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई और गांवों से ऐसे ही फर्जी नाम सामने आएंगे। सांसद डॉ रावत ने अपात्र लोगों तथा इनके नाम जोडने की साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ कडी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
सांसद की शिकायत पर जांच, 96 फीसदी अपात्र:पीएम किसान सम्मान निधि योजना में रहा फर्जीवाड़ा, 550 में 533 अपात्र निकले
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