काम नहीं कर रहे, हवा में महल बना रहे हैं:सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा- कहानी न सुनाएं; आवारा कुत्तों का मामला

Actionpunjab
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आवारा कुत्तों के मुद्दे पर राज्यों की लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई है। आवारा कुत्तों की नसबंदी (स्टरलाइजेशन) बढ़ाने संबंधी अपने निर्देशों का राज्यों में पालन न किए जाने पर कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें जमीनी काम करने के बजाय सिर्फ बातें कर रही हैं और हवा में महल बना रही हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि राज्यों ने कोर्ट के आदेशों का ठीक से पालन नहीं किया है। कोर्ट का कहना है कि कई राज्यों ने सिर्फ कागजों में रिपोर्ट दी है, लेकिन असल में काम नहीं हुआ।
मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने विभिन्न राज्यों में उठाए गए कदमों का सार प्रस्तुत किया और साथ ही कमियों की ओर इशारा किया। कोर्ट ने बताया कि राज्यों को ये एक्शन लेना थे: बिहार पर सवाल कोर्ट में बताया गया कि बिहार में 34 एबीसी केंद्र हैं और करीब 20 हजार कुत्तों की नसबंदी हुई है। लेकिन कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य में 6 लाख से ज्यादा कुत्ते हैं, तो यह संख्या बहुत कम है। यह भी साफ नहीं बताया गया कि हर दिन कितने कुत्तों की नसबंदी होती है और कितने इलाकों में बाड़ लगी है। कुत्तों के काटने के आंकड़े नहीं कोर्ट ने कहा कि असम को छोड़कर किसी भी राज्य ने यह नहीं बताया कि कितने लोग कुत्तों के काटने से घायल हुए। असम के आंकड़े देखकर कोर्ट हैरान रह गया। जहां 2024 में 1.66 लाख लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए वहीं 2025 में सिर्फ जनवरी में 20,900 मामले आ गए। कोर्ट ने इसे बहुत चिंताजनक बताया। अधूरे जवाब स्वीकार नहीं करेंगे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब वह राज्यों के अस्पष्ट और अधूरे जवाब स्वीकार नहीं करेगा। जस्टिस नाथ ने चेतावनी दी कि जो राज्य साफ जानकारी नहीं देंगे, उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणी की जाएगी।
कोर्ट ने गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, झारखंड और गुजरात की दलीलें भी सुनीं। स्कूल और अस्पताल अब भी असुरक्षित कोर्ट ने कहा कि कई स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी इमारतों में अब भी बाड़ नहीं लगी है। कोर्ट के मुताबिक हर सार्वजनिक इमारत की घेराबंदी होनी चाहिए। ताकि बच्चों और मरीजों की सुरक्षा हो, आवारा जानवर अंदर न आ सकें, सरकारी संपत्ति सुरक्षित रहे। गुरुवार को पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना की रिपोर्ट पर सुनवाई होगी। आवारा कुत्तों को वापस उसी जगह नहीं छोड़ें मेनका गांधी ने कोर्ट की अवमानना की 20 जनवरी को पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की आवारा कुत्तों के मुद्दे पर कोर्ट के आदेशों की आलोचना संबंधी टिप्पणियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि उन्होंने अदालत की अवमानना की है। सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिनमें 7 नवंबर 2025 के उस आदेश में संशोधन की मांग की गई है, जिसमें संस्थागत क्षेत्रों और सड़कों से आवारा जानवरों को हटाने का निर्देश दिया गया था। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने महिला डॉग फीडरों और केयरगिवर्स के कथित उत्पीड़न के आरोपों पर दखल देने से इनकार करते हुए कहा था कि यह कानून-व्यवस्था का मामला है और पीड़ित एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।
महिलाओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मुद्दे पर भी अदालत ने सुनवाई से इनकार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर को निर्देश दिया था कि आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद तुरंत तय शेल्टरों में स्थानांतरित किया जाए। ———————— ये खबर भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट बोला-कुत्ते के काटने पर भारी मुआवजा तय होगा:जो आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित, वे अपने घर ले जाएं; उन्हें ऐसे नहीं छोड़ सकते सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों के हमलों पर सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा, ‘बच्चों या बुजुर्गों को कुत्तों के काटने, चोट लगने या मौत के हर मामले में हम राज्य सरकारों से भारी मुआवजा दिलवाएंगे, क्योंकि उन्होंने पिछले 5 सालों में नियमों को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया।’

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